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Ram Ashery's Blog (31)

जिंदगी का सफर

हमारा आज और कल एक सिक्के के दो पहलू हैं 

सुनहरे कल के लिए आज की बलि मत चढ़ा दो 

माना की आज ज़िंदगी कठिन है पर जीना जरूरी है 

उसके लिए अपने  भविष्य को बचाना है 

तिनके का सहारा लेकर हमें जाना है उस पार ।  

हिम्मत न हार तूफान से टकरा 

अपने कल के लिए कठिन संघर्ष कर 

आया भयंकर तूफान खतरे में जग जहान है 

आशा की पतवार है किश्ती नदी मझधार है 

हिम्मत न हार हमें जाना है उस पार । 

मंजिल  पर दूर तक कोई नजर नहीं आता 

छोटा है तो…

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Added by Ram Ashery on November 21, 2020 at 3:00pm — 2 Comments

न्याय की उम्मीद

जो डूब चुका है कंठ तक झूठ के सवालों में 

उससे ही हम न्याय की उम्मीद लगा बैठे ।  

देश आज फंस चुका है गद्दारों के हाथों में 

हमारी आपसी मतभेद का फाइदा उठा बैठे । 

हमसे मांगते मंदिर का सबूत न्यायालय में 

भारत में भी तालिबानी फरमान सुना बैठे । 

राम के मंदिर के लिए लड़ रहे न्यायालय में 

सुबह की रोशनी में अपना अस्तित्व देख बैठे । 

आज न्यायालय ही खड़ा हो गया सवालों में 

जो संविधान को अलग रख निर्णय ले बैठे । 

न्यायाधीस को शर्म नहीं…

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Added by Ram Ashery on August 24, 2019 at 8:30pm — No Comments

कागज की नाव

कागज की किस्ती और वर्षा का पानी,

वह बचपन की यादें हैं बहुत याद आती 

आज रूठी गई दादी और वर्षा की रानी 

न कहती है कहानी न बरसता है पानी॥

बच्चों को पता नहीं कैसे बहती है नाली 

छतों से गटर में बहता, बरसा का पानी 

गटर जब चोक हो ,सड़क पर बहे पानी  

सड़के और गलियाँ नदियाँ बनके बहती ॥ 

वह कागज की किस्ती तभी याद आती 

दादी की कहानी, रिमझिम बरसता पानी 

बहुत याद आती वह बचपन की कहानी 

माँ बाप को फुरसत कहाँ कहे जो…

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Added by Ram Ashery on August 18, 2019 at 3:00pm — 2 Comments

रोटी की मजदूर

यहाँ रोटी के चक्कर में फिरता

गाँव से शहर काम नहीं मिलता

रात को थका हुआ घर लौटता

मजदूर दुखी मन से यह कहता ।

अब घर का राशन बच्चे की फीस

बड़ी मुश्किल से कटेगें दिन तीस ।

विकास की गति है पंद्रह से बीस

चली है दिल्ली से ले शुभ अशीष ।

सड़क पर बना पुल जब गया टूट

किस्मत की गाड़ी को लिया लूट

प्रतिपक्ष कहते रहे सभी एक जुट

विपक्षी एकता में डाल दी फूट ।

संसद से सड़क तक झूठ ही झूठ

जंगल में बचे सिर्फ ठूठ ही ठूठ

मानवता गई इस जहां से… Continue

Added by Ram Ashery on March 24, 2018 at 4:42pm — 5 Comments

गर बनाना चाहते हो विकसित

गर बनाना चाहते हो विकसित

वतन तो करनी होगी मेहनत ।

धरम जाति की दूर करो नफरत

सब आज मिलकर संवार लो किस्मत ।

मजदूर गरीब की किस्मत खोटी

प्रजातन्त्र में भी मिलती न रोटी ।

मरता किसान फसल हुई खोटी

घर में न अन्न कैसे बने रोटी ।

कर्ज में कृषक सरकार है सोती

ललित विदेश में चुन रहा मोती ।

अज्ञान है मिटाना करो सुनिश्चित

हर बालक हो आज करो सुशिक्षित ।

बज गया बिगुल जंग होना बाकी

खत्म हुइ रात सुबह होना बाकी ।

समता समाज में आना बाकी…

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Added by Ram Ashery on March 23, 2018 at 4:00pm — 6 Comments

