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दो घनाक्षरियां / संदीप कुमार पटेल

(1)

सुनो मृगनयनी है चाँद जैसा मुख इसे,

ओढनी ओढ़ा के आज, थोडा शरमाइए

घूरते क्यूँ हमें ऐसे, मैं हूँ जानवर जैसे

लोग सब देख रहे, नज़रें हटाइए

ऐसे ही खड़ी हो काहे, गघरी झुलात कहो

प्रेम है यदि तो फिर, उसे न छुपाइए

और यदि है नहीं तो, काम एक कीजिए जी

मुझे घूरने से अच्छा, नीर भर लाइए । 

(2)

मिले कल नेता जी तो , पूछ लिया हमने ये

कद्दू जैसी तोंद का ये, राज तो बताइए

दुबले थे आप कुर्सी मिलने से पहले तो

हुआ ये कमाल कैसे,…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on April 16, 2013 at 12:30pm — 14 Comments

.!!!.जय जय बजरंगबली !!!

दुर्मिल सवैया..........!!!.जय जय बजरंगबली !!!



बजरंगबली सुख शांति मिले, जय राम कहे हरि प्रीति बढ़े।

मन प्रेम रसे अति धीर धरे, उर राम बसे नहि होत बड़े।।

हनुमान कहे मन मान सधे, हम बालक हैं गुन गान अड़े।

सुर रीति सजे नवनीत गहे, हम दीन बड़े अति हीन मढ़े।।1

तुम दीन दयाल सुभाय भली, दर आय सभी सुख पाय चली।

रघुवीर सदा सिर हाथ रखीं, हिय छाप धरीं तन राम कली।।

तुम भूत पिचास भगाय हॅसी, सिय मातु सुजान अशीष फली।

तुम दानव काल समेट सभी, तुम शेषहि वीर जगाय…

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Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 16, 2013 at 7:57am — 13 Comments

बहन हमारी

छोटी बहन को सहृदय समर्पित ,



हमेशा खुश रहो , इसी कामना के साथ ,

बहन हमारी ,…

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Added by अशोक कत्याल "अश्क" on April 16, 2013 at 7:30am — 13 Comments

मेरा राम आयेगा

मेरा राम आयेगा

नित्य मुँह अंधेरे फूल चुन चुन

गली आंगन थी रही सजा,

एक आस एक चाह लिये

कही शबरी - '' मेरा राम आएगा ''.

शाम ढल जाती सूरज थकता

देकर अंतिम किरण जाता,

एक अटूट विश्वास बढ़ाता,

कहती शबरी - '' मेरा राम आएगा ''.

बचपन गया , जवानी बीती

पलक बिछाए राह निहारती,

प्रौढ़ा दिनभर मगन रहती

कहती शबरी - '' मेरा राम आएगा ''.

वन उपवन भी थक चले

बोले ' तू बूढ़ी हो गयी , जा

कहीं विश्राम कर , छोड़ ये जिद्द '

शबरी बोली -…

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Added by coontee mukerji on April 16, 2013 at 2:35am — 11 Comments

प्रेम

ये प्रेम मिलन का गीत नहीं,
विरह का विवशता-गान सही।
आज तुम मेरे मन के मीत नहीं,
तो प्राणों से बिछुड़ी जान सही।
ये नयन तुम्हारी छवि के दर्पण,
तुम नहीं तो अश्रु का स्थान सही।
ये मन तुम्हारी स्मृतियों का आँगन,
तुम नहीं तो पीड़ा का श्मशान सही।
चाहा था तुमसे मैंने केवल गहन प्रेम,
यदि नही तो उपेक्षा और अपमान सही।
'सावित्री राठौर'
[मौलिक और अप्रकाशित]

Added by Savitri Rathore on April 15, 2013 at 10:52pm — 10 Comments

भविष्य की कल्पना....हास्य व व्यंग

मैने पूछा-

बाबा

आप किस प्रांत से

आए हो

ये शक्तीमान जैसी

ड्रेस

किस दर्जी से

सिलवाये हो



उत्तर मिला-



उम्र से

दो सौ सत्तासी हूँ

नाम न्युटन

मंगल ग्रह का

वासी हूँ



मैने कहा- बाबा

अब कुछ परदा

हटा दीजिए

अपने ग्रह के

बारे मे

कुछ बता दीजिए



उन्होने कहा- बेटा



यहाँ और वहाँ मे

काफी अंतर है

यहाँ टोना टटका

तो

वहाँ छू मन्तर है



प्लेन की स्पीड… Continue

Added by manoj shukla on April 15, 2013 at 9:04pm — 21 Comments

हिस्सा

माथुर साहब बड़े सुलझे हुए आदमी है ।जीवन की संध्या में वे आगे की सोच रखते हैं । इसलिए उन्होंने उनके बाद उनके मकान के बंटवारे के लिए अपने दोनों बेटों और बेटी को बुला कर बात करने की सोची ताकि उनके दिल में क्या है ये जान सकें । 
 
