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April 2013 Blog Posts


सदस्य टीम प्रबंधन
गुरु वंदन //छंद झूलना (प्रथम प्रयास) ...डॉ० प्राची

छंद झूलना 

(२६ मात्रा,  ७,७,७,५ पर यति , चार पद , अंत गुरु लघु )

गुरु ज्ञान दो, उत्थान दो, वंदन करो स्वीकार 

अनुभव प्रवण, उज्ज्वल वचन, हे ईश दो आधार 

तज काग तन, मन हंस बन, अनिरुद्ध ले विस्तार 

प्रभु के शरण, जीवन- मरण, पाता सहज उद्धार.....

Added by Dr.Prachi Singh on April 23, 2013 at 11:00pm — 35 Comments


मुख्य प्रबंधक
मर्द // गणेश जी "बागी"

आज फिर उसका मन व्यथित था
हाहाकार कर रहा था हृदय
एक कथित पुरुष में
हैवान साकार हुआ था फिर.. 
फिर हैवानियत जीत गई थी 
नरपिशाच के पंजों में
आ गई थी 
फिर एक नन्ही…
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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 23, 2013 at 10:00pm — 36 Comments

इंसान की फ़ितरत

इंसान की फ़ितरत

मुझे M B C (मॉरिशस ब्रॉड्कास्टिंग कॉर्पोरेशन) में स्पीकर पोस्ट के लिये एक साक्षात्कार देना था . उस दिन तेज़ बारिश हो रही थी . मैं इंटरव्यू देकर बाहर खड़ी , बारिश के रुकने की प्रतीक्षा करने लगी . पानी था कि रुकने का नाम नहीं ले रहा था . एक तो जुलाई का महीना उस पर क्यूपीप की सरदी . ठंड से मेरे दाँत बजने लगे थे . मेरे पास ढंग का स्वेटर भी नहीं था जो साथ लेती . शाम के पाँच बज गये थे और अंधेरा भी होने लगा था. मैं चिंतित होने लगी थी अगर बस छूट जाएगी तो मैं क्या करूँगी ? इसी सोच…

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Added by coontee mukerji on April 23, 2013 at 9:27pm — 4 Comments

जन जन के संताप........कुण्डलिया

सरकारें अब खेलती, यह शतरंजी खेल

ऊँट ऊँट मे मित्रता, हाँथी कसी नकेल

हाँथी कसी नकेल, बजीर हुआ अंजाना

घोडा तिरछी चाल, चले तो पाये दाना

कहते है कविराय, लडा के सबको मारेँ

प्यादों मे तकरार , कराती है सरकारें

----------

कोटा पर जो मिल रहा, चावल चीनी तेल

उसमे क्या क्या हो रहा, कैसा कैसा खेल

कैसा कैसा खेल, खेलते हैं व्यापारी

जीता कोटेदार, बिचारी जनता हारी

कहते हैं कविराय, लगाओ दस दस शोंटा

ठगने खातिर आज, उठाते हैं जो कोटा

-----

चाँदी… Continue

Added by manoj shukla on April 23, 2013 at 9:00pm — 13 Comments

लघु कथा : ब्रह्मराक्षस का कुत्ता

महानगर के सबसे शानदार इलाके की सबसे अच्छी कोठियों में से एक में ब्रह्मराक्षस रहता है। वो स्वयं को दुनिया का सबसे बड़ा विद्वान समझता है और चाहता है कि उसकी विद्वत्ता के चर्चे चारों दिशाओं में हों। समय समय पर ज्ञान के प्यासे लोग उसके पास आते रहते हैं। वो फौरन उनको अपना शिष्य बना लेता है। फिर उनके कानों में फुसफुसाकर गुरुमंत्र देता है। जैसे ही शिष्य इस गुरुमंत्र का उच्चारण करता है वो कुत्ता बन जाता है। इसके बाद ब्रह्मराक्षस अपनी तमाम पोथियाँ उसके सामने बाँचता है। तत्पश्चात ब्रह्मराक्षस उसके गले…

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Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 23, 2013 at 7:44pm — 12 Comments

बहते अश्कों ने दिल दुखाया है |

बहते अश्कों ने दिल दुखाया है |
गम की  गली में  कोई आया है |
गमगीन चेहरे की क्या कहिये   ,
किसी ने हँसते को रुलाया है |
खिला फूल मुरझाया है   अब तो ,…
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Added by Shyam Narain Verma on April 23, 2013 at 5:52pm — 4 Comments

मोहना ओ मेरे मनमोहना, तू कहाँ सो रहा है?

