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मोहन बेगोवाल
  • Male
  • Amritsar
  • India
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मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"सर जी, बहुत सुंदर लघूकथा के लिए बहुत बहुत मुबारकबाद"
Jul 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"बहुत ही सुंदर लघूकथा के लिए बधाई हो"
Jul 31
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ.मोहन बेगोवाल जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें,ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है,आपको चाहिए कि ग़ज़ल के विषय में मंच पर मौजूद आलेखों का अध्यन करें ।"
Jul 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"बहुत सुंदर लघूकथा के लिए बहन राजेश जी बधाई हो"
Jul 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"सभी दोस्तों का मेरी लघूकथा के लिए विचार देने का धन्यावाद"
Jul 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"अच्छी लघूकथा की बधाई क़ुबूल करें।"
Jul 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"बहुत सुंदर लघूकथा के लिए बधाई"
Jul 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"बहुत सुंदर लघूकथा जिस में समाज की बुराई को पेश किया है"
Jul 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"सुख बनाम सूनापन(लघुकथा) रिटायरमेंट के बाद आज मैं अपने गाँव को जाने के लिए तैयार हो कार में बैठ गया। चाली वर्ष के बाद आज फ्री हो कर पहली बार गाँव जाने का प्रोग्राम बनाया, यहाँ पर भी तो अकेला ही हूँ, जब की श्रीमती इंग्लेंड बेटे के पास गई है…"
Jul 31
मोहन बेगोवाल posted a blog post

ग़ज़ल

तू  दर्द से मिलें  हो ये  दौलत  कहाँ कहाँ                     रहती है प्यार को  भी  शिकायत कहाँ कहाँ             दुनिया  बदल  गई  कोई हमको  बता गया                    मिलती है बोल सोच कि वहशत कहाँ  कहाँ             जब  अब   बहा र हो न  हमारे  नसीब  में                   फिर और  हम बता दो तिजारत कहाँ कहाँ                    हम भी तलाश हार  गये  जो     मिला नहीं                   पाने    को  उस करी न  इबादत कहाँ कहाँ                   कैसे    कहें     सदा  वो  हमारे  बनें    रहे …See More
Jul 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"सुंदर लघूकथा के लिए मुबारकबाद"
Jul 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"बहुत उम्दा अर्थ भरपूर लघूकथा के लिए बधाई क़ुबूल करें"
Jul 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-28
"बहुत ही टचिंग लघूकथा,मगर आज तो लोग घर को भी तेज़ी से बदलने लगे हैं, अच्छी लघूकथा के लिए बधाई"
Jul 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-85
"शिजू जी,सुंदर ग़ज़ल के लिए बधाई कुबूल करें"
Jul 29
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-85
"अच्छी ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद"
Jul 29
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-85
"बहुत सुंदर ग़ज़ल की बधाई कुबूल करें"
Jul 29

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical Teacher
About me
Gazalgo , Punjabi Writer

मोहन बेगोवाल's Blog

ग़ज़ल

तू  दर्द से मिलें  हो ये  दौलत  कहाँ कहाँ                     

रहती है प्यार को  भी  शिकायत कहाँ कहाँ

             

दुनिया  बदल  गई  कोई हमको  बता गया                    

मिलती है बोल सोच कि वहशत कहाँ  कहाँ

             

जब  अब   बहा र हो न  हमारे  नसीब  में                   

फिर और  हम बता दो तिजारत कहाँ कहाँ

                    

हम भी तलाश हार  गये  जो     मिला नहीं                   

पाने    को  उस करी न  इबादत कहाँ…

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Posted on July 30, 2017 at 9:50am — 1 Comment

विरासत (लघुकथा )

   

विरासत (लघुकथा )

सुबह पढ़ी कहानी से महेंद्र बहुत प्रभावित हुए |

वह चाहते थे कि घर का हर सदस्य भी इसे पढ़ें क्यूंकि इस कहानी में लेखक ने जो बताने की कोशिश की है |

वे आज के दौर के बारे में है जो हमारी आने वाली जिंदगी  को कैसे प्रभावित करेगी के बारे में है |

घर के सदस्य टेलीविज़न देख रहे हैं |

मगर सब से छोटी लड़की सौफे पे बैठी पढ़ रही है |

महेंद्र इस कहानी को पढ़ने के लिए, उसे देना चाह रहा है |

क्यूंकि के उसकी लाइब्रेरी में कई किताबें हैं, मगर वे सब…

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Posted on June 19, 2017 at 3:30pm

झूठ का साया(लघुकथा)

                       

महिंद्र की सेवानिवृत्ति पार्टी शुरू हो गई | विभाग के कर्मचारियों के साथ महिंद्र के करीब के रिश्तेदार भी आ कर हाल में  बैठ गए | थोड़ी देर बाद साहिब  भी आ गए | साहिब और कार्यालय के कर्मचारियों ने महिंद्र और उसकी पत्नी को आगे पड़ी कुर्सियों पे बिठाया और उनके गले में हार डाले और उनको गिफ्ट दिए |

इसी समय सब को भोजन परोसा गया और सभी ने खाना शुरू किया, समारोह के चलते, कुछ लोगों को महिंद्र के बारे में कुछ कहने के लिए क्रमवार बुलाया गया |

मगर सभी…

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Posted on May 28, 2017 at 6:02am — 4 Comments

ड्रामा और हकीकत(लघुकथा)

गेट के सामने भीड़ इकठ्ठी हो रही है, कुछ लोग क्रोध से भर कार्यालय के अंदर जाने की कोशिश कर रहे हैं । द्वारपाल भीड़ को रोकने की कोशिश में नकाम हो रहा है।

प्रेस अपने वीडियो कैमरे के साथ कार्यालय तक पहुँच गई है, और पत्रकार कई तरह के सवाल पुछ रहे हैं जैसे “वार्ड नं ३ में होने वाली मौत के बारे आप क्या कहना चाहेंगा। आप बताएँ मौत कि लिए जिम्मेदार चिकित्सक पर क्या एकशन लिया गया है।“

"आप कैसे कह सकते हैं कि मौत के लिए चिकित्सक ही जिम्मेदार है ?" बड़े टेबल की दुसरी तरफ़ बैठे साहिब ने कहा। मैने…

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Posted on May 15, 2017 at 4:30pm — 6 Comments

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At 9:08pm on March 1, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई, ईश्वर आपको प्रत्येक क्षेत्र में सफल करें ......

At 8:14pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

       

      आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आपको शेर पसन्द आये . मै कृतार्थ हुई

 
 
 

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