For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,163)

दोहा दसक- गाँठ





ढीली मन की गाँठ को, कुछ तो रखना सीख।

जब  चाहो  तब  प्यार से, खोल सके तारीख।१।

*

मन की गाँठे मत कसो, देकर बेढब जोर

इससे  केवल  टूटती, अपनेपन  की डोर।२।

*

दुर्जन केवल बाँधते, लिखके सबका नाम

लेकिन गाँठें खोलना, रहा संत का काम।३।

*

छोटी-छोटी बात जब, बनकर उभरे गाँठ

सज्जन को वह पीर दे, दुर्जन को दे ठाँठ।४।

*

रिश्तो को कुछ धूप दो, मन की गाँठे खोल

उनको मत मजबूत कर, कड़वी बातें बोल।५।

*

बातें कहकर खोल दे, बाँध न रहकर मौन

मन की…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 25, 2025 at 11:31pm — 4 Comments

दोहा सप्तक

दोहा सप्तक

----------------

चिड़िया सोने से मढ़ी, कहता सकल जहान।

होड़ मची थी लूट लो, फिर भी रहा महान।1। 

कृष्ण पक्ष की दशम तिथि, फाल्गुन पावन मास।

दयानंद अवतार से, अंधकार का नास।2। 

टंकारा गुजरात में, जन्में शंकर मूल।

दयानंद बन बांटते, आर्य समाज उसूल।3।

जोत जगाकर वेद की, दिया विश्व को ज्ञान।

त्याग योग संस्कार ही, भारत की पहचान।4। 

कहा वेद की भाष में, श्रेष्ठ गुणों को धार।

लक्ष्य…

Continue

Added by सुरेश कुमार 'कल्याण' on February 23, 2025 at 3:30pm — 3 Comments

दोहा पंचक. . . . .नवयुग

दोहा पंचक. . . . नवयुग

प्रीति दुर्ग में वासना, फैलाती दुर्गन्ध ।

चूनर उतरी लाज की, बंध हुए निर्बंध ।।

पानी सूखा आँख का, न्यून हुए परिधान ।

बेशर्मी हावी हुई, भूले देना मान ।।

सार्वजनिक अश्लीलता, फैली पैर पसार ।

पश्चिम की यह सभ्यता, लील रही संस्कार ।।

पश्चिम के परिधान का, फैला ऐसा रोग ।

नवयुग  ने बस प्यार को, समझा केवल भोग ।।

अवनत जीवन के हुए, पावन सब प्रतिमान ।

भोग पिपासा आज के, नवयुग की पहचान ।।

सुशील सरना /…

Continue

Added by Sushil Sarna on February 21, 2025 at 8:29pm — No Comments

दोहा सप्तक. . . . . . अभिसार

दोहा सप्तक. . . . . .  अभिसार

पलक झपकते हो गया, निष्ठुर मौन प्रभात ।

करनी थी उनसे अभी, पागल दिल की बात ।।

विभावरी ढलने लगी, बढ़े मिलन के ज्वार ।

मौन चाँद तकने लगा, लाज भरे अभिसार ।।

लगा लीलने मौन को, दो साँसों का शोर ।

रही तिमिर में रेंगती, हौले-हौले भोर ।।

अद्भुत होता प्यार का, अनबोला संवाद ।

अभिसारों में करवटें, लेता फिर  उन्माद ।।

प्रतिबंधों की तोड़ता, साँकल मौन प्रभात ।

रुखसारों पर लाज की, रह जाती सौगात ।।

कुसुमित मन…

Continue

Added by Sushil Sarna on February 17, 2025 at 3:58pm — No Comments

दोहा दशम. . . . उल्फत

दोहा दशम - ..... उल्फत

अश्कों से जब धो लिए, हमने दिल के दाग ।

तारीकी में जल  उठे, बुझते हुए चिराग ।।

ख्वाब अधूरे कह गए, उल्फत के सब राज ।

अनसुनी वो कर गए, इस दिल की आवाज ।।

आँसू, आहें, हिचकियाँ, उल्फत के  ईनाम ।

नींदों से ली दुश्मनी, और हुए बदनाम ।।