बेटों ने सुनते ही कहा पापा आप जो भी निर्णय करेंगे हमें मंजूर होगा । लेकिन बेटी ने सुनते ही कहा हाँ पापा मुझे इस मकान में हिस्सा चाहिए ।माथुर साहब और उनके दोनों बेटे चौंक गए । माथुर साहब की बेटी की शादी बहुत बड़े…
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Added by Kavita Verma on April 15, 2013 at 9:00pm — 8 Comments

माँ तुझे प्रणाम

  माँ तुझे प्रणाम

 

धरती सी सहनशील

हिमालय सी शालीन

जीवन का द्वार

स्नेह की बौछार

बस दुलार ही दुलार

ममता का साकार रूप

प्रभात की पहली धूप

प्रारब्ध के पुण्य का फल

पहली साँस महसूस कराने वाली

अंगुल पकड़ चलाने वाली

पहली शिक्षा देने वाली

सबसे पहले आंसू पोंछने वाली

आत्मविश्वास जगाने वाली

जो सब है मेरे पास

उसी का दिया है अहसास

मेरी ख़ुशी मे मुझसे ज्यादा ख़ुश

मेरे गम में मुझसे…

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Added by vijayashree on April 15, 2013 at 8:07pm — 19 Comments

आपको धोखा हुआ होगा

महंगाई ने  कमर तोड़ दी, बेरोजगारी ज़िन्दगी लील गयी होगी

जनता के सेवक हो ,पर मदद की उम्मीद, आपसे करेंगे,आपको धोखा हुआ होगा



चारा खा गया, कोयले खिला रहा होगा, खेल खेल में खेल कर गया होगा

वो वफादार  देश के लिए मर मिटेगा ,आपको धोखा हुआ होगा



जनता का सेवक हूँ जी जान लगा दूंगा , गिडगिडा  रहा होगा…

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Added by Dr Dilip Mittal on April 15, 2013 at 6:33pm — 7 Comments

दुम

(दशकों पहले आदिल लुख्नवी की एक रचना ‘दुम’ पढने में आयी थी, उससे प्रेरित हो कर 1986 में ये रचना की. वैसे आदिल जी की रचना भी अंतर्जाल पर उपलब्ध है. आशा है, सुधी जनो को ये प्रयास भी नाकारा तो नहीं लगेगा. ये भी मेरे पूर्व प्रस्तुतियों की भांति अप्रकाशित रचना है)

दुम

कुदरत की नायाब कारीगरी है…

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Added by डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा on April 15, 2013 at 6:30pm — 9 Comments

ठंडी हवा हर पेड़ की

हिन्दी गजल...

 

गर्मियों की शान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

धूप में वरदान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

 

हर पथिक हारा थका, पाता यहाँ विश्राम है,

भेद से अंजान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

 

नीम, पीपल, हो या वट, रखते हरा संसार को,

मोहिनी,  मृदु-गान  है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

 

हाँफते विहगों की प्यारी, नीड़ इनकी डालियाँ,

और इनकी जान है, ठंडी हवा हर पेड़ की।

 

रुख बदलती है मगर, रूठे नहीं मुख मोड़कर,

सृष्टि का…

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Added by कल्पना रामानी on April 15, 2013 at 5:30pm — 28 Comments

धड़कन !

जिसे हमने देवता माना , सरेआम डूबा डाला |
जवानी जिस पर लूटा दिया , छोड़ शादी रचा डाला |
दिल से जिसको पूजा हमने , हमें मिट्टी बना  डाला |
कसमें वादों की…
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Added by Shyam Narain Verma on April 15, 2013 at 3:00pm — 7 Comments

मुझे घर ले चलो बापू ,

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी को समर्पित ,

 

ये रचना लगभग २५ बर्ष पूर्व लिखी गयी ,

जो आज भी प्रासंगिक है |…



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Added by अशोक कत्याल "अश्क" on April 15, 2013 at 2:00pm — 11 Comments

