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ये सिर्फ अपनों के लिये ही बहते हैं

कदम उनसे दूर जाने लगे 

मन में उथल -पुथल 
सी होने लगी 
वो साथ थे तब तक 
सब अच्छा था
अब ये आँखें भी 
बोलने लगीं 
इनकी नमी ह्रदय -व्यथा 
व्यक्त करने लगी 
और शायद आंसुओं की
उपस्तिथि बयां कर 
रही थी .
और हाँ कल जब वो आये 
तब भी ये नमीं थी ,
आंसूं बहे थे 
पर कल तो दिल में ख़ुशी 
का ठिकाना न था .
मैं भला अनजान खुद को 
कैसे समझाता कि
उनके आने कि ख़ुशी हो या 
जाने का गम , ये तो 
बहते ही हैं ,
और दोनों बार एक जैसे  ही .
लेकिन इतना जरुर 
समझ में आया कि 
ये सिर्फ अपनों के लिये ही 
बहते हैं , कभी भी 
परायों के लिये नही 

Views: 479

Comment

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Comment by Bishwajit yadav on June 3, 2012 at 10:27pm
अजय जी बहुत सुन्दर रचना बधाई हो कुछ पक्तियाँ टच माई दिल
जय हो
Comment by Rekha Joshi on June 2, 2012 at 8:29pm

अजय जी ,बहुत ही बढ़िया रचना ,सच में यह अपने लिए ही बहते है ,लेकिन महान लोगो की आँखों में यह दूसरों के लिए भी बहते है ,पर ऐसे लोग बहुत कम है ,अच्छी रचना पर बधाई स्वीकार करें |

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on June 2, 2012 at 6:53pm

बाकई ये सिर्फ अपनों के लिए ही बहते हैं
बहुत सुन्दर रचना आपको बधाई स्वीकारें श्रीमान

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 1, 2012 at 4:55pm

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति. काश ये दूसरों के लिए भी बहें. बधाई 

Comment by Ajay Singh on June 1, 2012 at 4:52pm

अब ये आँखें भी

बोलने लगीं 

इनकी नमी ह्रदय -व्यथा  

व्यक्त करने लगी    ....             और हाँ कल जब वो आये  the    तब भी ये नमीं थी.........


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 1, 2012 at 4:38pm
इनकी नमी ह्रदय -व्यथा व्यक्त करने लगी और शायद आंसुओं की उपस्तिथि बयां कर रही थी .और हाँ कल जब वो आये तब भी ये नमीं थी.......
अजय जी, थोड़ी खरी खरी हो जाये.......कविता किधर है, सलाह है कि औरों की रचनाओं को पढ़े बहुत मदद मिलेगी |प्रयास हेतु साधुवाद, प्रयासरत रहे |
Comment by Albela Khatri on June 1, 2012 at 11:23am

BAHUT HI ACHHI KAVITA  AJAY SINGH JI..BADHAAI......

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