माना उनकी बात का, दिल को नहीं यकीन ।

आयें अगर न ख्वाब है, उल्फत की तौहीन ।।

यादों से हों यारियाँ , तनहाई से प्यार ।

उल्फत का अंजाम बस , इतना सा है यार ।।

मिला इश्क को हुस्न से,…

Continue

Added by Sushil Sarna on February 10, 2025 at 1:04pm — 3 Comments

दोहा दसक- झूठ



अगर झूठ को बोलिए, ठोक पीट सौ बार

सच से बढ़कर मानता, उसको भी संसार।१।

*

रहा झूठ से  कौन  है, वंचित कहो अबोध

भले न बोला हो गया, होकर कभी सबोध।२।

*

होता मुख पर झूठ के, नहीं तनिक भी नूर

जीवन पाता  अल्प  ही, पर  जीता भरपूर।३।

*

जीवन में बोला नहीं, कभी एक भी झूठ

हरा पेड़ तो  छोड़िए, मिला न कोई ठूँठ।४।

*

होता सच में जो नहीं, वही झूठ का काम

भले न बोला पर लिखा, धर्मराज के नाम।५।

*

भोला  देता  ताव  है,  करके  ऊँची  मूँछ

धूर्त…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 8, 2025 at 7:45am — 4 Comments

दोहा दसक -वाणी

दोहा दसक -वाणी

**************

वाणी का विष लोक में, करे बहुत उत्पात

वाणी पर संयम रखो, सच कहते थे तात।१।

*

वाणी  में  संयम  नहीं, अब  तो संत कुसंत

जग में कैसे हो भला, फिर विवाद का अंत।२।

*

वाणी का रहता हरा, भरता तन का घाव

वाणी ही पुल मेल का, वाणी नदी दुराव।३।

*

वाणी जो कटुता भरी, विष के तीर समान

वो तो करती नित्य  ही, रिश्तों पर संधान।४।

*

सुन्दर वाणी रख सदा, भले न सुन्दर देह

देह न मन में नित बसे, वाणी करती…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 6, 2025 at 10:25pm — 2 Comments

दोहा दसक - सपने

यूँ तो जीवन हर समय, मृगतृष्णा के पास

सच हो जाते स्वप्न पर, करके सत्य प्रयास।१।

*

देख दिवस में सप्न जो, करता खूब प्रयत्न

वह उनको  साकार  कर, पा  लेता है रत्न।२।

*

जिसने जीवन में किया, सपने को कर्तव्य

टूटा करता  वह  नहीं, बन  जाता है भव्य।३।

*

स्वप्न बने उद्देश्य  जब, करना  पड़ता कर्म

जीवन में सबसे प्रथम, समझ इसे ही धर्म।४।

*

निज जीवन के स्वप्न जो, पर हित में दे त्याग

मान उसे  सबसे  अधिक, सपनों से अनुराग।५।

*

सपने …

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 6, 2025 at 8:35am — 2 Comments

दोहा पंचक. . . शृंगार

रैन स्वप्न की उर्वशी, मौन प्रणय की प्यास ।

नैन ढूँढते नैन में, तृषित हृदय मधुमास ।।

 

वातायन की ओट से, हुए नैन संवाद ।

अरुणिम नजरों में हुए, लक्षित फिर उन्माद ।

 

मृग शावक सी चाल है,  अरुणोदय से गाल ।

सर्वोत्तम यह सृष्टि की, रचना बड़ी कमाल ।।

 

गौर वर्ण झीने वसन, मादकता भरपूर ।

जैसे हो यह सृष्टि का, अलबेला दस्तूर ।।

 

जब-जब दमके दामिनी, उठे मिलन की प्यास।

अन्तस में व्याकुल रहा, बांहों का मधुमास…

Continue

Added by Sushil Sarna on February 4, 2025 at 9:30pm — No Comments

दोहा चतुर्दशी (महाकुंभ)

दोहा चतुर्दशी (महाकुंभ)

