For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज कल झूठ बोलता हूँ मैं

2122 1212 22

अपना ईमान खो रहा हूँ मैं

आज कल झूठ बोलता हूँ मैं

 

ज़िन्दगी देख भाल करती नहीं

मौत के पास जा रहा हूँ मैं

 

हाल बिखरा हुआ है हिस्सों में

और आगे की सोचता हूँ मैं

 

शाइरी हर्फ़-ए-राएगाँ है तो

किस लिए शे'र लिख रहा हूँ मैं

 

मेरे अंदर जो एक औरत है

उसकी ख़ुशबू से खिल उठा हूँ मैं

 

शाइरी से मिला है रिज़्क़ मुझे

इसलिए लफ़्ज़ फांकता हूँ मैं

 

ध्यान रखने का कह रहे हो तुम

ठीक है फोन काटता हूँ मैं

 

ख़्वाब में सामने खड़े हो तुम

और तस्वीर खींचता हूँ मैं

 

रूपम कुमार -'मीत'

मौलिक एवं अप्रकाशि

Views: 109

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rupam kumar -'मीत' on May 31, 2020 at 7:58am

 सालिक गणवीर सर ये तो आपकी कृपा है जो मुझे इस मंच के बारे में बताया, अपने ही लिंक दी और मुझे यहाँ पर जोड़ा, इस मंच की खास बात ये है कि यहाँ कोई भी वाह! वाह! नहीं करते और ग़ज़ल में कोई गलती हो तो बताते है, आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ सर्।।। आपका दिन शुभ हो।।

Comment by सालिक गणवीर on May 30, 2020 at 4:59pm

प्रिय रुपम कुमार 

अच्छी ग़ज़ल हुई है. बधाईयां स्वीकार करो.गुरु जनों की इस्लाह पर अमल करते रहें.

मुझे आपमें अपार संभावनाएं दिखती हैं. निरंतर लिखते रहें.

सप्रेम

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on May 30, 2020 at 11:56am

रूपम कुमार जी, शुभ - शुभ। धन्यवाद। 

Comment by Rupam kumar -'मीत' on May 30, 2020 at 8:41am

अमीरुद्दीन खा़न "अमीर सर जी आपकी बात मैं समझ गया, यहाँ पर मैं नया हूँ, बहुत से नियम नहीं मालूम मुझे, इस बालक से कोई गलती हो गई हो तो माफ कर दीजिएगा आपका दिन शुभ हो :)

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on May 29, 2020 at 6:28pm

रूपम कुमार जी, 'हम' कोई नहीं हैं जो किसी का एक मिसरा भी मुकम्मिल करा सकें। मैं भी आपकी तरह तालिब ए इल्म हूँ । और सीख रहा हूंँ। ये सब आपकी महनत और लगन का नतीजा है। जिस पर उस्ताद ए मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब की नज़र पड़ गयी उस की शाइरी ख़ुद ब ख़ुद सँवर जाती है। और हाँ... आप जिस से संवाद करना चाहते हैं उससे उस के नाम या पद नाम के साथ संवाद किया करें, 'आपका शुक्रिया' या 'आप लोगों' जैसे सम्बोधन मुनासिब नहीं। उम्मीद है इसे अन्यथा नहीं लेंगे। 

Comment by Rupam kumar -'मीत' on May 29, 2020 at 10:03am

आपका बहुत शुक्रिया , आप लोगों की वजह से मेरी अधूरी ग़ज़ल मुक्कमल हुई,, आप से निवेदन है की आगे भी मेरी ग़ज़ल इस्लाह कर दीजिएगा मुझे भी सीखना है इस बालक का प्रणाम आपके चरण में!!!!!