मोहना ओ मेरे मनमोहना, तू कहाँ सो रहा है?

               

(तस्वीर-गूगल इमेजिस से साभार) 

मोहना ओ मेरे मनमोहना, तू कहाँ सो रहा है?…

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Added by Usha Taneja on April 23, 2013 at 5:30pm — 9 Comments

नवगीत/ सांस अभी बाकी है

बस आस तुम्हारी बाकी है

इस आंख में आंसू बाकी है

 

जब जब झरनों सी तरूणाई

आ आकर फिर लौटी है

तुम बन करके शीत चुभन

याद तुम्हारी लौटी है

 

मीत मिले दिन…

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Added by बृजेश नीरज on April 23, 2013 at 5:14pm — 19 Comments

"क्षणिकाएं "

१-अँधेरा

जिधर देखो उधर अँधेरा ही अँधेरा

तुम नजर उठाओ तो सही

गाँव ,शहर ,या घर में भी

काली रातें, घोर अन्धेरा

और कहीं

कुछ दिखता है क्या ?

बहुत अंधकार दिख रहा है ना

क्या कोई दीपक जल रहा है

तो उसे जलने दो

२-बूढ़ा बाप-

बेजान कमरे में !

मेरा दम घुटने लगा है

यहाँ से नहीं निकाल सकते तो

कम से कम मार ही डालो मुझे

३-दर्द

न दिखने वाले दर्द से दब गया हूँ

इसलिए रो रहा हूँ की

थोड़ा…

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Added by ram shiromani pathak on April 23, 2013 at 2:46pm — 27 Comments

वो नन्हा नेत्रहीन

रामनवमी के सुअवसर पर मुझे आगरा -मथुरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर यमुना किनारे स्थित सूरकुटी के नेत्रहीन विद्यालय के नेत्रहीनों के साथ कुछ समय बिताने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।यह क्षेत्र सूर-सरोवर (कीठम-झील) के समीप हैऔर महाकवि सूरदास की कर्मस्थली गऊघाट पर अवस्थित है।यहीं सूर-श्याम मंदिर भी है,जहाँ सूरदास जी श्यामसुंदर की भक्ति में डूबे रहते थे।इसके समीप ही पाँच सौ वर्ष प्राचीन वह कुआँ भी है,जिसके विषय में यह किवदंती प्रचलित है कि एक बार जन्मांध सूरदास जी इस कूप में गिर गए थे,तब भगवान श्रीकृष्ण ने…

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Added by Savitri Rathore on April 23, 2013 at 1:57pm — 12 Comments

इस दिल ने अपनी ज़िन्दगानी से कहा

"चंदा ने चांदनी से कहा

इस दिल ने अपनी ज़िन्दगानी से कहा

बतलाऊँ तुझको…

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Added by Kedia Chhirag on April 23, 2013 at 1:30pm — 7 Comments

ए दिल्ली थोड़ा रो दे तू!

ए दिल्ली थोड़ा रो दे तू!

दिल दिल्ली का बहुत बड़ा, पाषाण हृदय है बहुत कड़ा।

(फिर भी) ए दिल्ली थोड़ा रो दे तू!

ना कोई चिन्ता ना ग्लानि, ना करुणावश बिलखानी

नीति नैतिकता के ह्रास पर,अनामिका की लाश पर,

ए दिल्ली थोड़ा रो दे तू!

