For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

April 2019 Blog Posts

पथ के पथगामी-

नारी तो केवल है नारी है    

नर भी तो केवल है नर      

दोनोँ के विचार अलग हैं

दोनोँ के किरदार अलग

ना इसका कुछ हिस्सा ज्यादा

ना ही उसका है कुछ कम

 

कभी…

Continue

Added by प्रदीप देवीशरण भट्ट on April 2, 2019 at 6:30pm — 4 Comments

वह निगाहें- लघुकथा

"अरे पागल हो गए हो क्या, उस ऑटो को क्यों जाने दिया. इतना टेंशन हैं चारोतरफ और हम लोग यहाँ फंसे हुए हैं जहाँ तीन दिन पहले ही दंगे हुए थे", राजेश एकदम बौखला गया.

"चिंता मत करो, अब स्थिति कुछ ठीक हैं, दूसरा आ जायेगा", उसने इत्मीनान से कहा और सामने सड़क पर देखने लगा.

तभी एक दूसरा ऑटो आता दिखाई पड़ा, ऑटो ड्राइवर को देखकर ही राजेश को समझ आ गया कि यह गैर मज़हबी है और वह थोड़ा पीछे हो गया.

"आ जाओ, चलना नहीं हैं क्या", कहते हुए वह राजेश का हाथ खींचते हुए ऑटो में बैठ गया.

कुछ समय बाद…

Continue

Added by विनय कुमार on April 2, 2019 at 5:36pm — 10 Comments

ओ बी ओ को 9वीं सालगिरह की सौगात

ओ बी ओ को 9वीं सालगिरह की सौगात

ग़ज़ल (फाइलुन _फाइलुन _फाइलुन _फाइलुन /फाइलात)

मेरा दिल दे रहा है दुआ ओ बी ओ l

तू फले फूले यूँ ही सदा ओ बी ओ l

कोई सीखे कथा, छंद या शायरी

इन सभी का है तू रहनुमा ओ बी ओ l

भाई सौरभ हों राना या मिथलेश हों

इनके दम से तू आगे बढ़ा ओ बी ओ l

सीखने का दिया मंच तूने हमें

क्यूँ न तेरा करूँ शुक्रिया ओ बी ओ l

आज ख़ुश हैं बहुत यूँ नहीं योगराज

गोद में इनकी फूला फला ओ बी…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on April 2, 2019 at 12:01pm — 10 Comments

जिंदगी को गुनगुना कर चल दिए-सलीम रज़ा रीवा

ओबीओ को समर्पित एक क़त'आ  

----------------------------------

जब से तेरी मेहरबानी हो गई

ख़ूबसूरत ज़िन्दगानी हो गई

हम हुए तेरे दिवाने इस तरह

जिस तरह 'मीरा' दिवानी हो गई

...........

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

बहरे रमल मुसद्दस महज़ूफ़

--------

जिंदगी को गुनगुना कर चल दिए

मौत को अपना बना कर चल दिए

oo

उम्र भर की दोस्ती जाती रही

आप ये क्या गुल खिलाकर चल…

Continue

Added by SALIM RAZA REWA on April 2, 2019 at 10:00am — 6 Comments

कुण्डलिया छंद-

मतदाता को फाँसने, डाल रहे हैं जाल।
नेता आपस में सभी, कीचड़ रहे उछाल।।
कीचड़ रहे उछाल, मची है ता ता थैया।
नागनाथ हैं एक, दूसरे साँप नथैया।।
हर नेता ही रोज, निराले ख्वाब दिखाता।
सारे नटवरलाल, करे अब क्या मतदाता।।
(मौलिक व अप्रकाशित)
**हरिओम श्रीवास्तव**

Added by Hariom Shrivastava on April 1, 2019 at 11:31pm — 8 Comments

मौज ख़ुद आपको साहिल पे लगाने से रही (४१)



मौज ख़ुद आपको साहिल पे लगाने से रही 

और क़ुदरत भी कोई जादू दिखाने से रही 

***

हौसला आपका दे साथ करम हो रब का 

फिर किसी सिम्त बला कोई सताने से रही 

***

हो सके जितना हक़ीक़त ये समझ लो सारे 

मौत मर्ज़ी से कभी आपकी आने से रही 

***

इम्तिहाँ रोज़ ही देने हैं यहाँ जीने को 

रोने धोने से तरस ज़िंदगी खाने से रही 

***

हो…

Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on April 1, 2019 at 11:00pm — 4 Comments

ग़ज़ल (यही ज़माने को खल रहा है )

ग़ज़ल (यही ज़माने को खल रहा है )

(मफा इलातुन _मफा इलातुन)

यही ज़माने को खल रहा हैl

वो मेरे हम राह चल रहा है l

वो हैं मुखातिब तो मुझसे लेकिन

कलेजा यारों का जल रहा है l

नज़र में है सिर्फ उसके मंज़िल

जो गिरते गिरते संभल रहा है l

रखें निगाहों पे कैसे काबू

वो सामने से निकल रहा है l

बदल के शीशा है फायदा क्या

तेरा भी अब हुस्न ढल रहा है l

खयाल में आ रहा है दिलबर

न यूँ…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on April 1, 2019 at 8:25pm — 4 Comments

ओ बी ओ मंच को समर्पित ग़ज़ल (1222*4)

तुझे इस वर्ष नौवें की ओ बी ओ बधाई है,

हमारे दिल में चाहत बस तेरी ही रहती छाई है।

मिला इक मंच तुझ जैसा हमें अभिमान है इसका,

हमारी इस जहाँ में ओ बी ओ से ही बड़ाई है।

सभी इक दूसरे से सीखते हैं और सिखाते हैं,

हमारी एकता की ओ बी ओ ही बस इकाई है।

सभी झूमें, सभी गायें यहाँ ओ बी ओ में मिल के,

सभी हम भक्त तेरे हैं तू ही प्यारा कन्हाई है।

लगा जो मर्ज लिखने का, दिखाते ओ बी ओ को ही,

उसी के पास इसकी क्यों कि इकलौती दवाई…

Continue

Added by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on April 1, 2019 at 12:00pm — 6 Comments

ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा

है उजागर ये हक़ीक़त ओ बी ओ

मुझको है तुझसे महब्बत ओ बी ओ

तेरे आयोजन सभी हैं बेमिसाल

तू अदब की एक जन्नत ओ बी ओ

कहते हैं अक्सर ,ये भाई योगराज

तू है इक छोटा सा भारत ओ बी ओ

सीखने वाले यही कहते सदा…

Continue

Added by Samar kabeer on April 1, 2019 at 11:00am — 40 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
Monday
Sushil posted blog posts
Monday
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Monday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service