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on May 29, 2020 at 9:09am

जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी, उस्ताद मुहतरम की इस्लाह के बाद ग़ज़ल निखर गयी है। वाह... बधाईयाँ ।

Comment by Samar kabeer on May 28, 2020 at 2:43pm

जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

'ज़िंदगी देख भाल नईं करती'

इस मिसरे में 'नईं' शब्द उचित नहीं,ये दकनी उर्दू का शब्द है,मिसरा यूँ कर सकते हैं:-

'ज़िन्दगी देख भाल करती नहीं'

'शायरी हर्फ़-ए-राएगानी है'

इस मिसरे में 'राएगानी' शब्द उचित नहीं,और 'शायरी' 

को हमेशा "शाइरी" लिखना उचित होता है,इस मिसरे को यूँ कर सकते हैं:-

'शाइरी हर्फ़-ए-राएगाँ है तो'

'शायरी से मिली है रिज़्क़ मुझे'

इस मिसरे में 'रिज़्क़' शब्द पुल्लिंग है,मिसरा यूँ कर सकते हैं:-

'शाइरी से मिला है रिज़्क़ मुझे'

'ख़्वाब में सामने खड़ी हो तुम'

उर्दू शाइरी में महबूब को स्त्रीलिंग नहीं लेते,इसलिए 'खड़ी हो तुम' की जगह "खड़े हो तुम" लिखना उचित होगा ।

बाक़ी शुभ शुभ ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तेरे ख्वाहिशों के शह्र में- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' भाई, अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें!"
2 hours ago
Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गया (ग़ज़ल)

बह्र-221/2121/1221/212वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गयाआँखों से प्यार का मेरे मौसम चला गया[1]वो…See More
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post छत पे आने की कहो- ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत कुमार जी, सादर अभिवादन । वर्षा रितु के हिसाब से उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तेरे ख्वाहिशों के शह्र में- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)

२२१/२१२१/१२२१/२१२१/२लिखना न मेरा नाम तेरे ख्वाहिशों के शह्र मेंआयेगा कुछ न काम तेरे ख्वाहिशों के…See More
3 hours ago
Neelam Dixit posted a blog post

गीत- नेह बदरिया नीर नदी बन

नेह बदरिया नीर नदी बनआंखों आंखों स्वप्न सधे हैंकाजल की काली रेखाएंसरिता पर ज्यूँ बांध बांधें हैं।नख…See More
3 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

छत पे आने की कहो- ग़ज़ल

मापनी २१२२ २१२२ २१२२ २१२ इस जिग़र में प्यास बाकी है बुझाने की कहो, झूमती काली घटा से छत पे आने की…See More
3 hours ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post उरिझै कवनेउ मंद
"हार्दिक धन्यवाद डा0 प्राची सिंह जी, मुझे मालूम है कि मैं इसे बेहतर लिख सकती थी । मैंने इसको केवल…"
13 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on Neeta Tayal's blog post कोरोना और सावन
"प्रिय नीता ये मंच साहित्य का गुरुकुल है, ऐसा अप्रतिम गुरुकुल जहाँ सब एक दूसरे को पढ़ते हुए ,…"
13 hours ago
Neeta Tayal commented on Neeta Tayal's blog post कोरोना और सावन
"बहुत बहुत आभार सखी, तुम्हारे गाइडेंस में मुझे बहुत सीखना है"
14 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on Vinay Prakash Tiwari (VP)'s blog post कामोदसामन्त : विनय प्रकाश
"आ० विनय जी सुन्दर द्विपदियाँ कही हैं आपने भाव बहुत प्यारे है लेकन शब्दों में थोड़ी…"
16 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on Usha Awasthi's blog post उरिझै कवनेउ मंद
"अहा ! आनंदित करता दोहा प्रयास बहुत सुन्दर शिल्प कहीं कहीं कमज़ोर रह गया,, सतत अभ्यास…"
16 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on Neeta Tayal's blog post कोरोना और सावन
"प्रिय सखी नीता तुम्हारा मंच पर तुम्हारी पहली रचना के साथ बहुत बहुत स्वागत है आंचलिक शैली…"
17 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service