For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,173)

रूप घनाक्षरी

प्रति चरण ३२ अक्षर, १६-१६ पर दो विश्राम, इक्त्तीस्वां (३१ वाँ) दीर्घ, बत्तीसवां (३२ वाँ ) लघु

शारदा कृपा कर दो मुझको नादान जान

भरो खाली झोली माता ज्ञान का दो वरदान



मैं तेरा ध्यान कर के छंद की रचना करूँ

देश देश गायें सब भारत की बढे शान



छंद मेरे पढ़ें जो भी…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on June 3, 2012 at 7:00pm — 11 Comments

व्यंग्य - पानी रे पानी...

निश्चित ही पानी अनमोल है। यह बात पहले मुझे कागजों में ही अच्छी लगती थी, अब समझ भी आ रहा है। गर्मी में पानी, सोने से भी महंगा हो गया है, बाजार में दुकान पर जाने से ‘सोना’ मिल भी जाएगा, मगर ‘पानी’ कहीं गुम हो गया है। मेरे लिए तो फिलहाल सोने से भी ज्यादा कीमत, पानी की है, क्योंकि पानी को ढूंढने निकलता हूं तो दिन खप जाता है और वह गाना याद आता है...पानी रे पानी...तेरा रंग कैसा...। पानी के बिना वैसे तो जिंदगी ही अधूरी है और ऐसा लग भी रहा है, क्योंकि पानी ने जिंदगी से दूरी जो बना ली है। सुबह से…

Continue

Added by rajkumar sahu on June 3, 2012 at 1:38pm — 8 Comments

जला के "दीप" वो शोले बुझाने में मजा आए

ग़ज़ल या गीत गा के सुर मिलाने में मजा आए

बने जब धुन जुदा सी तो सुनाने में मजा आए



न सोना हो सका मुमकिन न जगने में सुकूँ पाया

जगे खुद यार को भी यूँ जगाने में मजा आए



गजब है इश्क ये मौला समझना है बहुत मुश्किल

बिछड़ के यार से खुद को रुलाने में मजा आए…



Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on June 3, 2012 at 12:30pm — 6 Comments

साहिबे ईजाद होते जा रहे हैं

बे-अदब आबाद होते जा रहे हैं

इल्म है बरबाद होते जा रहे हैं



देख कर गम इस जमाने का कहें क्या

सब दिले-नाशाद होते जा रहे हैं



गम हमारे देख अपनों को न गम हो

इसलिए हम शाद होते जा रहे हैं



चोर ही जाबित यहाँ पग पग लुटेरे…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on June 3, 2012 at 9:30am — 8 Comments

उड़ने दो मुझे आस्मां में



इस कविता में मैंने आज के उस आम आदमी की व्यथा बताई  है , जो  बहुराष्ट्रीय कंपनी के चक्कर में  फसकर प्रकृति से जुदा हो गया है , आज की इस भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में , इस स्पर्धा  में हम खुद को प्रकृति से बहुत दूर कर गए हैं |पेश है आम आदमी की उस व्यथा को जो उसे मजबूर बनाकर आम आदमी बना देती है , कैसे इंसान इस भेड़ चाल में अपने सपनो का गला घुटता  पा रहा है!

कैद न करो मुझे पिंजरों में

उड़ने दो मुझे आस्मां  में 
छीनो न…
Continue

Added by Rohit Dubey "योद्धा " on June 2, 2012 at 10:30pm — 6 Comments

इश्क में बरबाद होते जा रहे हैं

इश्क में बरबाद होते जा रहे हैं

अन सुनी फ़रियाद होते जा रहे हैं



प्यार का हमको सलीका क्यूँ न आया

क्यूँ दिले-नाशाद होते जा रहे हैं



जख्म अब गहरे छुपा के मुस्कुराते

दिन-ब-दिन हम शाद होते जा रहे हैं…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on June 2, 2012 at 12:00pm — 10 Comments

दो साल पहले मैं बेरोज़गार था, बेरोज़गार था

फ़िल्म : सी आई डी

तर्ज़    : सौ साल पहले......



दो साल पहले मैं बेरोज़गार था, बेरोज़गार था,

आज भी हूँ और कल भी रहूँगा



दोस्तों-पड़ोसियों  का कल भी कर्ज़दार…

Continue

Added by Albela Khatri on June 2, 2012 at 7:30am — 24 Comments

खून के उफान को ....

