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जिन्दगी का जबाब

कल राह मे जिन्दगी से मुलाकात हो गयी ।

पूछा जो एक सवाल* तो जिन्दगी नाराज हो गयी।   

बोली देता है मुझको दोष, बता तुने क्या अच्छा किया है ।

मै तो हू आसान जीना, अपना तुने खुद मुहाल किया है ।

लोभ मोह लालच के भँवर मे तुने , खुद को फँसा लिया है ।

चादर से ज्यादा तुने खुद, उम्मीदो को फैला दिया है ।

मै तो हू आसान जीना, अपना तुने खुद मुहाल किया है ।

कही स्वार्थ के झुले मे झूला, कही संस्कार मर्यादा भूला ।

भूल गया तू परम्परा  सारी, आधुनिकता ने तेरी मति है मारी ।

जीयो और जीने दो का, मंत्र तुने भूला दिया है  ।

मै तो हू आसान जीना, अपना तुने खुद मुहाल किया है ।

रीति रिवाजो को तुने भुलाया, माया को अपना धरम बनाया ।

कही ईषा की आग मे जलता, कही अहँकार बस क्रोध मे मरता ।

खुद तूने ही अपना जीवन , पतन की खाई मे धकेल दिया है

मै तो हू आसान जीना, अपना तुने खुद मुहाल किया है ।

 "मौलिक व अप्रकाशित"

 

* जिन्दगी तू उतनी आसान नही है , जितनी की लोगो से तेरी चर्चा सुनी है ?

 

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Comment

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Comment by Vindu Babu on April 16, 2013 at 10:33pm
जिन्दगी का यथार्थ चित्रण।
लय की दृष्टि से रचना को फिर से पढ लें आदरणीय नेमा जी।
Comment by राजेश 'मृदु' on April 16, 2013 at 5:51pm

रचना के मूल भाव से पूरी तरह सहमत हूं, सादर

Comment by बसंत नेमा on April 16, 2013 at 12:48pm

श्री गनेश सर , श्री प्रदीप जी , आ. प्राची दीदी , श्री योगी जी श्री राम शिरोमणी जी . रचना पसन्द आई उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद ... 

Comment by Yogi Saraswat on April 16, 2013 at 11:01am

कही स्वार्थ के झुले मे झूला, कही संस्कार मर्यादा भूला ।

भूल गया तू परम्परा  सारी, आधुनिकता ने तेरी मति है मारी ।

जीयो और जीने दो का, मंत्र तुने भूला दिया है  ।

मै तो हू आसान जीना, अपना तुने खुद मुहाल किया है ।

जिंदगी को अलग अलग लोग अलग अलग तरीके से परिभाषित  हैं ! बहुत सार्थक और सुन्दर बात कही है आपने


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 16, 2013 at 9:47am

ऐ जिन्दगी गले लगा ले ...रचना पर और समय चाहिए था आदरणीय बसंत नेमा जी । बधाई इस प्रस्तुति पर । 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 16, 2013 at 9:41am

ज़िंदगी से सार्थक वार्तालाप...

बधाई आ० बसंत नेमा जी 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 15, 2013 at 4:31pm

अपने ही जाल में घिरा मानव..वाह 

बधाई.

Comment by ram shiromani pathak on April 15, 2013 at 3:09pm

 आदरणीय  बहुत सुन्दर  हार्दिक बधाई

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