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मोहन बेगोवाल
  • Male
  • Amritsar
  • India
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VIRENDER VEER MEHTA commented on मोहन बेगोवाल's blog post पर्दा (लघुकथा)
"बहुत उम्दा रचना आदरणीय मोहन बेगोवाल जी। पर्दे के पीछे छिपे सच कितने सच हो सकते है और कितने झूठ, इस बात पर बेहतरीन कथ्य सामने रखती रचना के लिये हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Wednesday
babitagupta commented on मोहन बेगोवाल's blog post अधूरा रिश्ता (लघुकथा)
"अच्छी रचना प्रस्तुति के लिए आदरणीय सर जी बधाई स्वीकार कीजिए"
May 14
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post पर्दा (लघुकथा)
"जनाब डॉ.मोहन बेगोवाल जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
May 13
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post अपनत्व की खुशबु (लघुकथा )
"जनाब डॉ.मोहन बेगोवाल साहिब आदाब,अच्छी लघुकथा है, बधाई स्वीकार करें ।"
May 13
Kumar Gourav commented on मोहन बेगोवाल's blog post पर्दा (लघुकथा)
"पर्दे के पीछे का सच , बहुत सुंदर विचारोत्तेजक रचना । बहुत बहुत बधाई ।"
May 13
babitagupta commented on मोहन बेगोवाल's blog post अपनत्व की खुशबु (लघुकथा )
"बहुत ही सुन्दर मन के भावों से मनुष्य के जीवन की विडंबना का उउल्लेख कर वास्तविकता को प्रस्तुत किया है, बधाई स्वीकार कीजिए प्ररकाशित रचना के लिए।"
May 13
Nita Kasar commented on मोहन बेगोवाल's blog post अपनत्व की खुशबु (लघुकथा )
"जिंदगी की विडंबना है लोग उस समय साथ देने आगे नही आते जब कोई व्यक्ति जीवन की जद्दोजहद से घिरा होता है ।दार्शनिक अंदाज में लिखी गई कथा के लिये बधाई आद० मोहन बेगोवाल जी ।"
May 13
Sheikh Shahzad Usmani commented on मोहन बेगोवाल's blog post अपनत्व की खुशबु (लघुकथा )
"..//.. कहते हैं लहू सफेद हो गया है, तब ये हजूम मुझे अचंभे में डाल रहा था|/ आकस्मिक दुर्घटना/मौत पर आकस्मिक भीड़ अचंभित ही करती है और दहशत भी पैदा कर सकती है।  बहुत बढ़िया मुद्दे उभारती बढ़िया रचना के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद…"
May 13
Mohan Begowal commented on मोहन बेगोवाल's blog post पर्दा (लघुकथा)
" आदरनीय शेख उसमानी साहिब जी,रचना पर टिपणी करने के लिए धन्यावाद "
May 12
Sheikh Shahzad Usmani commented on मोहन बेगोवाल's blog post पर्दा (लघुकथा)
"पीड़ता और अवलोकनकर्ता की पीड़ाओं को उभारती पर्दे के पीछे के सच पर बेहतरीन विचारोत्तेजक कसी हुई लघुकथा। हार्दिक बधाई आदरणीय मोहन बेगोवाल साहिब।"
May 12
मोहन बेगोवाल posted blog posts
May 12
मोहन बेगोवाल posted a blog post

अपनत्व की खुशबु (लघुकथा )

शहर के बड़े शिवपुरी में उस कि अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी, इस शिवपुरी में मैं कई बार अंतिम संस्कारों में शामिल हो चूका था| मगर जिस तरह का हजूम आज राजेंद्र मास्टर के साथ आया था, ऐसा मैंने कभी नहीं देखा था| सभी आंखें नम थी और इधर उधर चारों तरफ चीकें सुनाई दे रही थी किसी को उसके इस तरह जाने पे यकीन नहीं हो रहा था|  कोई ये कह रहा था, “क्या ऐसा भी हो सकता है, मगर दुर्घटना कब, कहाँ हो जाए कहाँ पता चलता है इसके बारे कोई कुछ नहीं कह सकता”| “मगर बचातो जा सकता है, इसके लिए प्रबंध तो किये जा सकते…See More
May 11
Chetan Prakash commented on मोहन बेगोवाल's blog post अधूरा रिश्ता (लघुकथा)
"अंत लघु कथा के कथ्य को कदाचित भटकाता लगा।ऐसा लगा कथाकार एक सा थ कई लक्ष्यों को भेदना चाहता है।"ये तो साली आधी घर वाली को पूरी घर वाली  बनानी चाहता था | सरकारी नौकरी थी |  वो तो नहीं बनी मगर अब  वहां जा रहा है , यहां से वापस नहीं…"
May 10
Neelam Upadhyaya commented on मोहन बेगोवाल's blog post अधूरा रिश्ता (लघुकथा)
"अच्छी लघुकथा के लिए बधाई स्वीकार करें आदरणीय मोहन बेगोवाल जी ।"
May 8
Sheikh Shahzad Usmani commented on मोहन बेगोवाल's blog post पिता पुत्र(लघुकथा)
"बहुत बढ़िया पेशकश आदरणीय मोहन बेगोवाल साहिब।"
May 6
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post अधूरा रिश्ता (लघुकथा)
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,अच्छी लघुकथा है, बधाई स्वीकार करें ।"
May 5

