For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,170)

प्रिय तुम ही

सूरज की रश्मियों मे ,

चमक बन के रहते हो ।

जाग्रत करते सुप्त मन प्राण ,

सुवर्ण सा दमके  तन मन । 

चन्द्रमा की शीतलता मे ,

धवल मद्धम चाँदनी से तुम,

अमलिन मुख प्रशांत हो ।

सागर से गहरे हो तुम ,

कितना कुछ समा लेते हो ।

नूतन पथ के साथी ,

जीवन तरंगो के स्वामी ।

मन हिंडोल के बीच ,

सिर्फ तुम किलोल कालिंदी । .

सुनो प्रिय तुम ही ,

तुम ही .....प्रिय तुम ही ।..... अन्नपूर्णा…

Continue

Added by annapurna bajpai on July 9, 2013 at 8:30pm — 9 Comments

टूटते रिश्तों की किरचें

 

टूटे रिश्तों की किरचियाँ ,

कभी जुड़ नहीं पातीं ,

शायद कोई जादू की छड़ी ,

जोड़ पाती ये किरचियाँ ।

.

ये चुभ कर निकाल देतीं हैं ,

दो बूंद रक्त की , और अधिक

चुभन के साथ बढ़ जाती है ,

पीड़ा न दिखाई देती हैं ।

.

चुप रह कर सह जाती हूँ ,

आँख मूँद कर देख लेती हूँ ,

शायद कोई प्यारी सी झप्पी ,

मिटा पाती ये दूरियाँ। .... अन्नपूर्णा बाजपेई

 

 

अप्रकाशित एवं मौलिक

Added by annapurna bajpai on July 9, 2013 at 8:30pm — 6 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
रोज शोलों में झुलसती तितलियाँ हम देखते हैं (ग़ज़ल "राज")

रोज शोलों में झुलसती तितलियाँ हम देखते हैं (ग़ज़ल "राज")

२ १ २ २  २ १ २ २  २ १ २ २  २ १ २ २ 

बहर ----रमल मुसम्मन सालिम

 रदीफ़ --हम देखते हैं 

काफिया-- इयाँ 

आज क्या-क्या जिंदगी के दरमियाँ हम देखते हैं 

जश्ने हशमत या मुसल्सल  पस्तियाँ हम देखते हैं 

 

खो गए हैं  ख़्वाब के वो सब जजीरे तीरगी में 

गर्दिशों  में डगमगाती कश्तियाँ हम देखते हैं 

 

ख़ुश्क हैं पत्ते यहाँ अब यास में…

Continue

Added by rajesh kumari on July 9, 2013 at 5:30pm — 40 Comments

उनको शत-शत नमन

उन शहीदों को मेरा

सलाम है सलाम

जाँ बचाते-बचाते

दे गए अपनी जान

नाज करते हैं हम

उनके जज्बात पर

देश के मान पर

तिरंगे के सम्मान पर

जाँ बचाते रहे

बेखौफ हो निडर

एक जिद थी कि

ज्यादा से ज्याद

बचाते रहें

नेक था इरादा

काम नेक था

विधाता ने लिखा पर

कुछ और लेख था

मौत जीती मगर

हो गए वो अमर

उनको शत-शत नमन

मौलिक व अप्रकाशित

 

Added by Pragya Srivastava on July 9, 2013 at 4:30pm — 7 Comments

रोया है कोई … नवगीत /वेदिका

घास का इक नर्म 

बिछौना बनाकर 

ओढ़ कर नीले  

गगन की सर्द चादर 

सोया है कोई …

ओस बिखरी है जो 

हरी हरी घास पर 

साँस भर भर आई 

हर साँस पर 

रोया है कोई …. 

कहीं पुरवाइयों में 

ओस की रुलाइयों में 

चूड़ियों सा चटका है 

टूटा, मेरी कलाईयों में 

बिखरा है कोई …

गर्म लहू जमा वह 

या ठंडी बरसात है 

कुहासे का झाग 

या तो चीख की आग

भिगोया है कोई…

Continue

Added by वेदिका on July 9, 2013 at 3:30pm — 30 Comments

ज्ञानचक्षु

कितना  ही  पास हो  मृत्यु-मुखद्वार

सीमित सोचों के दायरों में गिरफ़्तार,

बंदी रहता है प्रकृत मानव आद्यंत ...

