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वो शह्र-ए-दिल सदा के लिए छोड़ क्या गया

बह्र-221/2121/1221/212

वो शह्र-ए-दिल सदा के लिए छोड़ क्या गया
आँखों से मेरी प्यार का मौसम चला गया[1]

उसको ख़बर थी ख़ौफ़ मुझे तीरगी से है
जलते हुए चराग़ तभी तो बुझा गया[2]

आँखों में था मलाल वो रुख़सत हुआ था जब
मुड़ मुड़ के दूर तक वो मुझे देखता गया[3]

आँखों में जिसकी 'मीत' में रहता था रात दिन
मुझको वो आज अपनी नज़र से गिरा गया[4]

रूपम कुमार 'मीत'

"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by Rupam kumar -'मीत' on July 10, 2020 at 7:18pm

आदरणीय रवि साहब, सादर प्रणाम आपकी इस्लाह बहुत कमल की होती है, का का दोष समझ आया मुझे, पहला मिस्र वर्तमान काल में लिख कर दूसरा भूत काल में कर दिया यह सिर्फ एक जानने वाला ही कर सकता है,। इस शेर पर भी जरा रोशनी डालिये, सर्

तुम किस जतन से रो रहे हो अब अज़ाब में

इक रोज़ रात को मेरे ख़्वाबों में आ गया

221 2121 1221 212

इस शेर में मैं यह कहना चाहता हूँ, वो बहुत परेशान है और रो रही है जो मुझे पता चला ख़्वाब के जरिये से मेरे ख़्वाब में आया कि वो बहुत जतन से रो रही है। यह ख़याल है सर्,

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on July 10, 2020 at 5:48pm

आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' भाई, ग़ज़ल का प्रयास बहुत अच्छा हुआ है। आपको कुछ सुझाव देना चाहता हूँ, अगर उचित लगें तो रखियेगा, और अगर पसंद न आएँ तो दरगुज़र कर दीजियेगा।

पहले शे'र में "सदा" के स्थान पर "सदा के लिए" ज़ियादा उचित होगा।
221 / 2121 / 1221 / 212
वो शह्र-ए-दिल सदा के लिए छोड़ क्या गया
आँखों से मेरी प्यार का मौसम चला गया [1]

दूसरे शे'र का भाव स्पष्ट नहीं है, इसे दोबारा देखिएगा।

तीसरे शे'र के लिए सुझाव (इसे मक़्ता बना सकते हैं):
221 / 2121 / 1221 / 212
आँखों में जिसकी 'मीत' मैं रहता था रात दिन
मुझ को वो आज अपनी नज़र से गिरा गया [3]

चौथे शेर के ऊला के लिए सुझाव:
उसको ख़बर थी ख़ौफ़ मुझे तीरगी से है

पाँचवें शेर में काल दोष है, इसके लिए मशवरा:
221 / 2121 / 1221 / 212
आँखों में था मलाल वो रुख़सत हुआ था जब
मुड़ मुड़ के दूर तक वो मुझे देखता गया

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