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दोहे

अहंकार है जड़ प्रकृति, स: ह्वै चेतन सार!

हंसा बूझि अस मूढ़मति, ज्ञानी भए भव पार!!

 

द्युलोक मा व्यापक रहत,आदित तैजस रूप!

बसुधा धारत अनल सत,वायु शून्‍य इक भूप!!

 

आदित्य सोसत सागर, गुरुत्व शून्य अस भाए!

बादल डाले  वीर्य रस, धरा उपज अति पाए!

विश्वान इक गर्भ सृजक, चेतन रहा डोलाए!!

षट घन घना कुंभ विकृत,सत जागत सुख पाए!!

 

हंस उड़त एक पाद से,इक जलाशय रहि जाए!

कर्म  पाश रस  चाहना, फिरै  सरोवर …

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Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 10, 2013 at 12:31pm — 2 Comments

पाँच क्षणिकाएँ

(१) ज्वलंत प्रश्न

जब फलदार वृक्ष ही

बन जाएं नरभक्षी,

चूसने लगें रक्त,

तब क्या करे पथिक,

किधर ढूँढे छाँव, शीतलता,

कहाँ करे विश्राम,

कैसे जुटाये भोजन

जेठ की तपती राहों में।

(२) एक घटना

सुबह कुछ फूल देखे थे,

आकार में बड़े-बड़े,

चटख रंगोंवाले, भड़कदार,

मन किया कि घर ले आऊँ,

जाँच की तो पाया

सारे के सारे जहरीले थे।

(३) कैसी…

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Added by कुमार गौरव अजीतेन्दु on March 10, 2013 at 11:46am — 8 Comments

मजबूरी क्यों खून के आंसू पीने की

जिनके लिये हिन्द प्राण से प्यारा था।

सत्य अहिंसा ही बस जिनका नारा था।

तैंतीस कोटि जनो का जो विश्वास था।

जिसमे होता देवों का आभाष था।

जिसने देखे स्वप्न राम के राज की।

उसी हिन्द की दशा हुई क्या आज की।

सत्य बैठ कोने मे सिसकी लेता है।…

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Added by आशीष यादव on March 10, 2013 at 10:30am — 7 Comments

दो भाई! – भाग-३

भाग 2 से आगे ..

खरीफ की फसल को तैयार कर अनाज को सहेजते और ठिकाने लगाते लगाते रब्बी की फसल भी तैयार होने लगती है. मसूर, चना, खेसारी, और मटर आदि के साथ सरसों, राई, तीसी आदि भी पकने लगते हैं, जिन्हें खेतों से काट कर खलिहान में लाया जाता है. इन सबके दानो/फलों को इनके डंटलों से अलग करने से पहले इन सबको पहले ठीक से सजाकर रखा जाता है, ताकि खलिहान के जगह का समुचित उपयोग हो. आम बोल-चाल की…

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Added by JAWAHAR LAL SINGH on March 10, 2013 at 7:30am — 4 Comments

स्वामी विवेकानंद की 150 वीं जन्म-शती के अवसर पर

 स वर्ष सारा राष्ट्र स्वामी विवेकानंद की 150 वीं जन्म-शती मना रहा है। स्वामी जी द्वारा दिया गया विचार-दर्शन युग-युगीन और शाश्वत है। उनकी दिव्य वाणी अमरता का महान् संदेश प्रदान कर रही है। स्वामीजी के दर्शन की आज भी उतनी ही प्रासंगिकता है जितनी विगत 20 वीं सदी में रही थी। मात्र 39…

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Added by prabhat kumar roy on March 10, 2013 at 7:00am — 4 Comments

महाशिवरात्रि पर विशेष : शिव पार्वती विवाह



शिव पार्वती विवाह (खण्ड-काव्य) सॆ कुछ छन्द

----------------------------------------------------------------

मत्तगयंद सवैया :-

================

शारद, शॆष, सुरॆश  दिनॆशहुँ,  ईश  कपीश गनॆश मनाऊँ ॥

पूजउँ राम सिया पद-पंकज, शीश गिरीश खगॆशहिं नाऊँ ॥

बंदउँ  चारहु  बॆद  भगीरथ, गंग  तरंगहिं  जाइ नहाऊँ ॥

मातु-पिता-गुरु आशिष…

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Added by कवि - राज बुन्दॆली on March 9, 2013 at 9:30pm — 31 Comments

नए ख्वाब खुद को दिखाने लगे हैं

 