टूटते हैं टूटने दो, अब ह्रदय के तार को

छूटते हैं छूटने दो, खून के उफान को

हटो छोडो रास्ता अब, कफ़न सर पर लिये हैं

मौत से अब डर किसे है, मौत से लगते गले हैं

सह चुके अब ना सहेंगे, इस देश के अपमान को

टूटते हैं टूटने दो, अब ह्रदय के तार को

विश्व में उपहास के, कारण बनाये जाते हैं

खद्दरों के भेष में, दीमक हजम कर जाते हैं

इस देश की संपत्ति और, इस देश के सम्मान को

छूटते हैं छूटने दो, खून के उफान को

आम आदमी यहाँ, हाशिए में होता है

जिंदगी कि दौड…

Continue

Added by UMASHANKER MISHRA on June 2, 2012 at 12:30am — 14 Comments

गहरा है ये सागर बहुत साहिल ही नही है

ये दिल मेरा अब इश्क के काबिल ही नहीं है

बिखरा है जो अब टूट के वो दिल ही नहीं है



हम जीते थे जिस शान से यारों के साथ में

वो छूटे हैं पीछे सभी महफ़िल ही नहीं है



गम हैं मेरा जो जान से मारेगा  एक दिन

जो गम को डाले मार वो कातिल ही नहीं…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on June 1, 2012 at 5:00pm — 16 Comments

बेटी न होती

जीवन और मृत्यु
आत्मा परमात्मा
सत्य और असत्य
शाश्वत मूल्यों का सत्य
धूप और छाँव
साथ नहीं होती
गमछा संग धोती
बिना सीप मोती
बगैर दीप ज्योति
स्त्री स्त्री देख रोती
पोता हो या पोती
कैसे मिलता जीवन का
अनुपम सुन्दर उपहार
किसी घर में बेटी न होती

Added by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 1, 2012 at 4:30pm — 22 Comments

व्यंग रचना- अर्थ-तंत्र पर भारी

अर्थ-तंत्र पर भारी राज-तंत्र में गठबंधन सरकार,
गठबंधन-धर्म निभाने की मज़बूरी में यह सरकार |
 
ममता-सोनिया की डपट, कैसे करे दरकिनार,
उदासीन मनमोहन मौन हुए, संकट में सरकार…
Continue

Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 1, 2012 at 3:00pm — 16 Comments

ग़ज़ल

फिर से गुजरे वो पल याद आने लगे

भूल जाने में जिनको  ज़माने लगे

 

हैं वही शोखियाँ है वही बांकपन

जितने मंज़र हैं सारे पुराने लगे

 

कोनसी शै हे जिसपर भरोसा करें

अब तो साए भी अपने डराने लगे

 

उनको खुशियाँ मिलीं हे ख़ुदा का करम

हाथ अपने ग़मों के खजाने लगे

 

अपनी हसरत बताने  जिन्हें आये थे

वो तो अपना ही मुज़्दा सुनाने लगे  

Added by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on June 1, 2012 at 2:55pm — 16 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
खुशखबरी (कहानी)

हैलो हैलो !! हैलो  बेटा बोल !  माँ खुशखबरी है आपको पोता हुआ है, इतना कहकर रोहित ने फ़ोन  रख दिया | रेखा के पाँव तो ख़ुशी के मारे जमीन पर नहीं पड़ रहे थे, उसी समय बहुत सारी मिठाई लाकर पूरी कालोनी में बाँट दी | फिर तैयार होकर हॉस्पिटल पंहुच गई और सारे कर्मचारियों को मिठाई बांटी, आयाओं को सौ- सौ के नोट भी दिए और फिर बहु के पास पोते को देखने पहुंची वहां पर डॉक्टर भी राउंड पर आई हुई थी देखते ही रेखा एक पूरा मिठाई का डिब्बा डॉक्टर की तरफ देते हुए बोली आप भी मेरे पोते के होने की मिठाई खाओ |…

Continue

Added by rajesh kumari on June 1, 2012 at 10:30am — 23 Comments

ये सिर्फ अपनों के लिये ही बहते हैं

कदम उनसे दूर जाने लगे 

मन में उथल -पुथल 
सी होने लगी 
वो साथ थे तब तक 
सब अच्छा था
अब ये आँखें भी 
बोलने लगीं 
इनकी नमी ह्रदय -व्यथा 
व्यक्त करने लगी 
और शायद आंसुओं की
उपस्तिथि बयां कर 
रही थी .
और हाँ कल जब वो आये 
तब भी ये नमीं थी ,
आंसूं बहे थे 
पर कल तो दिल में ख़ुशी 
का ठिकाना न था .
मैं भला…
Continue

Added by Ajay Singh on June 1, 2012 at 9:36am — 7 Comments

भारत बन्द महोत्सव.........

