For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Neelam Upadhyaya
  • Female
  • New Delhi
  • India
Share

Neelam Upadhyaya's Friends

  • बृजेश नीरज
  • Shyam Narain Verma
  • अरुन शर्मा 'अनन्त'
  • satyam upadhyay
  • Rekha Joshi
  • SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR
  • Monika Jain
  • Yogyata Mishra
  • Tapan Dubey
  • Er. Ambarish Srivastava
  • sanjeev sameer
  • GOPAL BAGHEL 'MADHU'
  • ratan jaiswani
  • Veerendra Jain
  • Shashi Ranjan Mishra
 

Neelam Upadhyaya's Page

Latest Activity

Mohammed Arif commented on Neelam Upadhyaya's blog post लघु कथा - पगडंडी
"आदरणीया नीलम उपाध्याय जी आदाब, बहुत अच्छी लघुकथा । एक बात कहना चाहूँगा कि इस कथानक पर ढेरों लघुकथाएँ लिखीं जा चुकी है ।"
Mar 27
Samar kabeer commented on Neelam Upadhyaya's blog post लघु कथा - पगडंडी
"मोहतरमा नीलम जी आदाब,लघुकथा अच्छी बनी है,इसके लिये बधाई स्वीकार करें । लघुकथा की इब्तिदा में 'काले कोलतार'लिखने की क्या ज़रूरत जबकि सभी जानते हैं कि कोलतार काला ही होता है ? दूसरी बात,'आमोदरफ्त'ग़लत है,सही शब्द है…"
Mar 27
Neelam Upadhyaya commented on Neelam Upadhyaya's blog post भाड़ा
"आदरणीय डॉ विजय शंकर जी, उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद  ।   "
Mar 27
Neelam Upadhyaya commented on Neelam Upadhyaya's blog post भाड़ा
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी, उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत आभार । "
Mar 27
Neelam Upadhyaya commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अनिश्चित भविष्य (कविता) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"आदरणीय उस्मानी साहिब, देश की  वर्तमान दशा को दर्शाती सुंदर कविता । बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 27
Neelam Upadhyaya posted a blog post

लघु कथा - पगडंडी

काले कोलतार की चमक लिए पक्की सड़क । वहीं बगल में थोड़ी निचाई पर पक्की सड़क के साथ-साथ ही चलती एक पगडंडी ।सड़क पर लोगों की खूब आमोदरफ्त रहती, गाड़ियों का आवागमन रहता । अपना मान बढ़ता देख सड़क इतराती रहती । एक दिन उसने पगडंडी से कहा – "मेरे साथ चल कर क्या तू मेरी बराबरी कर लेगी ।  कहाँ मैं चमकती हुयी चिकनी सड़क और कहाँ तू कंकड़-पत्थर से अटी हुयी बदसूरत सी पगडंडी । महंगी से महंगी और बड़ी से बड़ी गाडियाँ मेरे ऊपर से आराम से गुजर जाती हैं । और तू...हुंह... ।" क्यों अपना समय बेकार करती है । यहीं रुक जा । पर…See More
Mar 27
Neelam Upadhyaya commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-- तेरी दुनिया में हम बेकार आये.
"आदरणीय नूर साहब, बहुत ही सुन्दर गजल के लिए बधाई ।  "
Mar 27
TEJ VEER SINGH commented on Neelam Upadhyaya's blog post भाड़ा
"हार्दिक बधाई आदरणीय नीलम जी जी।बेहतरीन प्रस्तुति।"
Mar 17
Dr. Vijai Shanker commented on Neelam Upadhyaya's blog post भाड़ा
"आपकी कहानी में उठाये गए प्रश्न का उत्तर भी आपकी ही कहानी में है। कहानी स्वयं में यथार्थ का विवरण है इसलिए कहानी बहुत अच्छी है , बधाई आदरणीय सुश्री नीलम उपाध्याय जी , सादर।"
Mar 17
Neelam Upadhyaya commented on TEJ VEER SINGH's blog post विश्व महिला दिवस - लघुकथा –
"  आदरणीय तेजवीर सिंह जी, नमस्कार । बहुत ही बढ़िया लघुकथा है । कितना अच्छा हो अगर महिलाएं हर दिन को महिला दिवस माने । बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 14
Neelam Upadhyaya commented on TEJ VEER SINGH's blog post प्रतिशोध - लघुकथा –
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी, नमस्कार । मै अदरणीय आरिफ जी के कथन से पूरी तरह सहमत हूँ ।   हमारे क़ानून इतने सख़्त नहीं हैं जिसका फायदा उठाकर तेज़ाब हमले के अपराधी छूट जाते हैं । इसलिए लड़कियों को खुलकर सामने आने की आवश्यकता है । उन्हें स्वयं आत्म…"
Mar 14
Neelam Upadhyaya posted a blog post