बिसर गए कर्तव्यों पर, दिशाहीन वक्तव्यों पर,…

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Added by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा on April 23, 2013 at 11:30am — 10 Comments

बचपन तुमसे मिलने आऊं मैं

बचपन तुम बार बार

पीछे से बुलाते हो |

एक दिन सोचूंगी मैं  

कि तुम्हारी ओर लौट जाऊं  

तितलियों से आगे 

कागज का जहाज

उडाऊं मैं |

अभी हिम्मत है, हौसला है, जोश है

और जिम्मेदारियों का फैला बोझ है

पत्ता पत्ता हरियाली उपजाऊं मैं

इस जंगल से निकलने का मार्ग न पाऊं मैं

तू ही बता ऐसे में कैसे आऊं…

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Added by डॉ नूतन डिमरी गैरोला on April 23, 2013 at 11:00am — 14 Comments

!!! जय जय हनुमान !!!

!!! जय जय हनुमान !!!
(मकरी - कालनेमि राक्षस का उध्दार)

तारक तात तड़ाग तरावहिं, तापर तोष तना तन तावत।
दीन दयाल दया दम दानव, देवम दामन दास दिलावत।।
धारति धाय धरा धन धानम, धूल धमाल धरे धड़कावत।
नारद नाच नरेन्द्र निहारत, नाथ नरायन नाम नसावत।।

के0पी0सत्यम/मौलिक एव अप्रकाशित

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 23, 2013 at 8:58am — 9 Comments

छोड़ आए गाँव में...गजल

छोड़ आए गाँव में वो, ज़िंदगानी याद है।

सौंपकर पुरखे गए जो, वो निशानी याद है।

 

गाँव था सारा हमारा, ज्यों गुलों का इक चमन,

शीत, गर्मी, बारिशों की, ऋतु सुहानी याद है।

 

एक हो खाना खिलाना, रूठ जाने की अदा,

फिर मनाने मानने की, वो कहानी याद है।

 

छुप-छुपाते, खिलखिलाते, हँस हँसाते रात दिन,

फूल, बगिया, बेल-चम्पा, रात रानी याद है।

 

मुँह अँधेरे, त्याग बिस्तर, भागना भूले कहाँ?

हाथ में माँ से मिली, गुड़ और धानी याद…

Continue

Added by कल्पना रामानी on April 22, 2013 at 10:30pm — 30 Comments

नष्ट पुरुष से हो चुका, नारिजगत का मोह-

छली जा रहीं नारियां, गली-गली में द्रोह ।

नष्ट पुरुष से हो चुका, नारिजगत का मोह |

नारिजगत का मोह, गोह सम नरपशु गोहन ।

बनके गौं के यार, गोरि-गति गोही दोहन ।…

Continue

Added by रविकर on April 22, 2013 at 5:00pm — 3 Comments

अभिनंदन

प्रिय मित्र के अमेरिका से अपने देश" भारत " आने पर ,

आपका आपके देश भारत में , तहेदिल से स्वागत है .

                         …

Continue

Added by अशोक कत्याल "अश्क" on April 22, 2013 at 5:00pm — 3 Comments

नवगीत

 मत तोड़ फूल को शाख से

झूमते झूलते संग हवा के

हिलोरें ले रही शाखाओं पर 

सज रहें ये खिले खिले पेड़

बहने दो संगीतमय लहर

यही तो गीत है जीवन का 

....................................

 रहने दो फूल को शाख पर 

वहीँ खिलने और झड़ने दो 

बिखरने दो इसे यूं ही यहाँ 

आकुल है भूमि चूमने इसे 

महकने दो आँचल धरा का 

सृजन होगा नवगीत यहाँ 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Rekha Joshi on April 22, 2013 at 4:33pm — 15 Comments

क्रांति

क्रांति 

-------

चिंता छोड़ो सुख से जियो 

पुस्तक हम भी ले आये 

विश्वास रहा न उनके ऊपर…

Continue

Added by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 22, 2013 at 3:24pm — 20 Comments

धरती का संताप

धरती का संताप

1

विलाप करती वसुमती – ‘ कह रही ‘

हे सागर ! उदधि महान !

उगता जब मेरे आँचल में

आकाश मण्डल दिशा

सूर्य चंद्र और नक्षत्र घटा

प्रताड़ित क्यों हूँ इतनी

बता !…

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Added by coontee mukerji on April 22, 2013 at 1:22pm — 11 Comments

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