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical Teacher
About me
Gazalgo , Punjabi Writer

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पर्दा (लघुकथा)

पर्दा

हर समय मुस्कराता चेहरा, और दूसरों के चेहरे पे मुस्कराहट बिखेर देना उस का बाएँ हाथ का काम था।

कई बार मैं खुद छुप कर आईने के सामने उस जैसा मुस्कराने की कोशिश करता, मगर असफल रहता ।

तब खुद को कहता “क्या कमी है, अगर मैं मुस्करा दूँ तो कौन सा पहाड़ गिर जायेगा ?”

मगर कल शाम से सारा मौहला उदास नज़र आ रहा था ।

किसी ने आकर बताया कि सुबह के दस बज गए, अभी तक दरवाज़ा नहीं खुला था।

मैं और भी उदास हो गया,पता नहीं चल रहा ऐसा क्यूँ हुआ।

तब मेरे कानों में इक आवाज़ सुनाई… Continue

Posted on May 12, 2018 at 6:18pm — 5 Comments

अपनत्व की खुशबु (लघुकथा )

शहर के बड़े शिवपुरी में उस कि अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी, इस शिवपुरी में मैं कई बार अंतिम संस्कारों में शामिल हो चूका था| मगर जिस तरह का हजूम आज राजेंद्र मास्टर के साथ आया था, ऐसा मैंने कभी नहीं देखा था| सभी आंखें नम थी और इधर उधर चारों तरफ चीकें सुनाई दे रही थी किसी को उसके इस तरह जाने पे यकीन नहीं हो रहा था| 

कोई ये कह रहा था, “क्या ऐसा भी हो सकता है, मगर दुर्घटना कब, कहाँ हो जाए कहाँ पता चलता है इसके बारे कोई कुछ नहीं कह सकता”|

“मगर बचातो जा सकता है, इसके लिए प्रबंध तो…

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Posted on May 11, 2018 at 3:30pm — 4 Comments

अधूरा रिश्ता (लघुकथा)

वार्ड के बिस्तर पर वह निढ़ाल पड़ा है, डॉक्टर कह रहे हैं कि ये नीला पड़ गया है, उन्होंने पुलिस को भी बुला लिया है |

“नीला तो पैदा होते समय ही था, अब क्या होगा ?”, किसी पास खड़े ने कहा | 

बात निकलती हुई इस पर आ कर रुक गई, सुबह तो नए कपड़े पहन और चौर बाज़ार से खरीदी काली एनक लगा कि गया था 

काले चश्में का एक फायदा तो ये था कि आंख का टीर भी नजर नही आता था |

अभी कुछ दिन हुए घर वाली रब को प्यारी हो गई थी | 

कुछ…

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Posted on May 4, 2018 at 10:30pm — 5 Comments

पिता पुत्र(लघुकथा)

सतवंत पहले से ही मेरे साथ इस के बारे में बात कर चूका था। लेकिन जिस दिन से उसने मुझसे बात की थी, कोई भी पुराना साथी उसके पास नहीं आया और न ही वह किसी को मिलने गया था। मगर उस दिन से घर के लोगों ने उस से बात करना बंद कर दी थी ।

हद तो उस रोज़ हो गई जब इक दिन बाप हाथ में जूती ले कर सतवंत के पीछे दौड़ पड़ा और ये ध्यान भी नहीं किया के लोग क्या कहेंगे, तब सतवंत को लगा था कि इस जिंदगी का क्या फायदा जब बीस को पार कर चुके बच्चे पे माँ बाप को यकीन न रहे , तब कोई और क्या करे ? बड़े भाई से सतवंत ने फोन…

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Posted on May 2, 2018 at 7:30pm — 7 Comments

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At 5:28pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मोहन जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 9:08pm on March 1, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई, ईश्वर आपको प्रत्येक क्षेत्र में सफल करें ......

At 8:14pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

       

      आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आपको शेर पसन्द आये . मै कृतार्थ हुई

 
 
 

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