भाड़ा

 "साहेब, कोई पुराना चद्दर हो तो दे दीजिये । बहुत ठंढा गिरने लगा है । कोई पुराना चद्दर दे दीजिये ।" यूं तो वर्किंग डे पर रात के किसी भी आयोजनों में जाने का प्रोग्राम कम ही बनता है । लेकिन फिर भी कभी-कभी कुछ ऐसे मौके भी आ ही जाते हैं जब इस तरह के किसी आयोजन में जाना पड़ जाता है । ऐसे ही एक आयोजन को अटेण्ड कर वापस आते-आते रात के साढ़े ग्यारह बज गए । गोल्फ कोर्स मेट्रो स्टेशन से घर तक जाने के लिए आटो आटो या रिक्शा लेना पड़ता है ।  अक्तूबर के अंतिम सप्ताह के आते-आते मौसम में दिन की तेजी कुछ कम हो चली…See More
Mar 14
बृजेश नीरज commented on Neelam Upadhyaya's blog post हाइकू
"कृपया हाइकु के शिल्प का अध्ययन करें, उसे समझें तब उस पर काम करें. एक वाक्य को तीन पंक्तियों में तोड़ देने से बनने वाली रचना हाइकु नहीं कहलाती."
Feb 26
Mohammed Arif commented on Neelam Upadhyaya's blog post हाइकू
"आदरणीया नीलम जी आदाब, बहुत ही शानदार प्रस्तुति बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 23
Neelam Upadhyaya posted a blog post

हाइकू

पहाड़ परचढ़ना भी पहाड़सोचा ही नहीं  स्नेह आशीषसे भरा रहा सदा   माँ का आंचल xxxxx  महकी हवावासंती हैं नजारेफागुन आया ।  मादक टेसू  रंग गई चूनरफागुन आया ।  भनभनातेगुन गुन भँवरेकैसी ढिठाई ।   मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Feb 22
Neelam Upadhyaya replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय समर कबीर जी,  इस शानदार उपलब्धि पर आपको हार्दिक बधाई | भविष्य में और भी उपलब्धियां हांसिल हों इसके लिए शुभकामनाए ।"
Feb 21

Profile Information

Gender
Female
City State
NOIDA, Uttar Pradesh
Native Place
Distt. Gopalganj, Bihar
Profession
In Central Government job
About me
Ego khanti Bhartiya, aa ohu mein pakka bhojpuria, hindustani sangeet ke vidyarthi jekara apana sanskriti se bahut lagaw ba. Pichhala 16 saal se "Swar Trishna Vrinda" naam ke choir mein singer hayee. Ghar-office ke dayra ke beech mein rah ke bhi apana bhasha-bhashi ke sangat khojat rahile.

Neelam Upadhyaya's Blog

लघु कथा - पगडंडी

काले कोलतार की चमक लिए पक्की सड़क । वहीं बगल में थोड़ी निचाई पर पक्की सड़क के साथ-साथ ही चलती एक पगडंडी ।

सड़क पर लोगों की खूब आमोदरफ्त रहती, गाड़ियों का आवागमन रहता । अपना मान बढ़ता देख सड़क इतराती रहती । एक दिन उसने पगडंडी से कहा – "मेरे साथ चल कर क्या तू मेरी बराबरी कर लेगी ।  कहाँ मैं चमकती हुयी चिकनी सड़क और कहाँ तू कंकड़-पत्थर से अटी हुयी बदसूरत सी पगडंडी । महंगी से महंगी और बड़ी से बड़ी गाडियाँ मेरे ऊपर से आराम से गुजर जाती हैं । और तू...हुंह... ।" क्यों अपना समय बेकार करती है । यहीं रुक…

Continue

Posted on March 27, 2017 at 2:00pm — 2 Comments

भाड़ा

 

"साहेब, कोई पुराना चद्दर हो तो दे दीजिये । बहुत ठंढा गिरने लगा है । कोई पुराना चद्दर दे दीजिये ।"

 

