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गजल : तुम्हारे प्यार का सिर पर अगर आंचल नहीं होगा//शकील जमशेदपुरी//

बह्र : 1222/1222/1222/1222

तुम्हारे प्यार का सिर पर अगर आंचल नहीं होगा
मेरे जीवन में खुशियों का तो फिर बादल नहीं होगा

यकीनन कुछ न कुछ तो बात है तेरी अदाओं में
ये दिल यूं ही तुम्हारे प्यार में पागल नहीं होगा

तुम्हें कुछ दे न पाऊंगा मगर धोखा नहीं दूंगा
मेरी सोहबत में आ जाओ यहां पर छल नहीं होगा

कलम खूं में डुबोकर मैं गजल के शेर लिखता हूं
सियाही से लिखूंगा तो कोई घायल नहीं होगा

तेरी आंखों में काजल और आंसू दोनों फबते हैं
मुसीबत यह है रो दोगी तो फिर काजल नहीं होगा

तू मेरा दोस्त है लेकिन बताकर फायदा क्या है
मुहब्बत का ये मसला है ये तुझसे हल नहीं होगा

मेरे अशआर में होंगी यकीनन खूबियां कुछ तो
जमाना मेरी गजलों का यूं ही कायल नहीं होगा

-शकील जमशेदपुरी
_________________________

*मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by atul kushwah on January 8, 2015 at 10:15pm

आदरणीय शकील भाई, गजल का मतला ही पढकर डूब गया, वाकी के शेर तो कहने ही क्या। दो शेर खासतौर से मुझे बेहद पसंद आए, माफ करें वैसे शेर सभी शानदार हैं,....
यकीनन कुछ न कुछ तो बात है तेरी अदाओं में
ये दिल यूं ही तुम्हारे प्यार में पागल नहीं होगा।।

कलम खूं में डुबोकर मैं गजल के शेर लिखता हूं,
सियाही से लिखूंगा तो कोई घायल नहीं होगा।।
             .......वाह—वाह शकील भाई वाह, क्या गजल कही है। 
- तेरी आंखों में काजल और आंसू दोनों फबते हैं,
मुसीबत यह है रो दोगी तो फिर काजल नहीं होगा।। बहुत शुभकामनाएं आपको
                             सादर— अतुल


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 27, 2014 at 5:29pm

तेरी आंखों में काजल और आंसू दोनों फबते हैं
मुसीबत यह है रो दोगी तो फिर काजल नहीं होगा..................बहुत खूब !

सुन्दर अशआर कहे हैं 

हार्दिक बधाई 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 26, 2014 at 2:47pm

आदरणीय शकील जी ..बेहतरीन ख्यालों वाले इन अशारो से सजी इस काबिले तारीफ ग़ज़ल के लिए तहे दिल बधाई सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 23, 2014 at 11:19pm

मेरे अशआर में होंगी यकीनन खूबियां कुछ तो
जमाना मेरी गजलों का यूं ही कायल नहीं होगा.

बात सही है..

आपकी ग़ज़लों से उम्मीद अधिक होती है.. शुभ-शुभ

Comment by कल्पना रामानी on May 22, 2014 at 8:31pm

बहुत शानदार गजल कही है आपने आदरणीय शकील जी, दिल से बधाई स्वीकार कीजिये


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on May 21, 2014 at 10:43am

कलम खूं में डुबोकर मैं गजल के शेर लिखता हूं

सियाही से लिखूंगा तो कोई घायल नहीं होगा

वाह !!!! बहुत खूब शकील भाई             बधाइयाँ.............................


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on May 20, 2014 at 9:41pm

//तेरी आंखों में काजल और आंसू दोनों फबते हैं
मुसीबत यह है रो दोगी तो फिर काजल नहीं होगा

मेरे अशआर में होंगी यकीनन खूबियां कुछ तो
जमाना मेरी गजलों का यूं ही कायल नहीं होगा//  वाह वाह शकील भाई क्या बात है


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 20, 2014 at 6:32pm

खूब सूरत गज़ल कही है शकील भाई , दिली दाद कुबूल करें ॥

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 20, 2014 at 5:31pm

यकीनन खूबिया  है तेरे शेर में  ऐ दोस्त

Comment by vijay nikore on May 20, 2014 at 11:40am

बहुत ही अच्छे खयाल हैं। बधाई, आदरणीय।

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