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'ग़ालिब'की ज़मीन में एक ग़ज़ल

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फाइलुन

दूर कितनी शादमानी और है
कुछ दिनों की जाँ फिशानी और है

मेरे फ़न की दाद सबने दी मुझे
आपकी बस क़द्रदानी और है

हो चुकीं सब मौत की तैयारियाँ
दोस्तों की नोहा ख़्वानी और है

है ख़बर सबको बहादुर वो नहीं
उसकी वज्ह-ए-कामरानी और है

दास्तान-ए-इश्क़ तो तुम सुन चुके
ज़िन्दगानी की कहानी और है

दोस्तों से तो मुआफ़ी मिल गई
मुझको ख़ुद से सरगरानी और है

लग रहा है उनकी बातों से "समर"
उनके दिल में बदगुमानी और है
---
शादमानी-ख़ुशी
जाँ फिशानी-कोशिश
नोहा ख़्वानी-रोना पीटना,मातम करना
कामरानी-जीत
सरगरानी-नाराज़गी
समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment

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Comment by SALIM RAZA REWA on October 24, 2017 at 1:02pm
जनाब समर साहब,
ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई है.
Comment by जयनित कुमार मेहता on October 24, 2017 at 12:40pm
बहुत ही ख़ूबसूरत अशआर से सजी हुई क़माल की ग़ज़ल हुई है आदरणीय समर कबीर जी। आपकी रचना पर ज़ियादा क्या कहूँ, आप तो हमारे मार्गदर्शक, गुरु और आदर्श है। हार्दिक बधाई आपको।।
Comment by Mahendra Kumar on October 23, 2017 at 10:38pm

कमाल की ग़ज़ल है आ. समर सर. दिल से ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए.

हो चुकीं सब मौत की तैयारियाँ
दोस्तों की नोहा ख़्वानी और है

दास्तान-ए-इश्क़ तो तुम सुन चुके
ज़िन्दगानी की कहानी और है

इन दो अशआर पर अलग से दाद. सादर.

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 7:07pm

वाह्ह्ह्ह वाह्ह्ह्ह बहुत शानदार ग़ज़ल हुई भाई जी क्या कहने 

दास्तान-ए-इश्क़ तो तुम सुन चुके
ज़िन्दगानी की कहानी और है----वाह्ह्ह्ह 

दोस्तों से तो मुआफ़ी मिल गई
मुझको ख़ुद से सरगरानी और है---गज़ब 

शेर दर शेर मुबारकबाद क़ुबूल करें भाई जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on October 23, 2017 at 4:12pm

वाह वा,,आ. समर सर .. कमाल ग़ज़ल हुई है ..
.
बहुत बहुत बधाई 

Comment by Ajay Tiwari on October 23, 2017 at 1:28pm

आदरणीय समर साहब,

बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है. इसमें एक व्यक्तिगत स्पर्श है जो बहुत प्रभावी है. 

हार्दिक बधाईयाँ.

सादर  

Comment by नाथ सोनांचली on October 23, 2017 at 8:45am
है ख़बर सबको बहादुर वो नहीं
उसकी वज्ह-ए-कामरानी और है
दास्तान-ए-इश्क़ तो तुम सुन चुके
ज़िन्दगानी की कहानी और है

वआह वाह वाह,
आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम। बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही आपने, लब्ज़ नही पास मेरे की तारीफ के लिए। बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल पर। बहुत खूब।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 22, 2017 at 9:13pm
आदरणीय समर सर आपकी रचना से हमेशा की तरह बहत कुछ सीखने को मिला है हमेशा की तरह शानदार एक और रचना मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर प्रणाम के साथ
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 22, 2017 at 8:29pm

हो चुकीं सब मौत की तैयारियाँ
दोस्तों की नोहा ख़्वानी और है | बहुत खूब आदरणीय समर भाई जी आदाब , बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने हर शे'र लाजवाब है पर मुझे यह शे'र ज्यादा पसंद आया | सादर |

Comment by Mohammed Arif on October 22, 2017 at 8:06pm
हो चुकीं सब मौत की तैयारियाँ
दोस्तों की नोहा ख़्वानी और है । वाह! वाह!! बहुत साहस चाहिए ऐसा शे'र कहने के लिए ।
हर शे'र लाजवाब है । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब ।

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