For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts


सदस्य कार्यकारिणी
बह गये तूफान में वो जा किनारे से लगे- ग़ज़ल

2122/ 2122/ 2122/ 212

बह गये तूफान में वो जा किनारे से लगे

लड़ने वाले ही मगर सब बेसहारे से लगे

 

हार के बाहर हुये वो चैन की अब साँस लें

जीतने की जो कहें मुझको वो हारे से लगे

 

बारहा मेरे करीब आकर ठहर जाते हैं यूँ

ये हवादिस मेरी किस्मत के इशारे से लगे

 

लुट गया सामां सफर में हर मुसाफिर का यहाँ

लोग भी बेआस बेबस गम के मारे से लगे

 

कागज़ों पर है नुमायाँ हाले दिल मेरा “शकूर”

राख से कुछ हर्फ़ कुछ…

Continue

Added by शिज्जु "शकूर" on April 12, 2015 at 10:16pm — 30 Comments

अभी तुम्हारे दिल में भीड बहुत है

अभी तुम्हारे दिल में 

भीड बहुत है

काफी शोर-शराबा है

नशा -ए -दौलत का  

अदा-ए-हुस्न का 

जोश-ए-जवानी का

आना जाना भी बहुत है

दिल फेंक प्रेमियों का

अभी तुम भी परेशान हो 

सोच-सोचकर 

किसको दिल में रखूँ 

किसे नहीं 

..

मगर 

जब ये भीड छट जाये

दिल हो जाये 

खाली खाली

उस वक्त मुझे कहना 

अपने दिल में रहने को 

मैं रहुंगा तुम्हारे दिल में

क्योंकि

मुझे अकेलापन 

बहुत पसन्द है



उमेश कटारा…

Continue

Added by umesh katara on April 12, 2015 at 2:30pm — 14 Comments

ग़ज़ल : इक दिन बिकने लग जाएँगे बादल-वादल सब

इक दिन बिकने लग जाएँगे बादल-वादल सब

दरिया-वरिया, पर्वत-सर्वत, जंगल-वंगल सब

 

पूँजी के नौकर भर हैं ये होटल-वोटल सब

फ़ैशन-वैशन, फ़िल्में-विल्में, चैनल-वैनल सब

 

महलों की चमचागीरी में जुटे रहें हरदम

डीयम-वीयम, यसपी-वसपी, जनरल-वनरल सब

 

समय हमारा खाकर मोटे होते जाएँगे

ब्लॉगर-व्लॉगर, याहू-वाहू, गूगल-वूगल सब

 

कंकरीट का राक्षस धीरे धीरे खाएगा

बंजर-वंजर, पोखर-वोखर, दलदल-वलदल सब

 

जो न बिकेंगे…

Continue

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 12, 2015 at 1:19pm — 18 Comments

बात उतनी कहां पुरानी थी

2122 1212 22

बात उतनी कहां पुरानी थी
मिलते हीं याद तब की आनी थी.

फ़र्क़ इतना दिखा मुझे यारों
अाज पीरी है तब जवानी थी.

वो दिखा हीं न ज़िन्दगी जीते
ज़िन्दगी उसकी बस ज़ुबानी थी.

बेवफ़ा हो के रात भर रोया
बेबसी उसकी क्या कहानी थी.

आज दरिया-ए-चश्म में उसके
थोङे पानी में क्या रवानी थी.