-----------------------------

देवलोक भी जोहता,

चकवे की ज्यों बाट।

संत सनातन संग कब,

सजता संगम घाट।1।

तीर्थराज के घाट पर,

आ पहुँचे वो संत।…

Continue

Added by सुरेश कुमार 'कल्याण' on February 4, 2025 at 11:00am — 1 Comment

कहीं खो गयी है उड़ानों की जिद में-गजल

१२२/१२२/१२२/१२२

****

कभी तो स्वयं में उतर ढूँढ लेना

जहाँ ईश रहते वो घर ढूँढ लेना।१।

*

हमेशा दवा ही नहीं काम आती

कहीं तो दुआ का असर ढूँढ लेना।२।

*

कहीं खो गयी है उड़ानों की जिद में

कि बच्चो बड़ों की उमर ढूँढ लेना।३।

*

तलाशे बहुत वट सदा काटने को

कभी छाँव को भी शज़र ढूँढ लेना।४।

*

हमेशा लड़ा ले सिकंदर की चाहत

कभी बनके पोरस समर ढूँढ लेना।५।

*

मिलेगा नहीं कुछ ये नीदें चुराकर

हमें फर्क किससे क़सर…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 3, 2025 at 12:02pm — 4 Comments

कुंडलिया. . .

कुंडलिया. . .

मन से मन का हो गया, मन ही मन अभिसार ।
मन में  मन  के प्रेम  का, सृजित  हुआ संसार ।
सृजित हुआ संसार , हाथ  की  चूड़ी  खनकी ।
मुखर हुआ शृंगार , बात फिर निकली मन की ।
बंध  हुए  निर्बंध ,भाव   सब   निकले  तन  से ।
मन  ने  दी  सौगात , प्रीति  को  सच्चे  मन से ।

सुशील सरना / 2-2-25

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on February 2, 2025 at 5:05pm — No Comments

दोहा पंचक. . . . संबंध

दोहा पंचक. . . . संबंध

अर्थ लोभ की रार में, मिटा खून का प्यार ।

रिश्ते सब  आहत  हुए, शेष  रही तकरार ।।

वाणी  कर्कश  हो  गई, मिटी नैन से लाज ।

संबंधों में स्वार्थ की, मुखर हुई आवाज ।।

प्यार मिटा पैदा हुई, रिश्तों में तकरार ।

फीके - फीके  हो गए, जीवन  के  त्योहार ।।

दिखने को ऐसा लगे, जैसे सब हों साथ ।

वक्त पड़े तो छोड़ता, खून, खून का हाथ ।।

आपस में ऐसे मिलें, जैसे हों मजबूर ।

निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर ।।…

Continue

Added by Sushil Sarna on February 1, 2025 at 2:24pm — No Comments

दोहा अष्टक (प्रकृति)

*दोहा अष्टक* 

------------------

पहन पीत पट फूलते,

सरसों यौवन बंध।

चिकनाहट सी गात में,

श्वास तेल की गंध।1।

उड़ते हुए पराग कण,

मधुकर कर गुंजार।…

Continue

Added by सुरेश कुमार 'कल्याण' on January 29, 2025 at 5:00pm — 3 Comments

शंका-दोहा अष्टक-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

शंका-दोहा अष्टक

***

शंका दुख को जन्म दे, शंका मतकर व्यर्थ।

घर-बाहर इससे सदा, होता सकल अनर्थ।१।

*

आसपास जब-जब बढ़े, शंकाओं के शूल।

असमय जाते सूख तब, सुख के सारे फूल।२।

*

शंका नामक रोग  से, तन-मन जल भंगार।

औषध पाया खोज कब, इस का ये संसार।३।

*

लघुतम रहे विवाद को, शंका नित दे तूल।

संतों को असहज रहे, दुर्जन को अनुकूल।४।

*

शंका उस मन जन्म ले, जिसमें रहता खोट।

सदा  रक्तरंजित   रहे,  इससे  पाकर  चोट।५।

*

शंका बैरी चैन…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 25, 2025 at 7:40am — No Comments

गणतंत्र ( दोहा सप्तक ) -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'



जन्म दिवस गणतंत्र का, मना रहे हम आज

रखने  को  सौगंध  खा, संविधान  की लाज।।

*

नाम रखा गणतंत्र गह, राजतंत्र की रीत

कैसे हो गण का भला, ऐसे में कह मीत।।

*

संविधान  की  पीठ  ने, रचे  बहुत  से स्वप्न

गण तक पहुँचे वो नहीं, तंत्र कर गया दफ्न।।

*

पथ में बिखरे शूल सब, यदि ले तंत्र समेट

जनसेवक से हो  नहीं, जनता का आखेट।

*

आठ दशक से जप रहे, गण हैं जिसका मंत्र

देता रोक  स्वराज  वह, क्यों पगपग पर तंत्र।।

*

गण की गण…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 25, 2025 at 7:30am — No Comments

छः दोहे (प्रकृति)

