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मोहन बेगोवाल
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  • Amritsar
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मोहन बेगोवाल posted a blog post

विरासत (लघुकथा )

   विरासत (लघुकथा )सुबह पढ़ी कहानी से महेंद्र बहुत प्रभावित हुए | वह चाहते थे कि घर का हर सदस्य भी इसे पढ़ें क्यूंकि इस कहानी में लेखक ने जो बताने की कोशिश की है | वे आज के दौर के बारे में है जो हमारी आने वाली जिंदगी  को कैसे प्रभावित करेगी के बारे में है | घर के सदस्य टेलीविज़न देख रहे हैं | मगर सब से छोटी लड़की सौफे पे बैठी पढ़ रही है | महेंद्र इस कहानी को पढ़ने के लिए, उसे देना चाह रहा है | क्यूंकि के उसकी लाइब्रेरी में कई किताबें हैं, मगर वे सब ....... | मगर दिल बार बार कह रहा है कि सदस्य ये…See More
Jun 19
KALPANA BHATT commented on मोहन बेगोवाल's blog post झूठ का साया(लघुकथा)
"ऐसा भी होता है ? क्या फर्जी तरीके इस तरह से नौकरिया हतियाई जाती है ? क्या जांच नहीं होती ? प्रस्तुत कथा के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार जी\"
Jun 3
मोहन बेगोवाल replied to योगराज प्रभाकर's discussion ओबीओ लाईव लघुकथा गोष्ठी अंक-26 में स्वीकृत लघुकथाएँ
"आदरणीय मंच संचालक  श्री योगराज प्रभाकर जी, शानदार लघुकथा गोष्ठी की सफलता के लिए बधाई स्वीकार करें , आप जी से निवेदन है कि मेरी इस लघुकथा को पोस्ट कर दीजिएगा जी  सबक कालोनी के लोग चोपाल में आने लगे,धीरे धीरे चोपाल लोगों से भर गई, और सभी का…"
Jun 1
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"आदरनीया  विभा रानी जी, सुंदर लघुकथा के प्रयास के लिए धन्यवाद "
May 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"     "आदरणीया कल्पना बहन जी, सुंदर लघुकथा के लिए बधाई हो "
May 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"   आदरनीया नीता जी, बहुत सुंदर लघुकथा के लिए बधाई स्वीकार करें "
May 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"कालोनी के लोग चोपाल में आने लगे,धीरे धीरे चोपाल लोगों से भर गई, और सभी का ध्यान गेट की तरफ किसी के आने के इंतजार में है ।कालोनी में सत्ताधारी पार्टी के लीडर के आने का समाचार पहले ही फैल चूका हुआ है ।कालोनी का लीडर भी इधर उधर तेज़ गति से अपने लोगों को…"
May 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-26 (विषय:सबक़)
"सबककालोनी के लोग चोपाल में आने लगे,धीरे धीरे चोपाल लोगों से भर गई, और सभी का ध्यान गेट की तरफ किसी के आने का इंतजार में लगा । कालोनी में सत्ताधारी पार्टी के लीडर के आने का समाचार पहले ही फैला हुआ है । कालोनी का लीडर भी इधर उधर तेज़ गति से अपने लोगों…"
May 31
Dr. Vijai Shanker commented on मोहन बेगोवाल's blog post झूठ का साया(लघुकथा)
"संभवतः आज के समय में यह संभव नहीं है पर आज से पचास वर्ष पूर्व निसंदेह संभव था। यह कहानी का स्पष्ट प्रणाम है कि कितनी कमजोर और लचर व्यवस्था थी हमारे प्रशासनिक ढाँचे की। इसी का परिणाम हम आज भी भुगत रहे हैं। ठीक ही कहा जाता है कि एक नेता या अफसर के पास…"
May 29
Dr. Vijai Shanker commented on मोहन बेगोवाल's blog post झूठ का साया(लघुकथा)
"संभवतः आज के समय में यह संभव नहीं है पर आज से पचास वर्ष पूर्व निसंदेह संभव था। यह कहानी का स्पष्ट प्रणाम है कि कितनी कमजोर और लचर व्यवस्था थी हमारे प्रशासनिक ढाँचे की। इसी का परिणाम हम आज भी भुगत रहे हैं। ठीक ही कहा जाता है कि एक नेता या अफसर के पास…"
May 29
Mohammed Arif commented on मोहन बेगोवाल's blog post झूठ का साया(लघुकथा)
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आदाब,ऐसे कई शासकीय कर्मचारी हैं जो फर्ज़ी तरीके से नौकरी हथिया लेते हैं । आख़िर में जब रहस्य उजागर होता है तो जाँच कमेटी बैठाई जाती है । हमारी प्रशासनिक व्यवस्था भी नये सत्ता उदय के बाद भी भ्रष्टाचार मुक्त नहीं हो पाई है ।…"
May 28
मोहन बेगोवाल posted a blog post

झूठ का साया(लघुकथा)