मोरे अँगना मे फूल खिलो आज

मोरे अँगना मे फूल खिलो आज 

री गोरी मोरे ...............आज

मुख लागे है चंद चकोरा

कोमल कोमल तन है गोरा

लोचन लागे हैं अभिरामा

सोचूँ का दैइ हों मैं नामा

नाचे मनवा हमारो छेड़ साज़

मोरे अँगना मे फूल खिलो आज

खिल खिल हँसता देखे हमको

चितवन खूब लुभावे सबको

देखत कौन अघाय छवि को

दिन में धूल चटाय रवि को

करे बगिया खुदी पे आज नाज़

मोरे अँगना मे फूल खिलो आज

सोचूँ जियरा भींच भींच…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on April 15, 2013 at 1:32pm — 12 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
सखी री मोरे अंगना में धूप खिली आज

सखी री मोरे अंगना में धूप  खिली आज 

मन की प्रणय पाती साजन को मिली आज 

हुआ यकायक मुझे अंदेशा 

भेजा उसने कोई संदेशा 

नेह नीर बिना  शुष्क हुई थी 

देह प्रीत बिना  रुष्ट हुई थी 

लिपट पवन  संग  हिय तरु की डारि  हिली आज 

सखी री मोरे अंगना में धूप  खिली आज 

आह्लादित  मन लहका- लहका

प्रीत  उपवन  है   महका- महका  

मिले गले जब भ्रमर औ कलिका   

हया दीप संग  जलती   अलिका    

विरहाग्नि से हुई विक्षत चुनरिया…

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Added by rajesh kumari on April 15, 2013 at 11:54am — 33 Comments

जिन्दगी का जबाब

जिन्दगी का जबाब

कल राह मे जिन्दगी से मुलाकात हो गयी ।

पूछा जो एक सवाल* तो जिन्दगी नाराज हो गयी।   

बोली देता है मुझको दोष, बता तुने क्या अच्छा किया है…

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Added by बसंत नेमा on April 15, 2013 at 10:30am — 8 Comments

!!! सत्यम शिवम सुन्दरम !!!

!!! सत्यम शिवम सुन्दरम !!!

हे शिव जय शिव, हर शिव कर शिव।

जल शिव नभ शिव, थल शिव नर शिव।।

अनल शमन शिव, भवम शवम शिव।

ज्योतिर्मय शिव, तिमिर जगत शिव।।

अखिल पवन शिव, धवल चन्द्र शिव।

महिमा शिव शिव, गरिमा शिव शिव।।

महा समर शिव, अजर अमर शिव।

कन कन शिव शिव, आत्मा शिव शिव।।

मसान घर शिव, मन्दिर हिम शिव।

हरिजन शिव शिव, हरि भज शिव शिव।।

सकल जगत शिव, समरथ है शिव।

मैं भी शिव शिव, तू भी शिव शिव।।

भजन सुजन शिव, भगत भुतन शिव।

कह जन शिव शिव, सुन…

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Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 15, 2013 at 8:44am — 26 Comments

आधी अधूरी सी ये ज़िन्दगी

तमन्नाओं से भरी हुई  

जिज्ञासाओ को छुती हुई 

पल की खबर नही 

ठूंठ की तरह खड़ी हुई

आज का पता नही

कल का ठिकाना नही

चल रही बेबाक सी 

किसी का खौफ नही

बनती बिगड़ती फिर सवंरती

कैसी खोखली ये ज़िन्दगी 

आगे दौड़ने की होड़ में रह गई पीछे 

ताश के पत्तों सी बिखरी हुई …

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Added by Aarti Sharma on April 15, 2013 at 12:00am — 15 Comments

!!! सत्ता का सार !!!

!!! सत्ता का सार !!!

सत्ता - सुशासन - सरकार

पेट्रोल - डीजल- गैस की मार

दर्द क्यों हम इसका झेलें

जिसके तन में हों पहिये चार

नेताओं की चलती है कार

काला - धन और भ्रस्टाचार

टूट - फूट और मरम्मत का कार्य

बस थोड़ा सा दंगा

और नर -संहार

उनकी कार में खूनी पेट्रोल

व्यभिचारी डीजल का शोर

बलात्कारी से हूटर चीखते

मंहगाई का पूरा काफिला ही संग चलता

ए.सी. ट्रेन - प्लेन का सुख

लेतें हैं चमचा- चापलूस- गद्दार

इनके पूत पालने में…

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Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 14, 2013 at 10:42pm — 20 Comments

कौन मजबूत? कौन कमजोर ?

इम्तिहान

एक दौर

चलता है जीवन भर !

सफलता

पाता है कोई

कभी थम जाये सफ़र !

कमजोर

का साथ

देना सीखा,

ज़रुरत

मदद की

उसे ही रहती .

सदा साथ

नर का

देती रही ,

साया बन

संग उसके

खड़ी है रही ,

परीक्षा की घडी

आये पुरुष की

नारी बन सहायक

सफलता दिलाती…

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Added by shalini kaushik on April 14, 2013 at 8:30pm — 17 Comments

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