इर्ष्या, काम, क्रोध, मोह और लोभ,

राग और द्वेष

रहते  हैं  यंत्रवत  यह  नक्षत्र-से  आस-पास,

प्रक्रिया में बन जाते हैं यह मानव-प्रकृति,

विकृतियों में व्यस्त, मिलती नहीं मुक्ति।

 

अहंमन्यता के अंधेरे कुँए में निवासित

अभिमान-ग्रस्त मानव संचित करे भंडार,

कुएँ  की  परिधि  में  वह  मेंढक-सा  सोचे

‘कितना विशाल…

Continue

Added by vijay nikore on July 9, 2013 at 12:30pm — 16 Comments

चुरा लेता है दिल सबका [गीत]

चुरा लेता है दिल सबका ,

बड़ा चित चोर है मोहन ।

कि हर जर्रे में बसता है ,

नही किस ओर है मोहन ।

निगाहोँ में भरा हो जब ,

प्रभू के प्रेम का प्याला ।

दिखायी हर जगह देगा ,

तुम्हे वो बांसुरी वाला ।

हर सच्चे दीवाने को

यही महसूस होता है ,

है छाया हर जगह उसकी

बसा हर ठौर है मोहन ।

न दौलत का वो भूखा है ,

न रिश्वत से ही बिकता है ।

हमारी आँख का तारा ,

मोहब्बत से ही बिकता है ।

ज़माना कुछ…

Continue

Added by Neeraj Nishchal on July 9, 2013 at 11:44am — 18 Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल लिखने का प्रयास



तसव्वुर जिसका देखा मैंने, हाँ तुम बिल्कुल वैसी हो॥

रात पूनम, महताब जैसी, हाँ तुम बिल्कुल वैसी हो॥



ऐसी ज़ुल्फ़ की छांव जैसे, घटा हों काली…

Continue

Added by Abhishek Kumar Jha Abhi on July 9, 2013 at 10:30am — 6 Comments

प्यार के तट पर काई बहुत है

प्यार के तट पर काई बहुत है 
इसमें आगे गहराई बहुत है  
महफ़िल में रहने वालों को 
इक पल की तनहाई बहुत है 
नकली सिक्कों के बाज़ार में 
असली इक- इक पाई बहुत है 
4
कैसे रचे मेहँदी हांथों में 
किस्मत में अंगडाई बहुत है 
5
दिल का ज़रुरत क्या पत्थर की 
इसके लिए इक राई बहुत  है 
6
" अजय "न…
Continue

Added by ajay sharma on July 9, 2013 at 12:00am — 4 Comments

स्नेह सुधा बरसाओ मेघा//नवगीत//

स्नेह सुधा बरसाओ मेघा,

व्याकुल हुआ तरसता मन।

 

रिश्तों की जो बेलें सूखीं,

कर दो फिर से हरी भरी।

मन आँगन में पड़ी दरारें,

घन बरसो, हो जाय तरी।

सिंचित हो जीवन की धरती।

ले आओ ऐसा सावन।

 

दूर दिलों से बसी बस्तियाँ,

भाव शून्यता गहराई।

सरस सुमन निष्प्राण हो गए

नागफनी ऐसी…

Continue

Added by कल्पना रामानी on July 8, 2013 at 11:00pm — 14 Comments

गज़ल

२   २  १  २     २  २  १  २       २  २  १  २

नायक या खलनायक उसे किस खाते लिखूं  

या भटकी लाली के संग उस को जाते लिखूं

 

जिस  को  खुदा  माना  कभी हम ने दोस्त

दीया कोई  उस की चोखट पर जलाते लिखूं

गा  कोई तुम नगमा सुरीला सा मेरे  दिल

तुझ  को  करीब  पाऊं  लोरी सुनाते लिखूं

वो छोड़ गया जो मुझ को इस भंवर में अब

अब तुम बता मुझको अपना किस नाते लिखूं

 

उस का करें किस बात पै हम यकीं मोहन ,

करते …

Continue

Added by मोहन बेगोवाल on July 8, 2013 at 11:00pm — 5 Comments

नवगीत/ फूटी गागर

मन भौंरे सा आकुल है

तुम चंपा का फूल हुई

मैं चकोर सा तकता हूँ

तुम चंदा सी दूर हूई

 

जब पतझड़ में मेघ दिखा

तब यह पत्ता अकुलाया

ज्यों टूटा वो डाली से

हवा उसे ले दूर उड़ी

 

तपती बंजर धरती सा

बूँद बूँद को मन तरसा

जितना चलकर आता हूँ

यह मरीचिका खूब छली

 

सपन सरीखा है छलता

भान क्षितिज का यह मेरा

पनघट पर जल भरने जो

लाई गागर, थी फूटी

              - बृजेश…

Continue

Added by बृजेश नीरज on July 8, 2013 at 10:30pm — 12 Comments

ग़ज़ल : ख़ुदा को मस्जिद में पा गया जो वो दौड़ मयखाने जा रहा है

बहर : १२१२२ १२१२२ १२१२२ १२१२२

-----------------

नहीं मिला जो जहाँ में जिसको वही उसे खींचता रहा है

ख़ुदा को मस्जिद में पा गया जो वो दौड़ मयखाने जा रहा है

 

वो जिसने माँगी थी सीट मुझसे ये कहके ईश्वर भला करेगा

जरा सा आराम पा गया तो मुझी को अब वो भगा रहा है

 

दवा से जो ठीक हो रहा था उसे पिलाया पवित्र पानी

जो दिन में अच्छा भला था कल तक वो रात भर चीखता रहा है  

 

ख़ुदा का घर सब जिसे समझते वहीं हजारों हुये लापता

बने…

Continue

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 8, 2013 at 10:07pm — 3 Comments

तन्हा- तन्हा, चुपके चुपके

 तन्हा- तन्हा, चुपके चुपके 

.