नए ख्वाब खुद को दिखाने लगे हैं…

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Added by Pushyamitra Upadhyay on March 9, 2013 at 6:41pm — 6 Comments

गज़ल

चाहत के पंछी को जब उडाता हूँ

दर्दे -ए -दिल और  करीब पाता हूँ

घूम कर जब तक वो घर नहीं आता 

घर का दर हूँ कब चेन  पाता    हूँ

मैनें  मुस्करा  कर  हाथ बढाया 

 उस के अहं से क्यूँ  टकराता हूँ

तब मुझ को होने…

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Added by मोहन बेगोवाल on March 9, 2013 at 5:51pm — 6 Comments

महिला दिवस (बेटियाँ) दोहे

बेटी  ऐसी  बेल  है, ऊपर तक चढ़ जाय!

भले-बुरे संग खुश रहे,कभी न तोड़ा जाय!!

बेटी प्यारी दूब सी, नरम बिछौना जान!

गाट-गाट जोड़त रहे,खुशहाली की शान!!

बुलबुल कोकिल मैना सी,कूक रहे दिन-रात!

मात-पिता का अंतिम मन,बेटी घर ससुराल!!…

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Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 9, 2013 at 2:30pm — 4 Comments

जीवन धारा

जब मि . गुप्ता ने कैफे में प्रवेश किया तब मि . खान और मसंद का ठहाका उनके कानों में पड़ा। उन्हें देखकर मि .खान बोले " आओ भाई सुभाष आज देर कर दी।" मि . गुप्ता ने बैठते हुए कहा " अभी तक रघु नहीं आया, वो तो हमेशा सबसे पहले आ जाता है।" मि . मसंद बोले " हाँ हर बार सबसे पहले आता है और हमें देर से आने के लिए आँखें दिखाता है, आज आने दो उसे सब मिलकर उसकी क्लास लेंगे।" एक और संयुक्त ठहाका कैफे में गूंज उठा।

तीनों मित्र मि . मेहता का…

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Added by ASHISH KUMAAR TRIVEDI on March 9, 2013 at 12:46pm — 3 Comments

महिला दिवस जागरण (दोहे)

मौलिक एवम् अप्रकाशित रचना

महिला दाता प्रेम की, बना भिक्षुक नर जात !
माया ममता ना मरी, मरा अहम् बड़जात !!

दामिनी भारत की बेटी, कल्पना भरे उड़ान !
इंदिरा किरण वेदी चॅढी, सुनीता गगन शान!!

बच्चे अच्छे एक या दो, जीवन का श्रृंगार!
पढ़ते - पढ़ते ग्यान दे, बेटी को मत मार !!
(के.पी.सत्यम)

मौलिक एवम् अप्रकाशित रचना !

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 8, 2013 at 10:50pm — 4 Comments

आतंकवादी

जाने क्यों आजकल

जब भी

देखता / सुनता हूँ ख़बरें

तो धड़कते दिल से

यही सुनना चाहता हूँ

न हो किसी आतंकी घटना में

किसी मुसलमान का हाथ...

 

अभी जांच कार्यवाही हो रही होती है

कि आनन्-फानन

टी वी करने लगता घोषणाएं

कि फलां ब्लास्ट के पीछे है

मुस्लिम आतंकवादी संगठन...

 

बड़ी शर्मिंदगी होती है

बड़ी तकलीफ होती है

कि मैं भी तो एक मुसलमान हूँ

कि मेरे जैसे

अमन-पसंद मुसलमानों के बारे…

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Added by anwar suhail on March 8, 2013 at 9:11pm — 11 Comments

स्त्री -शक्ति सम्मान

खबर पढ़ी दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की शिकार पीडिता को मरणोपरांत "स्त्री -शक्ति सम्मान " से सम्मानित किया गया .मंत्रालय की मुहर लग गई। "उसे बहादुर बालिका" की उपाधि से सम्मानित किया गया।

मुझे जहाँ तक ज्ञात है सम्मान किसी  उपलब्धि पर दिया जाता है। इस केस में क्या उपलब्धि रही समझ नहीं आया। क्या उस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत हो गई कि भविष्य में ऐसी कोई घटना दोहराई  न जा सके? नहीं। फिर उसका गैंगरेप हुआ क्या यह उपलब्धि रही।? या तमाम सरकारी चिकित्सकीय सुविधाओं  को मुहैया कराने…

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Added by mrs manjari pandey on March 8, 2013 at 9:00pm — 10 Comments

महात्मा गाँधी मार्ग से कालीदास मार्ग तक

"महात्मा गाँधी मार्ग से कालीदास मार्ग तक"



भारत भ्रमण पर एक विदेशी,

जो था हिन्दी भाषा का प्रेमी!

