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अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on Kewal Prasad's blog post !!! गजल !!!
अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on Kedia Chhirag's blog post करें इश्क और रखें फिर भी दिल पे काबू ,क्या कहें
अरुन शर्मा 'अनन्त' replied to Neeraj Mishra's discussion कविता के भाव पर व्याकरण की तलवार क्यों
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अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on Raj Kumar Jindal's blog post अतुलनीय माँ।
अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on POOJA AGARWAL's blog post फेरीवाला
अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on Abhinav Arun's blog post ग़ज़ल - मंडी से आढ़त तक सबकी पर्ची कटी हुई !
अरुन शर्मा 'अनन्त' replied to बृजेश नीरज's discussion लखनऊ चैप्टर का उदघाटन: एक रिपोर्ट
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अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on aditya chaturvedi's blog post हास्य कविता
अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on सतवीर वर्मा 'बिरकाळी''s blog post माँ
अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on SANDEEP KUMAR PATEL's blog post ग़ज़ल "बह रही गंगा अजल से पापियों के वास्ते"
अरुन शर्मा 'अनन्त' commented on Admin's group सुझाव एवं शिकायत
अरुन शर्मा 'अनन्त' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26 in the group चित्र से काव्य तकPosted on May 9, 2013 at 12:00pm 12 Comments 0 Likes
बह्र : मुतकारिब मुसम्मन सालिम
चोरी घोटाला और काली कमाई,
गुनाहों के दरिया में दुनिया डुबाई,
निगाहों में रखने लगे लोग खंजर,
पिशाचों ने मानव की चमड़ी चढ़ाई,
दिनों रात उसका ही छप्पर चुआ है,
गगनचुम्बी जिसने इमारत बनाई,
कपूतों की संख्या बढ़ेगी जमीं पे,
कि माता कुमाता अगर हो न पाई,
हमेशा से सबको ये कानून देता,
हिरासत-मुकदमा-ब-इज्जत रिहाई,
गली मोड़ नुक्कड़ पे लाखों…
ContinuePosted on April 28, 2013 at 4:17pm 16 Comments 2 Likes
बह्र : रमल मुसम्मन सालिम
वक्त ने करवट बदल ली जो अँधेरा छा गया,
आसमां की सैर करने चाँद चलकर आ गया,
प्यार के इस खेल में मकसद छुपा कुछ और था,
बोल कर दो बोल मीठे जुल्म दिल पे ढा गया,
बाढ़ यूँ ख्वाबों की आई है जमीं पर नींद की,
चैन तक अपनी निगाहों का जमाना खा गया,
झूठ का बाज़ार है सच बोलना बेकार है,
झूठ की आदत पड़ी है झूठ मन को भा गया,
तालियों की गडगडाहट संग बाजी सीटियाँ,
देश का नेता हमारा…
ContinuePosted on April 22, 2013 at 11:21am 25 Comments 0 Likes
आदरणीय गुरुजनों, अग्रजों, मित्रों एवं प्रिय पाठकों आप सभी को सादर प्रणाम. भौंरा और फूल पर आधारित उनके मिलन एवं विरह पर एक कविता लिखने का छोटा सा प्रयास किया है, आशा है आप सभी को पसंद आएगा.
रसिक लाल = भौंरे का नाम
मैं शुष्क धरा, तुम नम बदली.
मैं रसिक लाल, तुम फूलकली.
तुम मीठे रस की मलिका हो,
मैं प्रेमी थोड़ा पागल हूँ.
तुम मंद - मंद मुस्काती हो,
मैं होता रहता घायल हूँ.
मेरा तन काला,…
ContinuePosted on April 10, 2013 at 5:06pm 11 Comments 0 Likes
पढ़ लिख कर आगे बढ़ें, बनें नेक इन्सान ।
अच्छी शिक्षा जो मिले, बच्चें भरें उड़ान ।।
बच्चे कोमल फूल से, बच्चे हैं मासूम ।
सुमन की भांति खिल उठें, बनो धूप लो चूम ।।
देखो बच्चों प्रेम ही, जीवन का आधार ।
सज्जन को सज्जन करे, सज्जन का व्यवहार ।।…
यशोदा दिग्विजय अग्रवाल said… आभार
अभिनन्दन
Jyotirmai Pant said… Aap ka sawgat hai . sakriy sadasy chune jane par hardik badhai sweekar karen .
Sarita Sinha said… महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई अरुण जी..
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said… प्रिय अनंत जी माह के सक्रिय सदस्य चुने जाने पर बधाई ...आप की ये साहित्यिक यात्रा यों ही अनंत की तरफ अग्रसारित होती रहे शुभ कामनाएं
Abhinav Arun said… श्री अरुण जी माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई !! आपकी लेखनी और साथ ही ओ बी ओ के विभिन्न आयोजनों में आपकी क्रियाशील गतिविधियाँ प्रेरक हैं !!! आप उतरोत्तर विकास करें यही शुभकामना है !!

अरुण भाई महीने का सक्रीय सदस्य चुने जाने पर आपको ढेरम ढेर बधाई
इसी तरह मंच को बल प्रदान करते रहिये ............जय हो
Aarti Sharma said… आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर हार्दिक शुभकामनाएं अरुण जी....

आदरणीय अरुण शर्मा अनंत जी
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करे | कृपया अपना पता और नाम (जिस नाम से ड्राफ्ट/चेक निर्गत होगा), बैंक खता विवरणी एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका प्यार इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said… मित्रता हेतु आभार . सादर
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said… जन्म दिन पर हार्दिक शुभ कामनाएं स्वीकार करें
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा,रचना शीघ्र अनुमोदित कराने हेतु रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिख दें । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह liked Abhinav Arun's blog post ग़ज़ल - मछलियाँ तय्यार हैं जारों में पलने के लिए !
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Jitendra Pastariya commented on Sonam Saini's blog post आज हमे दोनों वक़्त खाना मिल जायेगा
वीनस केसरी commented on Kewal Prasad's blog post !!! गजल !!!
Raj Kumar Jindal commented on Raj Kumar Jindal's blog post अतुलनीय माँ।
Jitendra Pastariya commented on Neeraj Mishra's blog post जब दर्द गुजरता हो दिल से [नज़्म]
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Neeraj Mishra commented on Neeraj Mishra's blog post जब दर्द गुजरता हो दिल से [नज़्म]
Priyanka singh commented on Priyanka singh's blog post आओ फिर बटवारा कर लो......© 2013 Created by Admin.
महत्वपूर्ण लिंक्स :- ग़ज़ल की कक्षा ग़ज़ल की बातें ग़ज़ल से सम्बंधित शब्द और उनके अर्थ रदीफ़ काफ़िया बहर परिचय और मात्रा गणना बहर के भेद व तकतीअ
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