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ग़ज़ल नूर की - गुनाह कर के भी उतरा नहीं ख़ुमार मेरा

1212 1122 1212 112/22

 .

गुनाह कर के भी उतरा नहीं ख़ुमार मेरा
नशा उतार ख़ुदाया नशा उतार मेरा.
.
बना हुआ हूँ मैं जैसा मैं वैसा हूँ ही नहीं   
मुझे मुझी सा बना दे गुरूर मार मेरा.
.
ये हिचकियाँ जो मुझे बार बार लगती हैं
पुकारता है कोई नाम बार बार मेरा.  
.
मेरी हयात का रस्ता कटा है उजलत में
मुझे भरम था फ़लक को है इंतज़ार मेरा.
.
पड़े जो बेंत मुझे उस की, दौड़ पड़ता हूँ
मैं जैसे हूँ कोई घोड़ा ये मन सवार मेरा.
.
मैं उस से बच नहीं पाता हूँ गो ख़बर है मुझे   
करे है मेरी अना रात दिन शिकार मेरा.
.
हर एक साँस बदलती है ज़र को पीतल में
न जाने हश्र में क्या दाम दे सुनार मेरा.
.
किसी नज़र से उतरते ही मर गया था मैं
जिसे समझते हो तुम जिस्म है मज़ार मेरा.
.
निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित 

Views: 308

Comment

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Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 15, 2025 at 5:07pm

शुक्रिया आ. रवि सर 

Comment by Ravi Shukla on May 15, 2025 at 4:27pm

वाह वाह आदरणीय नीलेश जी पहली ही गेंद सीमारेखा के पार करने पर बल्लेबाज को शाबाशी मिलती है मतले से हमारी मुराद वही है । बहुत खूब । आखिरी शेर भी बहुत बढ़िया कहा  इस ग़ज़ल के लिये आपको बहुत बहुत बधाई 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 5, 2025 at 12:50pm

धन्यवाद आ. बृजेश जी 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on May 5, 2025 at 12:12pm

अद्भुत है आदरणीय नीलेश जी....और मतला ही मैंने कई बार पढ़ा। हरेक शेर बेमिसाल। आपका धन्यवाद इतनी खूबसूरत ग़ज़ल के लिए...

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 1, 2025 at 11:50am

धन्यवाद आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 1, 2025 at 11:50am

धन्यवाद आ. सौरभ सर,

आप हमेशा वहीँ ऊँगली रखते हैं जहाँ मैं आपसे अपेक्षा करता हूँ.
ग़ज़ल तक आने, पढने और हौसला-अफज़ाई का धन्यवाद 
आभार 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on May 1, 2025 at 12:26am

आदरणीय निलेश शेवगाँवकर जी आदाब, नए अंदाज़ की ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 30, 2025 at 6:25pm

आदरणीय नीलेश जी, हार्दिक बधाई. 

प्रस्तुत अश’आर के लिए तहेदिल से बधाई. 

मैं उस से बच नहीं पाता हूँ गो ख़बर है मुझे   
करे है मेरी अना रात दिन शिकार मेरा. 


और,
हर एक साँस बदलती है ज़र को पीतल में
न जाने हश्र में क्या दाम दे सुनार मेरा.

जय-जय 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 30, 2025 at 4:45pm

धन्यवाद आ. लक्ष्मण धामी जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 30, 2025 at 4:44pm

धन्यवाद आ. गिरिराज जी 

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