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Ram Ashery
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  • सतविन्द्र कुमार
  • Er. Ganesh Jee "Bagi"
 

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KALPANA BHATT commented on Ram Ashery's blog post (माँ रमा बाई
"माँ को नमन | "
Jun 3
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Ram Ashery's blog post (माँ रमा बाई
"माँ के लिये ह्रदय से निकले हर शब्द फूल हैं . भाव और शिल्प की चर्चा इस रचना में उचित नहीं प्रतीत होती  ."
Jun 1
Ram Ashery commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )
"अति सुंदर अभिव्यक्ति है आपको हृदय से बधाई स्वीकार हो "
May 28
Ram Ashery posted a blog post

(माँ रमा बाई

(माँ रमा बाई को यह कविता समर्पित )माँ रमा बाई जी को कोटि कोटि वंदनआओ हम सब करें फूलों से अभिनंदनवक्त की पुकार समर्पित कर दो तन मनज्ञान की ज्योति से प्रकाशित करो वतनअब समाज में समता लाकर रहेगें हमनफरत सभी के दिलों से निकाल देगें हमउनके अधूरे काम को अब पूरा करेगें हमअज्ञान को संसार से मिटा कर रहेगें हमजीवन के हर क्षण में याद रहे यह प्रणटूटे दिलों को जोड़ एक माला बनाएँ हमखुशियाँ सभी के राह में सदा बिछाएँ हमदेश के विकास को सही अंजाम देगें हममाँ रमा बाई जी को कोटि कोटि वंदनआओ हम सब करें फूलों से…See More
May 28
Ram Ashery commented on Mohit mukt's blog post क्या कभी अरमानो को ,सीने में कुचला है आपने (कविता):-मोहित मुक्त
"सहृदय आभार आपने अपने मन की व्यथा को बहुत ही अच्छे से व्यक्त किया है आपको बहुत बहुत बधाई स्वीकार हो "
Mar 23
Ram Ashery commented on Mahendra Kumar's blog post मेरे प्यारे-प्यारे वैज्ञानिकों
" ati sunder "
Mar 22
Ram Ashery commented on Gurpreet Singh's blog post तरही ग़ज़ल (212-212-212-212)
"manneey gupreet ji ati sunder abhivykt kiya apne apko tahedil badhai "
Mar 22
Ram Ashery commented on rajesh kumari's blog post दुर्मिल सवैया ‘फाग बयार’
"फाग से सरोबोर रचना के लिए आपको बधाई स्वीकार हो "
Mar 9
Ram Ashery commented on Ram Ashery's blog post मधुमक्खी
"श्री मान भण्डारी जी आपको हृदय से आभार आपका सुझाव मैं ध्यान में रखूँगा "
Feb 24
Ram Ashery commented on Ram Ashery's blog post मधुमक्खी
"श्री मान भण्डारी जी आपको हृदय से आभार आपका सुझाव मैं ध्यान में रखूँगा "
Feb 24
Ram Ashery commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मैं भी गलती करता हूँ (तरही गजल)
"बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति है जीवन में रस घोलती आपकी यह रचना समाज में चेतना का संचार करती है आपको बहुत बहुत बधाई स्वीकार हो "
Feb 21
Ram Ashery commented on Ram Ashery's blog post शिक्षा के पंख
"आपको सहृदय आभार स्वीकार हो अपने मेरी रचना को पढ़ा और अपने अमूल्य विचार दिये मैं आपका शुक्र गुजार हूँ "
Feb 21
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला commented on Ram Ashery's blog post शिक्षा के पंख
"शिक्षा के महत्व को दर्शाती रचना के लिए बधाई "
Feb 21
Ram Ashery commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"कबीर साहब आप ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति अति सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है आप को बहुत बहुत बधाई स्वीकार हो "
Feb 19
Ram Ashery commented on Ram Ashery's blog post शिक्षा के पंख
"आपको सहृदय आभार व्यक्त करता हूँ अपने मेरे विचारों को अपना अमूल्य समय देकर पढ़ा और मेरा उत्साह वर्धन के लिए एक बार फिर से बधाई स्वीकार हो "
Feb 19
Dr Ashutosh Mishra commented on Ram Ashery's blog post शिक्षा के पंख
"आदरणीय राम आश्रय जी इस सकारात्मक सोच प्रधान रचना लिए हार्दिक बधाई सादर"
Feb 19

Profile Information

Gender
Male
City State
surat
Native Place
Allahabad
Profession
service
About me
i am working in the institution as a teacher

