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उसकी पहली नज़र ही असर कर गयी
एक पल में ही दिल में वो घर कर गयी

हर गली कर गयी हर डगर कर गयी
मुझको रुसवा तेरी इक नज़र कर गयी

मैंने देखा उसे देखता रह गया
मुझको खुद से ही वो बेखबर कर गयी

साथ चलने का तो मुझसे वादा किया
वो तो तन्हा ही लेकिन सफ़र कर गयी

जिस घडी पड़ गयी इक नज़र यार की
एक ज़र्रे को शम्सो कमर कर गयी

हमने मांगी थी 'हसरत' जो रब से दुआ
वो दुआ अब यक़ीनन असर कर गयी

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Comment by आशीष यादव on May 24, 2012 at 12:08pm
वाह हसरत साहब
खूबसूरत ग़ज़ल
Comment by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on May 24, 2012 at 11:46am

ji bahut bahut shuqriya bagi ji


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 23, 2012 at 8:07pm

हसरत साहिब बहुत ही प्यारी ग़ज़ल कही है, मैं गुनगुनाते रह गया, वाह वाह, खुबसूरत ख्यालात की ग़ज़ल, दाद कुबूल करें |

Comment by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on May 17, 2012 at 11:42am

ji bahut bahut shuqriya mahima ji

Comment by MAHIMA SHREE on May 16, 2012 at 8:54pm

उसकी पहली नज़र ही असर कर गयी
सिर्फ पल भर में दिल में वो घर कर गयी

उससे मांगी जो हमने निशानी कोई
चंद अलफ़ाज़ मुझको नज़र कर गयी

क्या बात है , बहुत खूब ... आज तो एक से बढ़ कर एक गजल पढने को मिल रहा है  बधाई आपको



Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 16, 2012 at 3:07pm

kya baat hai ...............bahut sundar .......waaah

Comment by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on May 16, 2012 at 2:32pm

hosla afzai ke liye bahut bahut shuqriya sooraj ji

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on May 16, 2012 at 2:29pm

हसरत साहब बहुत खूबसूरत ग़ज़ल पेश की है आपने। दाद कुबूल करें !!

Comment by वीनस केसरी on May 15, 2012 at 10:57pm

बढ़िया

Comment by Nilansh on May 15, 2012 at 10:02pm

acchi ghazal hasrat ji

bahut badhai

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