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SHARIF AHMED QADRI "HASRAT"'s Blog (10)

ग़ज़ल

इश्क़ करता है कोन दुनिया में

दिल से मरता है कोन दुनिया में

मुफ़्त शेखी बगारने वाले

तुझसे डरता है कोन दुनिया में

महवे हैरत है आसमां मुझ पर

आहें भरता है कोन दुनिया में

आईना बन गए हैं हम लेकिन

अब संवरता है कौन दुनिया में

सबको करना है कूच दुनिया से

कब ठहरता है कौन दुनिया में

अब न मुंसिफ़ कोई उमर जैसा

अद्ल करता है कौन दुनिया में

दिल की गहराई से तुझे हसरत

याद करता है कौन…

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Added by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on January 20, 2016 at 5:00pm — 5 Comments

हो के मजबूर उसूलों से बग़ावत की है

जाने क्या सोच के उसने ये हिमाक़त की है

हो के दरिया जो समंदर से अदावत की है

खींच लायी हे तेरे दर पे ज़रुरत मुझको

हो के मजबूर उसूलों से बग़ावत की है

हमने ख़ारों पे बिछाया हे बिछोना अपना

हमने तलवारों के साये में इबादत  की है

अच्छे हमसाये की तालीम मिली हे हमको

हमने जाँ दे के पडोसी की हिफाज़त की है

आज आमाल ही पस्ती का सबब हैं वरना

हमने हर दौर में दुनिया पे हुकूमत की है

दम मेरा कूच…

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Added by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on September 23, 2015 at 12:00pm — 13 Comments

हयात हमने गुज़री हे इन्तेहाँ की तरह

लहू से जिसको के सींचा था बागबां की तरह

वही चमन नज़र आता हे अब खिज़ां की तरह 
हवा का झोंका भी आया तो रोक लूँगा उसे 
खड़ा हूँ तेरी हिफाज़त में पासबां की तरह 
कभी हयात में हमको सुकूं  मिला ही नहीं 
के रोज़ो शब् नज़र आते हैं कारवां की तरह 
खुदा की याद में खुद को मिटा लिया जबसे 
मेरा वजूद ज़मीं पर हे आसमां की तरह 
ये तज़र्बे  बड़ी मुश्किल से पाये हैं हमने
हयात हमने गुज़ारी हे इन्तेहाँ की…
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Added by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on March 11, 2015 at 1:00pm — 13 Comments

शायरी मिल गयी

तुम मिले तो मुझे हर ख़ुशी मिल गयी 
यूँ लगा के मुझे जिंदगी मिल गयी 
कांच सा टूटकर दिल बिखर जायेगा 
अब इसे गर तेरी बेरुखी मिल गयी 
तेरी चाहत ने दिल को बनाया हे दिल 
क्या हुआ गर मुझे बेकली मिल गयी 
इस तरह दिल को रोशन किया आपने 
यूँ लगा रात को चांदनी मिल गयी 
सुन के आवाज़ तेरी मुझे यूँ लगा 
मेरे नगमो को अब रागनी मिल गयी 
तुझको देख तो दिल से ये आई सदा 
मुझको हसरत मेरी शायरी…
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Added by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on October 14, 2012 at 11:54am — 5 Comments

प्यार कब मिला

चाहा था दिल ने जिसको वो दिलदार कब मिला
सब कुछ मिला जहाँ में मगर प्यार कब मिला

तनहा ही ते किये हैं ये पुरखार रास्ते
इस जीस्त के सफ़र में कोई यार कब मिला

बाज़ार से भी गुज़रे हैं हाथों में दिल लिए
लेकिन हमारे दिल को खरीदार कब मिला

उल्फत में जां भी हंस के लुटा देते हम मगर
हम को वफ़ा का कोई तलबगार कब मिला

तनहा ही लड़ रहा हूँ हालाते जीस्त से
हसरत को जिंदगी में मददगार कब मिला

Added by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on October 6, 2012 at 10:54pm — 8 Comments

ठोकरें ज़माने की

ये सज़ा मिली मुझको तुमसे दिल लगाने की

मिल रही हें बस मुझको ठोकरें ज़माने की

 

फैसला हे ये मेरा मैं तुम्हें भुला दूंगा

तुमको भी इजाज़त हे मुझको भूल जाने की

 

ख़ाब अब मुहब्बत के मैं कभी न देखूँगा

ताब ही नहीं मुझमे फिर से ज़ख्म खाने की

 

रह गयी उदासी हीअब तो मेरे हिस्से में

अब…

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Added by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on June 11, 2012 at 12:44pm — 14 Comments

ग़ज़ल

फिर से गुजरे वो पल याद आने लगे

भूल जाने में जिनको  ज़माने लगे

 

हैं वही शोखियाँ है वही बांकपन

जितने मंज़र हैं सारे पुराने लगे

 

कोनसी शै हे जिसपर भरोसा करें

अब तो साए भी अपने डराने लगे

 

उनको खुशियाँ मिलीं हे ख़ुदा का करम

हाथ अपने ग़मों के खजाने लगे

 

अपनी हसरत बताने  जिन्हें आये थे

वो तो अपना ही मुज़्दा सुनाने लगे  

Added by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on June 1, 2012 at 2:55pm — 16 Comments

ग़ज़ल

उसकी पहली नज़र ही असर कर गयी
एक पल में ही दिल में वो घर कर गयी

हर गली कर गयी हर डगर कर गयी
मुझको रुसवा तेरी इक नज़र कर गयी

मैंने देखा उसे देखता रह गया
मुझको खुद से ही वो बेखबर कर गयी

साथ चलने का तो मुझसे वादा किया
वो तो तन्हा ही लेकिन सफ़र कर गयी

जिस घडी पड़ गयी इक नज़र यार की
एक ज़र्रे को शम्सो कमर कर गयी

हमने मांगी थी 'हसरत' जो रब से दुआ
वो दुआ अब यक़ीनन असर कर गयी

Added by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on May 15, 2012 at 1:00pm — 15 Comments

ग़ज़ल

सदा आती है ये अक्सर तड़प के मेरे सीने से 

तेरे क़दमों में दे दूं जां जुदा रहकर के जीने से
                        मोहब्बत के मुसाफिर को कभी मंजिल नहीं मिलती
                        जिसे  साहिल  की हसरत  है  उतर जाए  सफीने  से    
मोहब्बत जो भी करते हैं बड़ी तकदीर वाले  हैं 
चमक जाती हैं तकदीरें  मोहब्बत के नगीने से 
                        तेरी यादों के  जुगनू  हैं…
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Added by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on April 3, 2012 at 5:00pm — 4 Comments

ग़ज़ल



आँखों में भरे खूँ लिए तलवार खड़ा है 

करने को मुझे कत्ल मेरा यार खडा है

.

दे दे तु मुझे अपनी दुआओँ का सहारा

चोखट पे तेरी आज ये बीमार खडा है

.

जाने दे मुझे मौत की आगोश मे हमदम

क्योँ बनके मेरी राह मे दीवार खडा है

.

मरकर ही सही  आज ये एजाज मिला तो 

करने को मेरा आज वो दीदार खडा है

.

गर मुझको मिटाने का वो रखते हें इरादा

हसरत भी फना होने को तय्यार खडा…

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Added by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on March 12, 2012 at 11:30pm — 18 Comments

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