सुख

सुख

सुख! सुख! लोगों के जीवन में सुख है कहाँ

जन्म से लेकर मृत्यु तक सभी दुखी हैं यहाँ

सुख हमारे जिंदगी में मृग तृष्णा जैसी है यहाँ

सदा हमसे दूर ही देखने में नजर आती यहाँ

अपने नेताओं को दौलत की खुशबू आती जहां

सभी अपने ईमान को बेचकर टूट पड़ते वहाँ

सभी लोग सुख खरीदने की कोशिस करते जहाँ

माँ बाप भाई बहन पैसे के आगे सब झूठे यहाँ

अपनों से लोग झूठ फरेब धोखा सब करते यहाँ

थोड़ी सुख के लिए लोग अंगारों पर चलते यहाँ

ज़िंदगी की नाव में परिवार…

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Added by Ram Ashery on January 12, 2018 at 8:00pm — 1 Comment

(माँ रमा बाई

(माँ रमा बाई को यह कविता समर्पित )

माँ रमा बाई जी को कोटि कोटि वंदन

आओ हम सब करें फूलों से अभिनंदन

वक्त की पुकार समर्पित कर दो तन मन

ज्ञान की ज्योति से प्रकाशित करो वतन

अब समाज में समता लाकर रहेगें हम

नफरत सभी के दिलों से निकाल देगें हम

उनके अधूरे काम को अब पूरा करेगें हम

अज्ञान को संसार से मिटा कर रहेगें हम

जीवन के हर क्षण में याद रहे यह प्रण

टूटे दिलों को जोड़ एक माला बनाएँ हम

खुशियाँ सभी के राह में सदा बिछाएँ…

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Added by Ram Ashery on May 27, 2017 at 3:00pm — 2 Comments

शिक्षा के पंख

शिक्षा के पंख लगे जब मानव तन में

रंक बने राजा हमारे देश के शासन में

झूमता हृदय सबका खुशी से उमंग में

संभव है सब कुछ आज इस जगत में

धरती को नापे डाले मात्र एक क्षण में

सागर को कैद करले अपनी मुट्ठी में

हिमालय जीत का स्वप्न रखे मन में

अपने यश की पताका गाड़दे अंबर में

भ्रम सारे टूट जाएँ जो फैले समाज में

नफरत मिट जाएँ आपसी व्यवहार में

विकास की नदी बहा दे अपने देश में

समता की फसल खूब लहरे समाज में

आज ममता, भाईचारा दिखे समाज…

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Added by Ram Ashery on February 17, 2017 at 2:30pm — 6 Comments

आज के पुजारी बन बैठे भगवान ।

दुनिया में है अपना देश महान

आज के पुजारी बन बैठे भगवान ।

करुणा, दया,और धर्म से वंचित

मानवता को करते ये लज्जित

प्रभु के ऊपर खुद होते सुशोभित

कहते जग में हम सबसे विद्वान  

आज के पुजारी बन बैठे भगवान ॥

शील समाधि प्रज्ञा सबसे वंचित

सभी को पता है इनकी हकीकत

अज्ञानता से चलती है सियासत

वेद ज्ञान से विमुख ये पुरोहित

देश में चहुं दिश फैला अज्ञान

आज के पुजारी बन बैठे भगवान ॥

देव दासी प्रथा खूब थी…

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Added by Ram Ashery on February 4, 2017 at 5:30pm — 5 Comments

मधुमक्खी

फूलों को प्यार से सुनाती है प्रेम धुन

उन्हीं पर लुटाती अपना सर्वस्य जीवन

बदले में फूलों को देती है नया जीवन

निभाते हैं रिश्ता ये दोनों सारा जीवन ॥

जो फूल हमारे जीवन लाते हैं खुशियाँ

मिटा देते गम भर देते हैं सारी खुशियाँ

भौरें और तितलियाँ बजाती हैं तालियाँ

बदले में जीवन भर करते हैं रंगरेलियाँ ॥

हम इंसानों को नहीं है जरा भी शरम

हम इन फूलों के प्रति कितने बेरहम

फूल तो क्या !कलियों पर नहीं रहम

कहीं भगवान के नाम पर करते…

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Added by Ram Ashery on January 20, 2017 at 9:00pm — 6 Comments