यूं तो वर्किंग डे पर रात के किसी भी आयोजनों में जाने का प्रोग्राम कम ही बनता है । लेकिन फिर भी कभी-कभी कुछ ऐसे मौके भी आ ही जाते हैं जब इस तरह के किसी आयोजन में जाना पड़ जाता है । ऐसे ही एक आयोजन को अटेण्ड कर वापस आते-आते रात के साढ़े ग्यारह बज गए । गोल्फ कोर्स मेट्रो स्टेशन से घर तक जाने के लिए आटो…

Continue

Posted on March 14, 2017 at 4:23pm — 4 Comments

हाइकू

पहाड़ पर

चढ़ना भी पहाड़

सोचा ही नहीं

 

 

स्नेह आशीष

से भरा रहा सदा   

माँ का आंचल

 

xxxxx

 

 

महकी हवा

वासंती हैं नजारे

फागुन आया ।

 

 

मादक टेसू  

रंग गई चूनर

फागुन आया ।…

Continue

Posted on February 22, 2017 at 4:48pm — 2 Comments

कुछ हाइकू

सहमी सर्दी

कारागृह में अब

फागुन आया

 

सड़क संग

चलती ही रहती

पगडंडी भी

 

टंगे रहते

सोने के झूमर से

अमलतास

 …

Continue

Posted on February 16, 2017 at 4:00pm — 4 Comments

Comment Wall (13 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:55pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 4:01pm on June 20, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीया नीलम जी, सादर 

जन्म दिन की शुभ कामनाएं 

At 8:33pm on January 5, 2012, Mukesh Kumar Saxena said…


आपका वहुत धन्यबाद कि आपने मेरा मनोबल बढाया

At 12:10pm on June 23, 2011, DEEPAK SHARMA 'KULUVI' said…
BAHUT HI SUNDAR RACHNAYEN NEELAM JI

REGARDS

KULUVI
At 6:25pm on June 20, 2011, ratan jaiswani said…
Happy birth day neelam ji.
At 6:09pm on June 20, 2011, Sanjay Rajendraprasad Yadav said…
At 9:06am on June 20, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 5:30pm on April 7, 2011, nemichandpuniyachandan said…
aap dwara housala aphazai ke liye aabhar.
At 10:03am on August 27, 2010, Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह said…
.

@► नीलम जी , मित्र के रूप में आपका स्वागत है ...

.
At 1:28pm on July 5, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Rakshita Singh is now a member of Open Books Online
29 minutes ago
Sushil Sarna posted a blog post

ज़िंदगी के सफे ...

ज़िंदगी के सफे ...हैरां हूँ बाद मेरे फना होने के किसी ने मेरी लहद को गुलों से नवाज़ा है एक एक गुल में…See More
34 minutes ago
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post मूक दर्शक (लघुकथा)
"Ddhanywad aadarniya Mohammed Arif ji .Eid ki shubhkamnayen aapko"
45 minutes ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : भइ, आप हैं मालिक तो कहाँ आपसे तुलना
"आदरणीय सौरभ सर बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है, हर शैर सवा अरब का प्रतिनिधित्व कर रहा है, भारत के परिवेश…"
48 minutes ago
बसंत कुमार शर्मा commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : भइ, आप हैं मालिक तो कहाँ आपसे तुलना
"वाह मुग्ध हूँ, आपकी ग़ज़ल पढ़कर, लाजबाब से भी लाजबाब, बहुत बहुत बधाई आपको. ईद मुबारक "
1 hour ago
बसंत कुमार शर्मा commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल- कैसे कहूँ मै आप से मुझको गिला नहीं
"बेहतरीन ग़ज़ल "
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल ---झुकी झुकी सी नज़र में देखा
"आ0 मित्र श्री जयनित मेहता जी सादर आभार ।"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post 52 शेर की ग़ज़ल।
"आ0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आभार ।"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post 52 शेर की ग़ज़ल।
"भाई जयनित मेहता जी आभार मित्र"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल- कैसे कहूँ मै आप से मुझको गिला नहीं
"आ0 अनिता मौर्या जी शुक्रिया ।"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post गज़ल- कैसे कहूँ मै आप से मुझको गिला नहीं
"आ0 जयनित मेहता जी सादर आभार ।"
1 hour ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पश्चिम का आँधी
"आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, आप बिलकुल सही हैं, यह १६ १० मात्रा पर ही है, फुर्र हुई चिट्ठी…"
2 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service