पप्पू ने पूछा पापा,

ये भारत बन्द क्या होता है ?

पापा मुस्कुराया

पप्पू को बताया -



बेटा,

मेरा भारत महान में लोकतान्त्रिक  सरकार है

और भारत बन्द हमारा  राजनैतिक त्यौहार है

जो विपक्ष द्वारा  मनाया…

Continue

Added by Albela Khatri on June 1, 2012 at 9:30am — 13 Comments

ऐ मन निराश तुम मत होना

ऐ मन निराश तुम मत होना, मंज़िल तुझको मिल जायेगी

अपना न कभी धीरज खोना, फिर तो दुनिया हिल जायेगी।।



चलते रहना, बढ़ते रहना, इस कठिन डगर में रुकना मत

लाखों विपत्ति आ जाय सामने, किसी के आगे झुकना मत।

हौसला कभी भी मत खोना, विपदा आयेगी जायेगी।।

ऐ मन निराश तुम मत होना, मंज़िल तुझको मिल जायेगी।।



उलझनें बहुत सी आयेंगी, कुछ लोग तुम्हे बहकायेंगे

रोकने को तुझको क्षणिक फूल खुश्बू अपनी महकायेंगे।

बढ़ते रहना फिर देखोगे कलियाँ खिलती ही जायेंगी।।

ऐ मन निराश… Continue

Added by आशीष यादव on June 1, 2012 at 8:30am — 8 Comments

आभास!

“हूँ, कुछ कहा”. “कुछ भी तो नहीं”.”मुझे लगा शायद तुम कुछ बोले”. अक्सर ऐसा होता है जब किसी से बात करने का मन हो किन्तु जुबान खामोश हो.एक आवाज कान में गूंजने का आभास होता है.खामोशी में भी ये आवाज कहाँ से आती है?  ये आभास कैसे होता है? कभी नहीं जान सका. कई बार घर में अकेले बैठे हों और बाहर से दरवाजा खटखटाने की आवाज आती है जब हम वहाँ जाकर देखते हैं तो पता चलता है वहाँ तो कोई भी नहीं है.

कई बार पलंग पर पड़े…

Continue

Added by Ashok Kumar Raktale on June 1, 2012 at 7:30am — 11 Comments

जिंदगी का सफ़र

कभी कभी सोचता हूँ

यह जिंदगी मुझे कहाँ ले कर चल पड़ी

क्या सोचा था क्या हुआ था

क्या खोया था क्या रोया था

न जाने कितनी थी मजबूरियां इतनी

किस मोड़ पे ले आई है ये जिंदगी

में कहाँ आ खड़ा हूँ

होश आई तो पता चला में किस मोड़ पे खड़ा पाया

जिंदगी तेरे संग जीना सीख लिया

तेरे गीत गुनगुनाता हूँ

तेरे संग चलता हूँ

खूबसूरत सफ़र है तू

हरदम हर पल कुछ नया है

कुछ कर गुजरने की तमन्ना है तू

खुशियाँ की बौछार है

हर दिन एक नया…

Continue

Added by Rohit Singh Rajput on May 31, 2012 at 6:30pm — 8 Comments

धुंए का शौक लग गया तो ज़िन्दगी गई

आज 31 मई विश्व  तम्बाकू  विरोधी दिवस पर एक  विशेष रचना





सुट्टों ने सोखा जिस्म, सेहतमन्दगी गई

धुंए का शौक लग  गया तो  ज़िन्दगी गई



छुप छुप के पीना छोड़, खुल्लेआम पी रहे

माँ की  लिहाज़,  बाप से शरमिन्दगी गई



गुटखा चबाने वाले की…

Continue

Added by Albela Khatri on May 31, 2012 at 4:30pm — 40 Comments

तेरे प्रेम में मैंने प्रेम गीत गाया

इस गीत मैं कुछ वांछित बदलाव करने की कोशिश की है आदरणीय सम्पादक महोदय से निवेदन है की इसे सम्पादित करने की कृपा कर मुझे कृतकृत्य करें



तेरे नैनों में, कैसा ये जादू है

देख के मन ये, मेरा बेकाबू है

इन नैनो में, अब डूब के, मैंने ये मन गंवाया

तेरे प्रेम में, मैंने प्रेम गीत गया ,मैंने प्रेम .....................



मन में छुपाया है प्रेम तेरा, तन में बसाया है प्रेम तेरा

आँखों की प्यास है प्रेम तेरा, जीवन की आस है प्रेम तेरा

शीतल सी आग है प्रेम तेरा ,…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on May 31, 2012 at 1:30pm — 17 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।प्रस्तुत…See More
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service