छः दोहे (प्रकृति)

----------

अलंकार सम रूख धर,

रंग बिरंगा रूप।

पुष्प पात फल वृन्त रस,

बाँट रहे ज्यों भूप।1।

धरा गगन के मध्य में,

मेघों का संचार।

शांत करें तन ताप मन,

ज्यों शीतल उद्गार।2।

हर्षाए से मेघ भी,

जल भर लाए थाल।

नव अंकुर मुँह खोलते,

ज्यों तरिणी…

Continue

Added by सुरेश कुमार 'कल्याण' on January 24, 2025 at 5:30pm — 1 Comment

दोहा सप्तक. . . धर्म

दोहा सप्तक. . . धर्म

धर्म बताता जीव को, पाप- पुण्य का भेद ।

कैसे जीना चाहिए, हमें सिखाते वेद ।। 

 

दया धर्म का मूल है, यही सत्य अभिलेख  ।

करे अनुसरण जीव जो, बदले जीवन रेख ।।

 

सदकर्मों से है भरा, हर मजहब का ज्ञान।

चलता जो इस राह पर, वो पाता पहचान ।।

 

पंथ हमें संसार में, सिखलाते यह  मर्म ।

जीवन में इन्सानियत, सबसे  उत्तम कर्म ।।

 

चलते जो संसार में, सदा धर्म की राह ।

नहीं निकलती कष्ट में, उनके मुख…

Continue

Added by Sushil Sarna on January 18, 2025 at 1:00pm — 2 Comments

दोहे (प्रकृति)

  *दोहे (प्रकृति)*

 

कुदरत पूजूँ प्रथम पद,

पग - पग पर उपकार।

अस्थि चर्म की देह मम,

 पंच तत्त्व का सार।1।

 

दसों दिशाएं मन बसीं,

 करते कवि अरदास।

धरा अग्नि रवि वायु…

Continue

Added by सुरेश कुमार 'कल्याण' on January 18, 2025 at 12:30pm — 1 Comment

दोहा सप्तक. . . जीत - हार

दोहा सप्तक. . . जीत -हार

 

माना जीवन को नहीं, अच्छी लगती हार ।

संग जीत के हार से, जीवन का शृंगार ।। 

 

हार सदा ही जीत का, करती मार्ग प्रशस्त ।

डरा हार से जो हुआ, उसका सूरज अस्त ।।

 

जीत हार के राग  में, उलझा जीवन गीत ।

दूर -दूर तक जिंदगी, ढूँढे सच्चा मीत ।।

 

कभी हार है जिंदगी, कभी जिंदगी जीत ।

जीवन भर होता ध्वनित, इसमें गूँथा गीत ।।

 

मतलब होता हार का, फिर से एक प्रयास ।

हर कोशिश में जीत की,…

Continue

Added by Sushil Sarna on January 16, 2025 at 3:00pm — 2 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अच्छी ग़ज़ल हुई है ऋचा जी। मक्ता ख़ास तौर पर पसंद आया। बहुत दाद    दूसरा शेर भी बहुत…"
6 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"प्रिय लक्ष्मण भाई, अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई।  //पाप करने पे आ गया जब मैंरब की मौजूदगी को भूल…"
13 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय जयहिंद जी, नमस्कार, अच्छे अशआर हुए हैं। कहीं कहीं कुछ-कुछ परिवर्तन की ज़रूरत लग रही है।…"
17 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"जिसको पाकर सभी को भूल गया  भूल से मैं उसी को भूल गया     राही जिद्द-ओ-जहद में…"
24 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"2122, 1212, 112/22 आदमी सादगी को भूल गयाक्या गलत क्या सही को भूल गया गीत गाये सभी तरह के पर मुल्क…"
28 minutes ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"नमन मंच  सादर अभिवादन "
1 hour ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"2122 1212 112 बाप ख़ुद की ख़ुशी को भूल गया आज बेटा उसी को भूल गया १ ज़ीस्त की उलझनों में यूँ…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। गिरह सहित सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"2122, 1212, 112**बिसलरी पा  नदी को भूल गयाहर अधर तिस्नगी को भूल गया।१।*पथ की हर रौशनी को भूल…"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"सादर अभिवादन।"
9 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला वो किसी को भूल गय इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा रात को इक और फिर रात…"
13 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"सादर अभिवादन "
14 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service