मौलिक व अप्रकाशित

Added by shree suneel on April 12, 2015 at 11:27am — 18 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
जिये जा जिये जा (एक बहुत छोटी बह्र पर ग़ज़ल 'राज')

१२२ १२२

भलाई किये जा

बुराई लिये  जा

 

उन्हें बाँट अमृत

जहर खुद पिये जा

 

तेरे पास जो है

दिये जा दिये जा

 

उन्हें तू उठा दे 

मगर खुद निये जा  

 

जवानी लुटा दे

बुढ़ापा सिये जा

 

जमाना ख़रा है

भरोसा किये जा

 

यही जिन्दगी है

जिये जा जिये जा

-------(मौलिक एवं अप्रकाशित )

Added by rajesh kumari on April 12, 2015 at 11:09am — 26 Comments

तराना इक सुना देना

जनाजा जब उठे मेरा जरा तुम मुस्‍कुरा देना

दिये थे फूल जो तुमको जनाजे पे चढ़ा देना

गिराओ अश्‍क मत अपने बचा कर तुम इन्हें रख लो

चलो जब लाल जोड़े में इन्‍हें तब तुम बहा देना

वफा मेरीअगर तुमको कभी झूठी लगी हो तो

न आये चैन मर कर भी मुझे वो बद्दुआ देना

गलत खुद को समझना मत वफा मैं ही न कर पाया

न मुझ सा बेवफा कोई जमाने को बता देना

समझ लो प्यार में तुम से यही चाहत बची मेरी

कभी तुम…

Continue

Added by Akhand Gahmari on April 12, 2015 at 11:00am — 13 Comments

ग़ज़ल :- जैसे.मिरे अंदर से ख़ुदा बोल रहा है

बह्र :- मफ़ऊल मफ़ाईल मफ़ाईल फ़ऊलुन





सच बोल रहा हूँ तो ये महसूस हुवा है

जैसे मिरे अंदर से ख़ुदा बोल रहा है



समतों क तअय्युन है न मंज़िल का पता है

इंसान मशीनों की तरह भाग रहा है



ठहरे हुए पानी पे कोई नाव रुकी है

इक गीत फ़ज़ाओं में अभी गूंज रहा है



इस हद पे हैं तहज़ीब की मिटती हुई क़दरें

रिश्तों को ज़मीनों की तरह बाँट दिया है



जिस दिन से दरिन्दों की सिफ़त आई है इसमें

इंसान ख़ुद अपना ही लहू चाट रहा है



फैले हुए हाथों पे… Continue

Added by Samar kabeer on April 12, 2015 at 10:52am — 16 Comments

गजल

गजल/गीतिका (12/04/2015)
अश्क इधर अपने रुख़्सार आया है,
तब उधर प्यार पर एतबार आया है।
तू सिसकता रहा,लमहे गये कितने,
एक कहाँ,दफा हजार बार आया है।
आह भरती चुप उसने मिलायी नजर
ऐसी ही उसकी अदा प्यार आया है।
तू दफा कई था आशियाँ उसके गया,
उसे लगा कोई कसूरवार आया है।
भूल सब रंजोगम,बस जगायेआरजू,
उसके दर आज गुनहगार आया है।
'मौलिक व अप्रकाशित'@मनन

Added by Manan Kumar singh on April 12, 2015 at 10:46am — 6 Comments

जरूरतें....(लघुकथा)

कल उपार्जन केंद्र पर रामदीन को अपने नमीरहित शुष्क चमकदार गेहूं को बेचने जाना है. अचानक बे-मौसम घिर आये बादलों को देख, रामदीन अपने आँगन में पड़े अनाज को अपनी पत्नी और छोटे-छोटे बच्चों की मदद से घर में भरने को जुट गया..

उधर उपार्जन केंद्र पर किसानों से ही खरीदा हजारों क्विंटल गेहूं खुले में पड़ा हुआ है. जिला प्रशासनिक अधिकारी ने चिंता जताते हुए समिति अध्यक्ष को फोन पर जानकारी लेते हुए पूछा..

