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ऐ मन निराश तुम मत होना

ऐ मन निराश तुम मत होना, मंज़िल तुझको मिल जायेगी
अपना न कभी धीरज खोना, फिर तो दुनिया हिल जायेगी।।

चलते रहना, बढ़ते रहना, इस कठिन डगर में रुकना मत
लाखों विपत्ति आ जाय सामने, किसी के आगे झुकना मत।
हौसला कभी भी मत खोना, विपदा आयेगी जायेगी।।
ऐ मन निराश तुम मत होना, मंज़िल तुझको मिल जायेगी।।

उलझनें बहुत सी आयेंगी, कुछ लोग तुम्हे बहकायेंगे
रोकने को तुझको क्षणिक फूल खुश्बू अपनी महकायेंगे।
बढ़ते रहना फिर देखोगे कलियाँ खिलती ही जायेंगी।।
ऐ मन निराश तुम मत होना, मंज़िल तुझको मिल जायेगी।।

बस फूलों की बात नही राहों मे खार भी छिटकेंगे,
रोकेंगे तुम्हे पुरजोर लगा, दामन से तेरे लिपटेंगे।
बस धैर्य तुम्हारा बना रहे सारी पीड़ा मर जायेगी।।
ऐ मन निराश तुम मत होना, मंज़िल तुझको मिल जायेगी।।

जब दुनियाँ छोड़े साथ तुम्हारा तब तुम चलना एक तरफ,
बस राह तुम्हारी सही रहे, फिर चलते रहना बेधड़क।
ईश्वर का साथ मिल जायेगा, जब ये दुनिया ठुकरायेगी।।
ऐ मन निराश तुम मत होना, मंज़िल तुझको मिल जायेगी।।

आशीष यादव

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Views: 728

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Comment by आशीष यादव on July 4, 2012 at 12:55am

आदरणीया shubha singh जी, रचना पसन्द करने हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद।

Comment by आशीष यादव on June 5, 2012 at 8:19am

आदरणीया  Seema agrawal जी, रचना पसन्द करने हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद। आगे की रचनाओं पर भी आपका आशीर्वाद चाहूँगा।

Comment by आशीष यादव on June 5, 2012 at 8:17am

आदरणीय श्री Albela Khatri जी, आदरणीय श्री PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA ji,  आदरणीय श्री Ganesh Jee "Bagi" ji आदरणीय श्री SANDEEP KUMAR PATELji evam  आदरणीय श्री  Ashok Kumar Raktale ji, आप लोगों इस रचना को सराहा मै धन्य हो गया। उम्मीद है मेरी अन्य रचनाओं पर भी आप लोगों का आशीर्वाद मिलेगा।
बहुत-बहुत आभार एवँ धन्यवाद

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 3, 2012 at 6:49am

आशीष जी
        निराशा के दायरे से बाहर आने में संबल देती सुन्दर रचना. बधाई.

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on June 2, 2012 at 6:44pm

बेहतरीन गीत के लिए साधुवाद आशीष भाई मजा आ गया पढ़ कर बहुत बहुत बधाई आपको


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 2, 2012 at 6:04pm

आशीष जी , जीवन की सच्चाई और उससे लड़ने की प्रेरणा को प्रदर्शित करती एक खुबसूरत रचना पर बधाई स्वीकार करें |

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 1, 2012 at 5:01pm

आशीष जी प्रेरणादायक रचना .

वीर तुम बढे चलो धीर तुम बढे चलो , बधाई.

Comment by Albela Khatri on June 1, 2012 at 12:34pm

badhaai bhaaiji,

bahut khoob rachna........saarthak kavita

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