समय की नजाकत

 कल हमारे समाज का सबसे श्रेष्ठ तबका ,

जो साक्षर कहलाते, आज निरक्षर हो गए ।

कूप मंडूप को ही जीवन का लक्ष्य समझा

आविष्कार कर न सके, वे गुलाम हो गए ।

समय की नजाकत को जिसने नहीं समझा,

ज्ञान का डंका बजाते, वे आज पीछे रह गए ।

इस बदलते जमाने में अपने को अलग रखा

विज्ञान के इस युग में वे अज्ञानी हो गए ।

खुद को सर्वश्रेष्ठ और दूसरों को मूर्ख समझा

वे दुनिया की इस दौड़ में सब पीछे रह गए ।

साथियों समय बदल रहा, नजाकत को समझो,

तुम…

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Added by Ram Ashery on January 14, 2017 at 12:00pm — 4 Comments

माँ की ममता

माँ की ममता कोई कल्पना नहीं,

ये सृष्टि संरचना की एक दास्तां 

जो जन्म लेती अनंत गहराई में  

पुष्पित,पल्लवित होती धरातल पर

एक कल्पतरु का सुंदर रूप लेकर

सदियों से चल रहा यह शिलशिला

ये हृदय से निकली प्यार ज्योति 

सूर्य की रोशनी में हर दिन बढ़ती

बांधती सभी को एक प्रेम डोर में

अपने खुशियों की देती तिलांजली

नन्ही सी चिड़िया लड़ती साँप से  

अपने प्राणों को संकट में डालकर

उसे बचाती मुसीबतों को झेलकर

उसके…

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Added by Ram Ashery on December 17, 2016 at 8:30pm — 5 Comments

बुद्धिजीवियों की एक ही हसरत

बुद्धिजीवियों की एक ही हसरत

सुख समृद्धि को देश में है लाना ।

संभालकर रखना अपनी विरासत,

आपसी झगड़ों से सबको बचाना ।   

इसके लिए खुद से करते कसरत

बिना किए कभी कोई भी बहाना ।

कोसों दूर रहती है इनसे मुसीबत 

मिलती इन्हे खुशियों का खजाना ।

सभी लोग जानते इनकी हकीकत

आलसी सदा करते अनेकों बहाना ।

ऐसे लोगों की होती एक फितरत

दूसरों की कमी पर उंगली उठाना ।  

समाज को दिखाते अपनी लियाकत,

समाज के सुधार से सदा मुंह…

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Added by Ram Ashery on December 10, 2016 at 9:30am — 4 Comments

अध्यापक और शिक्षा

गुरु भगवान से पहले आते सब जाते बलिहारी

ज्ञान का सूरज यहाँ निकलता नहीं रहे अज्ञानी

सूरज सादृश्य वह ज्ञान बांटते कोई नहीं शानी

शिक्षा एवं संस्कार बांटते यह है अमिट कहानी

सरकारी स्कूलों में अध्यापक करते हैं मनमानी

देश की प्रगति में बाधक पर कहलाते हैं ज्ञानी

ऐसे शिक्षक को दंड मिले तो नहीं कोई हैरानी    

मानवता को शर्मिंदा कर बच्चों की करते हानी

बच्चों संग करते भेद भाव शिक्षा में आनाकानी

नादानों से करते दुर्व्यवहार सुनकर होती हैरानी …

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Added by Ram Ashery on September 17, 2016 at 3:00pm — 7 Comments

मैंने आँखों में देखी तेरी सूरत

तेरी आँखों में मैंने देखी अपनी सूरत

तब से भूला जग में जीने की चाहत ॥

तेरी भोली मूरत का मैं पुजारी हो गया

तेरा दीवाना, परवाना मस्ताना हो गया

गलियों में तेरे घूमता आवारा हो गया

मैं सभी के नजरों में बदनाम हो गया ।

तेरी आँखों में मैंने देखी अपनी, सूरत

तब से भूला जग में जीने की चाहत ॥

भूलकर मैं सुध बुध मस्ताना हो गया

पतंगे की तरह मैं तेरा दीवाना हो गया  

तेरे बिन मैं तो अब बेसहारा हो गया   

सुबह शाम तेरी राह देखता रह गया…

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Added by Ram Ashery on September 16, 2016 at 3:30pm — 1 Comment