क्यारी देखी फूल बिन ,माली हुआ उदास ।

कह दी मन की बात सब, जा पेड़ों के पास ॥

हिन्दी को समृद्धि करन हित, मन में जागी आस ।

गाँव गली हर शहर तक ,करना अथक प्रयास ॥

कदम बढ़ाओ सड़क पर ,मन में रख कर विश्वाश ।

मिली सफलता एक दिन ,सबकी पूरी आश ॥

सूरज चमके अम्बर में , करे तिमिर का नाश ।

अज्ञानता का भय मिटे, फैले जगत प्रकाश ॥

चंदा दमकी आसमान  ,गई जगत में छाय ।

हिन्दी पहुंची जन जन में, तब बाधा मिट जाय ॥

हिन्दी हमारी ताज अब, सबको रख कर पास ।

फूटा भांडा ढोंग का ,हुआ तिमिर का नाश ॥

घनी अंधेरी राह में जब राह न दिखती होय ।

हिन्दी साथ में तब चली, राह सुगम तब होय ॥

जब हिन्दी में बात करें, तो गर्व का अनुभव होय ।

गाँव शहर परदेश में , माथा नीच न होय ॥

पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण, चहुं दिश हिन्दी आज ।

जाति धर्म के बंधन मिटे, आयी समता आज ॥  

दूध और पानी की तरह ,मिल गए सभी समाज  ॥

पर्वत सोहे न भाल बिन, नदी बहे बिन नीर ।

देश न सोहे हिन्दी बिन , जीवन रहित शरीर ॥

ध्वज फहराए विश्व में, नभ तक जाए छाय ।

ममता जागे हृदय में , हिन्दी सभी अपनाय ॥

 मौलिक एवं प्रकाशित 

 

      

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(माँ रमा बाई

(माँ रमा बाई को यह कविता समर्पित )

माँ रमा बाई जी को कोटि कोटि वंदन

आओ हम सब करें फूलों से अभिनंदन

वक्त की पुकार समर्पित कर दो तन मन

ज्ञान की ज्योति से प्रकाशित करो वतन

अब समाज में समता लाकर रहेगें हम

नफरत सभी के दिलों से निकाल देगें हम

उनके अधूरे काम को अब पूरा करेगें हम

अज्ञान को संसार से मिटा कर रहेगें हम

जीवन के हर क्षण में याद रहे यह प्रण

टूटे दिलों को जोड़ एक माला बनाएँ हम

खुशियाँ सभी के राह में सदा बिछाएँ…

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Posted on May 27, 2017 at 3:00pm — 2 Comments

शिक्षा के पंख

शिक्षा के पंख लगे जब मानव तन में

रंक बने राजा हमारे देश के शासन में

झूमता हृदय सबका खुशी से उमंग में

संभव है सब कुछ आज इस जगत में

धरती को नापे डाले मात्र एक क्षण में

सागर को कैद करले अपनी मुट्ठी में

हिमालय जीत का स्वप्न रखे मन में

अपने यश की पताका गाड़दे अंबर में

भ्रम सारे टूट जाएँ जो फैले समाज में

नफरत मिट जाएँ आपसी व्यवहार में

विकास की नदी बहा दे अपने देश में

समता की फसल खूब लहरे समाज में

आज ममता, भाईचारा दिखे समाज…

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Posted on February 17, 2017 at 2:30pm — 6 Comments

आज के पुजारी बन बैठे भगवान ।

दुनिया में है अपना देश महान

आज के पुजारी बन बैठे भगवान ।

करुणा, दया,और धर्म से वंचित

मानवता को करते ये लज्जित

प्रभु के ऊपर खुद होते सुशोभित

कहते जग में हम सबसे विद्वान  

आज के पुजारी बन बैठे भगवान ॥

शील समाधि प्रज्ञा सबसे वंचित

सभी को पता है इनकी हकीकत

अज्ञानता से चलती है सियासत

वेद ज्ञान से विमुख ये पुरोहित

देश में चहुं दिश फैला अज्ञान

आज के पुजारी बन बैठे भगवान ॥

देव दासी प्रथा खूब थी…

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Posted on February 4, 2017 at 5:30pm — 5 Comments

मधुमक्खी

फूलों को प्यार से सुनाती है प्रेम धुन

उन्हीं पर लुटाती अपना सर्वस्य जीवन

बदले में फूलों को देती है नया जीवन

निभाते हैं रिश्ता ये दोनों सारा जीवन ॥

जो फूल हमारे जीवन लाते हैं खुशियाँ

मिटा देते गम भर देते हैं सारी खुशियाँ

भौरें और तितलियाँ बजाती हैं तालियाँ

बदले में जीवन भर करते हैं रंगरेलियाँ ॥

हम इंसानों को नहीं है जरा भी शरम

हम इन फूलों के प्रति कितने बेरहम

फूल तो क्या !कलियों पर नहीं रहम

कहीं भगवान के नाम पर करते…

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Posted on January 20, 2017 at 9:00pm — 6 Comments

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At 10:27pm on January 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रामाश्रय जी, महोत्सव में आप अपनी रचना मुख्य पृष्ठ पर महोत्सव बैनर को क्लीक कर पोस्ट कर सकते हैं . 

 
 
 

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