“ उपज पर बारिश न हो, इसकी कैसी क्या व्यवस्था है..? अगर बारिश होती है तो अधिक से…

Continue

Added by जितेन्द्र पस्टारिया on April 12, 2015 at 10:38am — 16 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
ग़ज़ल -- अंततः विदा पाई (मिथिलेश वामनकर)

212---1222---212---1222

 

झूठ भी नहीं कहते, सत्य भी नहीं कहते

दो नयन तुम्हारे पर, मौन भी नहीं रहते

 

प्रीत का कहो कैसे, आप सुख उठाएंगे…

Continue

Added by मिथिलेश वामनकर on April 12, 2015 at 10:30am — 14 Comments

चंद शेर - प्यार पर -- डॉo विजय शंकर

चलो ये अच्छा हुआ कि प्यार अंधा होता है

वर्ना किस किस से उसे दो चार होना पड़ता ||



पंखुड़ी गुलाब मासूमियत जिसके नाम है

झूठ फरेब धोखा सब उसे देखना पड़ता ||



जिसकी मरने जीने की लोग कसमें खाते हैं

उस प्यार को कभी खुद शहादत में आना पड़ता ||



प्यार जिसके फैसले पे लोग मर मिट जाते हैं

अदालती कटघरे में उसे खड़ा रहना पड़ता ||



दुनियाँ सब देख के अंधी बनी रहती है

प्यार को भी ऐसा ही गुनाह करना पड़ता ||



मौलिक एवं अप्रकाशित

डॉo… Continue

Added by Dr. Vijai Shanker on April 12, 2015 at 10:11am — 10 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
गीत / नवगीत - क्या ये मेरा वही गाँव है --- गिरिराज भंडारी

क्या ये मेरा वही गाँव है

***********************

क्या ये मेरा वही गाँव है

सूरज अलसाया निकला है

मुर्गा बांग नहीं देता है 

नहीं यहाँ चिड़ियों की चीं चीं

ना कौवे की काँव काँव है

 

क्या ये मेरा वही गाँव है

 

दो पहरी सोई सोई है

दिवा स्वप्न में कुछ खोई है

यहाँ धूल में सनी…

Continue

Added by गिरिराज भंडारी on April 12, 2015 at 9:32am — 22 Comments

नवगीत

नवगीत
मन थोड़ा भटका हुआ है!
सपने टूटे,दिल भी टूटा,
रातें रूठीं,दिन भी रूठा,
उम्मीदों का चाँद झाड़ पर
देखो ना अटका हुआ है!
मन थोड़ा भटका हुआ है!
नयन-गगन में नजर गड़ी,
कैसी फिजा पल्ले पड़ी,
सूख चले अब जलद-नयन,
मानस में खटका हुआ है!
मन थोड़ा भटका हुआ है!!
उठती-सी लहरें उमंगित,
उर-अर्णव कितना तरंगित,
पूरी पूनम थी कल की रात,
प्रात हुआ, झटका हुआ है!
मन थोड़ा भटका हुआ है!!!
@मनन

Added by Manan Kumar singh on April 11, 2015 at 10:30pm — 4 Comments

शोहरत

पल में शोहरत गर पानी है,बात अनर्गल बोलो तुम !

ताजमहल से शिव-मंदिर के कारिडोर को खोलो तुम !!

धर्म का सारा सोया सिस्टम,यूँ पल में जग जाएगा !

हर पेपर-हर चैनल में तेरा बयान ही आयेगा !!

खुली-बहस होगी तब सब जन अपना पक्ष सुनायेंगें !

कोई यमन औ जयवंती कुछ राग भैरवी गाएंगें !!

संसद की चौपाल पे फिर तेरा बयान छा जाएगा !

खो जायेंगें मुद्दे सारे - ताजमहल लहराएगा !!

मुद्दे की गर बात कही तो, खुद को हाशिये पर पाओगे !

