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फिर से गुजरे वो पल याद आने लगे

भूल जाने में जिनको  ज़माने लगे

 

हैं वही शोखियाँ है वही बांकपन

जितने मंज़र हैं सारे पुराने लगे

 

कोनसी शै हे जिसपर भरोसा करें

अब तो साए भी अपने डराने लगे

 

उनको खुशियाँ मिलीं हे ख़ुदा का करम

हाथ अपने ग़मों के खजाने लगे

 

अपनी हसरत बताने  जिन्हें आये थे

वो तो अपना ही मुज़्दा सुनाने लगे  

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Comment by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on June 5, 2012 at 3:42pm

ye sab aap asateez hazrat ki hi rehnumai ki badolat he .bas isi tarah aapki rehnumaai or duaaein milti rahein yahi ilteja he 

Comment by वीनस केसरी on June 5, 2012 at 3:26pm
वाह
सब कुछ सधा सधा सा
जो अपने आपमें बहुत कुछ कह गया

आपकी मेहनत रंग लाई
बधाई
Comment by राज लाली बटाला on June 5, 2012 at 2:18am

khoob rahi ji..............

Comment by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on June 4, 2012 at 3:56pm

hosla afzaai ke liye bahut bahut shukriyah 

Comment by Bishwajit yadav on June 3, 2012 at 10:41pm
फिर से गुजरे वो पल याद आने लगे
भूल जाने में जिनको ज़माने लगे
हैं वही शोखियाँ है वही बांकपन
जितने मंज़र हैं सारे पुराने लगे

वाह! क्या जबरजस्त पक्तियाँ लिखा है आपने बिलकुल दिल को छु गई
जय हो
Comment by Rekha Joshi on June 2, 2012 at 8:39pm

शरीफ अहमद जी ,उम्दा गजल पर बधाई 

उनको खुशियाँ मिलीं हे ख़ुदा का करम

हाथ अपने ग़मों के खजाने लगे|bahut khub


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 2, 2012 at 7:45pm

ज़नाब हसरत साहब, मतले ने देर तक बाँधे रखा. इस ग़ज़ल पर हम दिली दाद कह रहे हैं. 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on June 2, 2012 at 6:41pm

वाह वाह वाह

बेहतरीन ग़ज़ल कही है साहब दाद क़ुबूल कीजिये

Comment by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on June 2, 2012 at 11:02am

aap sab ko meri ye ghazal pasand aayi iske liye bahut bahut shukriyah ,bas aap ki duaon ka talabgar hoon ,nisandeh OBO ke is manch par sheuraon ki poori tarah se islaah ki jati he or unki hosla afzaai ki jati he.mein khuda se dua karta hoon ki hamara ye pariwar din dooni raat choguni taraqqi kare,

Comment by Tilak Raj Kapoor on June 1, 2012 at 9:10pm

खूबसूरत ग़ज़ल है भाई।

उनको खुशियाँ मिलीं हे ख़ुदा का करम

किसलिये खोपड़ी तुम खुजाने लगे।

आया न मज़ा।

 

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