                       महिंद्र की सेवानिवृत्ति पार्टी शुरू हो गई | विभाग के कर्मचारियों के साथ महिंद्र के करीब के रिश्तेदार भी आ कर हाल में  बैठ गए | थोड़ी देर बाद साहिब  भी आ गए | साहिब और कार्यालय के कर्मचारियों ने महिंद्र और उसकी पत्नी को आगे पड़ी कुर्सियों पे बिठाया और उनके गले में हार डाले और उनको गिफ्ट दिए |इसी समय सब को भोजन परोसा गया और सभी ने खाना शुरू किया, समारोह के चलते, कुछ लोगों को महिंद्र के बारे में कुछ कहने के लिए क्रमवार बुलाया गया |मगर सभी लोगों की वाणी में इक बात झलकी कि…See More
May 28
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"   आदरनीय तस्दीक जी, अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई कुबूल करें "
May 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरनीय मजाज जी, बहुत बढ़िया ग़ज़ल के लिए बधाई कुबूल करें "
May 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरनीय शिज्जू जी, बहुत सुंदर अशआर के लिए मुबारकबाद "
May 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"    आदरनीय रिजवान जी, उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई कुबूल करो "
May 27

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical Teacher
About me
Gazalgo , Punjabi Writer

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विरासत (लघुकथा )

   

विरासत (लघुकथा )

सुबह पढ़ी कहानी से महेंद्र बहुत प्रभावित हुए |

वह चाहते थे कि घर का हर सदस्य भी इसे पढ़ें क्यूंकि इस कहानी में लेखक ने जो बताने की कोशिश की है |

वे आज के दौर के बारे में है जो हमारी आने वाली जिंदगी  को कैसे प्रभावित करेगी के बारे में है |

घर के सदस्य टेलीविज़न देख रहे हैं |

मगर सब से छोटी लड़की सौफे पे बैठी पढ़ रही है |

महेंद्र इस कहानी को पढ़ने के लिए, उसे देना चाह रहा है |

क्यूंकि के उसकी लाइब्रेरी में कई किताबें हैं, मगर वे सब…

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Posted on June 19, 2017 at 3:30pm

झूठ का साया(लघुकथा)

                       

महिंद्र की सेवानिवृत्ति पार्टी शुरू हो गई | विभाग के कर्मचारियों के साथ महिंद्र के करीब के रिश्तेदार भी आ कर हाल में  बैठ गए | थोड़ी देर बाद साहिब  भी आ गए | साहिब और कार्यालय के कर्मचारियों ने महिंद्र और उसकी पत्नी को आगे पड़ी कुर्सियों पे बिठाया और उनके गले में हार डाले और उनको गिफ्ट दिए |

इसी समय सब को भोजन परोसा गया और सभी ने खाना शुरू किया, समारोह के चलते, कुछ लोगों को महिंद्र के बारे में कुछ कहने के लिए क्रमवार बुलाया गया |

मगर सभी…

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Posted on May 28, 2017 at 6:02am — 4 Comments

ड्रामा और हकीकत(लघुकथा)

गेट के सामने भीड़ इकठ्ठी हो रही है, कुछ लोग क्रोध से भर कार्यालय के अंदर जाने की कोशिश कर रहे हैं । द्वारपाल भीड़ को रोकने की कोशिश में नकाम हो रहा है।

प्रेस अपने वीडियो कैमरे के साथ कार्यालय तक पहुँच गई है, और पत्रकार कई तरह के सवाल पुछ रहे हैं जैसे “वार्ड नं ३ में होने वाली मौत के बारे आप क्या कहना चाहेंगा। आप बताएँ मौत कि लिए जिम्मेदार चिकित्सक पर क्या एकशन लिया गया है।“

"आप कैसे कह सकते हैं कि मौत के लिए चिकित्सक ही जिम्मेदार है ?" बड़े टेबल की दुसरी तरफ़ बैठे साहिब ने कहा। मैने…

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Posted on May 15, 2017 at 4:30pm — 6 Comments

बंद दरवाज़े (लघुकथा )

“आंटी जी, अगर उस दिन आप ने मेरे सर पर हाथ न रखा होता तो पता नहीं मैं कहाँ होती”

“कीमत तो वो मेरी पहले ही लगा चुके थे,उस रोज़ तो बस पैसे देने ही आए थे ”।

“मुझ को तो कुछ पता ही नहीं चलने दिया था”  ऋतू ये कहती जा रही थी।

“ये तो भला हो, मेरे साथ डांस पार्टी में काम करने वाली सुनीता का,

 "उस बता दिया मुझको  कि  मालिक तो मेरे पैसे ले रहा  हैं, कल तुम किसी और डांस पार्टी में काम करोगी "

  "तब मुझे आप के पास तो आना ही था, आंटी जी" 

 “घर से तो अमली ने  पहले ही…

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Posted on May 10, 2017 at 12:30pm — 8 Comments

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At 9:08pm on March 1, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई, ईश्वर आपको प्रत्येक क्षेत्र में सफल करें ......

At 8:14pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

       

      आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आपको शेर पसन्द आये . मै कृतार्थ हुई

 
 
 

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"आ0 जयनित मेहता जी सादर आभार ।"
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