रोशनी

अंधेरे में रोशनी,

जीवन का सहारा ।

शाम को बिछड़ती,   

जब सुबह निहारा ।

इधर जब पौ फटी,  

तो देखो लो नजारा।  

क्या जानवर, पक्षी,

सब दिखे बे सहारा।

कोई रहम न करता ,

क्या कानून निराला ।

भूखे इंसान की रोटी,

बेटी हजम कर डाला। 

रोशनी की आस दिखती,

परंपरा का डर दे डाला ।

तन मन पर हजारों पीड़ा,  

सहन करके भी जी लेता ।  

अपनों का पेट भरता ,

अतीत को भूल जाता ।

मानवता को कलंकित…

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Added by Ram Ashery on May 14, 2016 at 1:00pm — 3 Comments

बाबा हम शर्मिंदा

चिंचोली की दशा देखकर बाबा हम शर्मिंदा हैं

छद्म भेष में प्रतिद्वंदी समाज को धोखा देता है

स्ंग्रहालय के संरक्षण मे करते कितना खोट

कुर्सी के लालच में फंस समाज पे करते चोट  

जर-जर होकर फट रही आज तेरी टाई कोट

तेरी निशानी मिटती देख बाबा हम शर्मिंदा है

चिंचोली की दशा देखकर बाबा हम शर्मिंदा हैं

छद्म भेष में प्रतिद्वंदी समाज को धोखा देता है

टंकण मशीन धूल खा रही मेरे कर्मो में खोट

भारत का संविधान लिख बाबा ने किया भेंट

तेरी धरोहर आज…

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Added by Ram Ashery on April 15, 2016 at 3:30pm — No Comments

हवा

हवा का बहता झोका

तन मन को है छूता

मानवता को दर्शाता

मित्र शत्रु को हर्षाता

कोई भेद नहीं करता

बारिस में वर्षा लाता

भूमि की प्यास बुझाता

दुनिया में प्यार बांटता

प्यार में धोखा खाता

हवा बवंडर बन जाता

अपनी दिशा भटकता

समाज में तबाही लाता 

जड़ से दरख्त उखाड़ता

जग से अस्तित्व मिटाता

उसे अंबर तक ले जाता

निर्दोषों को देता सजा

वृक्षो की डाली तोड़ता

छीनता पक्षी का…

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Added by Ram Ashery on April 1, 2016 at 4:00pm — 3 Comments

होली, का त्योहार

रंगो का त्योहार है होली आओ मिलकर खेले

भेद भाव सब दूर भगाकर आओ होली खेले ॥

जो अपने भूले भटके हैं

धर्म दीवारों से बिछड़े हैं

और दूर देश में अटके हैं

कड़वी पर यह सच्चाई है

एक प्यार भरा संदेशा है

यह आज सुनहरा मौका है

रंगो का त्योहार है होली आओ मिलकर खेले

भेद भाव सब दूर भगाकर आओ होली खेले ॥

दुख सुख का यह जीवन है

यहाँ मिलकर सबको रहना है

हमें जीवन बाधा से लड़ना है

दुश्मन से देश को बचाना है

हमें मिलकर आगे…

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Added by Ram Ashery on March 18, 2016 at 8:00am — 1 Comment

शिल्पी और धूप

सदा सच से दूर भागते

धूप ताप सब सह जाते

भगवान की मूर्ति बनाते

पूजा के हैं नियम बनाते

धर्म के पीछे ढोग रचाते

धूप दीप और नैवेद चढ़ाते

हवन के नाम अन्न जलाते

पत्थर पर हैं दूध पिलाते

भूखे बालक दूध न पाते

शिल्पी इनको जरा न भाते

उसे मूर्ति को छूने नहीं देते

मूर्ति को भगवान बताते  

मंत्रो का उच्चारण करते

सुबह शाम आरती करते

शंख मजीरा ढ़ोल बजाते

सदा सुख की आशा करते  

नारायण की कथा…

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Added by Ram Ashery on March 11, 2016 at 9:00am — 5 Comments

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