दो कौड़ी की…

Continue

Added by rajkumarahuja on April 11, 2015 at 4:00pm — 4 Comments

हुस्न का जादू जहाँ चल जायेगा

२१२२   २१२२   २१२

 हुस्न का जादू जहाँ चल जायेगा  

रिन्दों का दिल भी बहाँ जल जायेगा 

जुल्फों को अपनी बिखेरेंगे वो जब 

उस घड़ी ये तय है दिन ढल जायेगा 

आ गए वो मौत से पहले मेरी 

वक़्त मेरी मौत का टल जायेगा 

हुस्न की मुझ पे इनायत हो गयी 

ये रकीबों को मेरे खल जायेगा 

उनसे मिलते वक़्त ये सोचा नहीं 

दिल में पौदा प्यार का पल जायेगा 

मौलिक व अप्रकाशित 

Added by Dr Ashutosh Mishra on April 11, 2015 at 10:30am — 3 Comments

आचरण

अर्चक, 

अर्चना करता है !

अर्धांगिनी से,

अराग होकर !

अल्लाह,

दे दे अवकाश मुझे,

इस अवदशा से !

अवर्ण्य हैं,

इनके…

Continue

Added by rajkumarahuja on April 10, 2015 at 6:30pm — 7 Comments

जीवन का आधार प्रीत है ....

जीवन   का   आधार  प्रीत  है ...........

जीवन   का   आधार  प्रीत  है

स्वप्न   का   श्रृंगार   प्रीत  है

जलते   रहना   दीप  लौ   पर

शलभ  की  निस्वार्थ  प्रीत  है

विरह   में   बरसात  की   बूंदें

सावन  का   रूठा   संगीत   है

लहरों  पे  वो  छवि  मयंक की

नयन  बिम्ब  की तरल प्रीत है

मधुर  पलों  का  मौन समर्पण

अधरों  पर  अधरों  की जीत है

भुजबंधन  का  तरुण स्पन्दन

आसक्त पलों की  मधुर प्रीत है

आवारापन वो तिमिर-केश का

मधुप…

Continue

Added by Sushil Sarna on April 10, 2015 at 1:51pm — 8 Comments

मेरी पलकें नम हुईं ज्यों आपको क्या हो गया

२१२२  २१२२  २१२२  २१२ 

 

मेरी पलकें नम हुईं ज्यों आपको क्या हो गया 

मेरा तो हर ख्वाब टूटा क्या तुम्हारा खो गया 

 

शख्स  जो कहता था मुझसे राह अब उसकी जुदा है 

देख कर मुझको नशे में, बालकों सा रो…

Continue

Added by Dr Ashutosh Mishra on April 10, 2015 at 11:00am — 9 Comments

बदचलन

"ए रांड....." - परीक्षा देकर निकलते ही ऊँची आवाज में सीसा घोलती गाली वर्षा के कानों में पड़ी.. मुड़कर देखा तो संतोष सिगरेट के छल्ले उड़ाते हुवे अपने मित्रों के साथ उसकी तरफ देख कर ठहाके लगा रहा था. वही जिसके प्यार को पिछले साल ठुकरा दिया था.. अपमान के एहसास से आँखों में आंसू आ गए .. पर वह चुपचाप वहां से चल दी.. क्या कहती ?

घर पहुँच कर देखा .. मुन्नी सो रही थी 

"वर्षा कल का पेपर कैसे देगी.. कोर्ट की तारीख आगे बढ़वा लेती" माँ रसोई से आते आते बोली 

"माँ…

Continue

Added by Nidhi Agrawal on April 10, 2015 at 9:30am — 8 Comments

मौसम नेअभी जलवे दिखलाने हज़ारों हैं

मौसम नेअभी जलवे दिखलाने हज़ारों हैं

साहिल से अभी तूफां टकराने हज़ारों हैं



इस उम्र में भी मरता है तुमपे कोई मुझसा

कहते थे कभी हमसे दीवाने हज़ारों हैं



मैंने हैं सजा रक्खे सब दिल में करीने से

जो ग़म के दिये तुमने नज़राने हज़ारों हैं



इस शहर मे भी तेरे हमदर्द तो हैं अपने

अपने तो हैं कम लेकिन बेगाने हज़ारों हैं



कितने हैं…

Continue

Added by charanjit chandwal `chandan' on April 10, 2015 at 8:30am — 1 Comment

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Monday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
Monday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service