आँखों से आंसू बहते है 
धीरे- धीरे, चुपके से 
सब आंसू दुपट्टा पी लेता है 
कही कोई देख न ले ......
.
कितनी बाते हैं करने को
फिर भी लब सील के बैठी है
दर्द के साये में पलती धड़कन
चुपचाप सी चलती धड़कन
कहीं कोई सुन न ले ........
.
मांगी जब भी सूरज से…
Continue

Added by Sonam Saini on July 8, 2013 at 9:30pm — 11 Comments

किरदार

किसी भूली कहानी का, कोई किरदार दिखता है,

मेरा क़स्बा मुझे , अब सिर्फ इक बाज़ार दिखता है।



कि जैसे सर के बदले, आईनें हों सबके कन्धों पर,

मुझे हर शख्स मुझसा ही, यहाँ लाचार दिखता है।



यही इक मर्ज़ है उसका ,दवा भी बस यही उसकी,

शहर, चाहत में पैसे की, बहुत बीमार दिखता है।



बचेगी किस तरह मुझमें, किसी मंजिल की अब हसरत,

समंदर के सफ़र में, बस मुझे मंझधार दिखता है।



न कोई रब्त है, ना गम, न कुछ बाकी तमन्नाएँ,

ये शायर शय से सारी, इन दिनों…

Continue

Added by Arvind Kumar on July 8, 2013 at 4:30pm — 11 Comments

भारत की अस्मत लुटने तक क्यूँ सोते हो सत्ताधारी

भारत की अस्मत लुटने तक क्यूँ सोते हो सत्ताधारी



भाषण में झूठे वादों से

अपने नापाक इरादों से

तुम ख्वाब दिखाके उड़ने के

खुद बैठे हो सैयादों से



बस नोट, सियासी इल्ली बन, तुम बोते हो सत्ताधारी   

भारत की अस्मत लुटने तक क्यूँ सोते हो सत्ताधारी



हर ओर मुफलिसी फांके हों  

यूँ रोज ही भले धमाके हों

कागज़ पे सुरक्षा अच्छी है

इस पर भी खूब ठहाके हों



पहले तो खेल सजाते हो फिर  रोते हो सत्ताधारी

भारत की अस्मत लुटने तक…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on July 8, 2013 at 3:30pm — 7 Comments

हाइकू

                         

                                                    (1)

                                   

                                               सजन मेरे 

                                            छनके है पायल

                                               नाम से तेरे 

   

                                                    (2)

                                                छनछनाती 

             …
Continue

Added by Drshorya Malik on July 8, 2013 at 10:30am — 6 Comments

जगह जगह मधुशाला देखी

जगह जगह मधुशाला देखी , नल का पानी बंद मिला 

अंधी नगरी चौपट राजा , किससे शिकायत किससे गिला



दिया दाखिला सब बच्चों को , 

मिली पढ़ाई मात्र नाम की , 

कंप्यूटर मिल रहे खास को , 

बिजली पानी नही आम की , 

आँखो पर पट्टी है या फिर सबको दी है भंग पिला

गूंगे गाये गीत मान के

बहरे सुन सुन कर इतराएँ

अंधों भी उत्सुक हैं ऐसे

महज इशारों मे बौराएँ

बंदर सारे खेल कर रहे ""अजय" मदारी रहा खिला

मौलिक और…

Continue

Added by ajay sharma on July 7, 2013 at 11:30pm — 9 Comments

ग़ज़ल ५

 

221 2121 1221 212

बेख़ौफ़ सारी उम्र निकल जाये इस तरह

गिरने की बात हो न, संभल जाए इस तरह

 

तूफ़ान भी चले तो चरागा जला करे

दोनों ही अपनी राह बदल जाए इस तरह

 

हर सिम्त जिंदगी रहे, पुरजोश  बारहां

जो मौत का भी होश,बदल जाए इस तरह

 

फैले कहीं जो बाहें तो बच्चों सा दौड़कर

मिलने को हर इक शख्स मचल जाए इस तरह

 

आंसू किसी की आँखों का, हर आँख  से बहे 

इस शहर की फ़ज़ा भी बदल जाये इस तरह…

Continue

Added by Dr Lalit Kumar Singh on July 7, 2013 at 10:40pm — 12 Comments

तलाश

अंतर मन में

अनंत  इच्छाएँ

बिल्कुल समन्दर

की लहरों की तरह

ठीक कुछ समय बाद

समाप्त हो जाती है

ऐसा लगता है कि

कितनी अपेक्षा से

प्रकृति ने जिन भावों

को जगाया था मन में

उन भावों को सपनो में

सजोकर बंदकर

अलसाई उनीदी आखे

फिर सोजाती है

तलाश है उस नीद की

जो  संतुष्टि के बाद

खुले आसमान के नीचे

बैभव से दूर बसुधा की माटी में

माँ के आँचल की तरह सुलाती है

सहलाती…
Continue

Added by दिलीप कुमार तिवारी on July 7, 2013 at 8:00pm — 4 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
6 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service