एशो नज़ाकत का तहज़ीबी नगर!

'मुस्कराईए कि आप लखनऊ मे हैं'.

मन मे गुनता -गुनगुनाता -मुस्कराता;

खचाड़े रिक्शे का लुफ्त लेता,

गुजर रहा था अभी-

'महात्मा गाँधी मार्ग' से .

सहसा उसे नये टेम्पो पर पढ़ने को मिला-

'देखो मगर प्यार से'

वो कुछ बुदबुदाया फिर मुस्कुराया,

तभी अचानक पास से ही सनसनाती-सन्न से;

एक नयी नवेली ट्रक 'धन्नो'…

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Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 8, 2013 at 8:30pm — 4 Comments

हास्य व्यंग्य : महिला दिवस

हास्य व्यंग्य



आज के दिन यानि महिला दिवस के दिन,

महिला ने अपने पति की पिटाई,

पति ने थाने में शिकायत लगाई,

थानेदार ने महिला थाने में बुलवाई,

महिला थानेदार को देख घुरराई,…

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Added by rajinder sharma "raina" on March 8, 2013 at 7:00pm — 4 Comments

आज अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ...

मैं महिलाओं और बच्चियों को शुभकामना देती हूँ कि जरूर समाज में जल्दी ही एक साकारात्मक परिवर्तन आएगा, जब पुरुष महिला दो अलग इकाई नहीं बल्कि इस देश के और समाज के बराबर नागरिक होंगे, और घर में भी लड़की लड़के को बराबर दर्जा मिलेगा |

और उनके लिए शुभकामना सन्देश ---

 

वो खिले रहें फूलों की तरह…

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Added by डॉ नूतन डिमरी गैरोला on March 8, 2013 at 6:30pm — 4 Comments

नारी शक्ति है

            सृष्टि की महत्त्वपूर्ण रचना है नारी । यदि नारी नहीं होती तो आज हम इस सम्पूर्ण सृष्टि की कल्पना करने में भी असमर्थ होते । इस सृष्टि के विकास में नारी का महत्त्वपूर्ण योगदान है । वह मानव जीवन की संचालिका और मूलाधार है । मानव-जीवन उसके अनेक रूपों और उत्तरदायित्वों से भरा पड़ा है । वह माँ है, बहिन है, पत्नी है, प्रेयसी है, पुत्री है और कहीं-कहीं प्रेरणास्त्रोत भी है । यदि नारी अपने प्रेम और सौन्दर्य से मानव-जीवन को…

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Added by Savitri Rathore on March 8, 2013 at 5:30pm — 8 Comments

लोग कहते हैं कि मैंने शराब पी है ........

आँखे चढ़ी -चढ़ी सी हैं

आज मेरी ......

लोग कहते हैं कि

मैंने शराब पी है .....

हाँ तेरी यादे

किसी नशे से कम भी तो नही

जब भी चढ़ता है नशा

तेरी यादो का मुझ पर

मेरी…

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Added by Sonam Saini on March 8, 2013 at 3:30pm — 6 Comments

तुम्हारे मन का चोर दरवाज़ा

तुम्हारे मन का चोर दरवाज़ा

जिसके पार -

लहराती हैं

बदहवास हवाएं

गूंजते जहाँ-

अतीत के गीत

सायास

बज उठती है

अकुलाई सुधियों…

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Added by Vinita Shukla on March 8, 2013 at 3:00pm — 11 Comments

"महिला दिवस पर कुछ दोहे "

बॆटॊं जैसा ही मिले, इनको भी अधिकार ।
विनती है हर मात सॆ, बेटी को मत मार ॥
**************************
माता,बहना रूप में, मिलता इनका प्यार ।
बेटी मूरत प्रेम की , जानत है संसार ॥
**************************
इनको मिले समाज में, उतना ही सम्मान ।
कुल का दीपक पूत है , बेटी घर की शान ॥
***************************
बदलो अपनी सोच को,दो नवीन आकार ।
नारी कॆ कारन रहॆ , हरा-भरा परिवार ॥

राम शिरोमणि पाठक "दीपक"

मौलिक /अप्रकाशित

Added by ram shiromani pathak on March 8, 2013 at 3:00pm — 8 Comments

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