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Hariom Shrivastava
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Hariom Shrivastava's blog post दोहे -
"वाह आदरणीय बहुत ही सुन्दर और सटीक दोहे हुए..सादर"
May 7

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Hariom Shrivastava's blog post दोहे -
"आदरनीय हरि ओम भाई , हालते हाज़रा पर अच्छे दोहे रचे , आपको हृदय से बधाइयाँ । 205"
May 5
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला commented on Hariom Shrivastava's blog post दोहे -
"सामायिक और सुंदर दोहे | इस दोहें को देखे आदरणीय = समय वार्ता का नहीं, होने दें यलगार |। === शायद वार्ता में आपने 5 मात्राएँ ली है | कुछ विद्वजन इसमें 4 और कुछ 5 मात्राएँ मानते है बिना मार करता नहीं, गलती वह स्वीकार। "
May 4
रामबली गुप्ता commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -- (अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष)
"दोनों ही कुंडलिया बहुत सुंदर और शिल्पबद्ध हुई हैं आद0 भाई हरिओम जी। दिल से बधाई लीजिये।"
May 4
रामबली गुप्ता commented on Hariom Shrivastava's blog post दोहे -
"सभी दोहे अच्छे, शिल्पबद्ध और प्रासंगिक हैं आद0 श्रीवास्तव जी हृदय से बधाई स्वीकारें।सादर"
May 3
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post दोहे -
"आदरणीय समर कबीर जी, आपकी अमूल्य व सराहनीय प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ। इस हौसलाअफजाई हेतु हार्दिक आभार।"
May 2
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post दोहे -
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,बढ़िया दोहे लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
May 2
Hariom Shrivastava posted a blog post

दोहे -

सैनिक हुए शहीद फिर, और हुआ उपहास।अपनी ही सरकार से, रही न कोई आस।।1।।इसमें कोई शक नहीं, हम हैं निंदा वीर।अगली निंदा के लिए, दिल्ली का प्राचीर।।2।।कोई पत्थर मारता, कोई काटे शीश।विजयी भव का क्यों नहीं, दे देते आशीष।।3।।समय वार्ता का नहीं, होने दें यलगार।बिना मार करता नहीं, गलती वह स्वीकार।।4।।(मौलिक व अप्रकाशित)**हरिओम श्रीवास्तव**See More
May 2
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -- (अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष)
"आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु तहेदिल से शुक्रिया।"
May 2

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -- (अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष)
"आदरनीय हरि ओम भाई , बहुत अच्छी कुँडलिया रचना हुई है ..  रचनाओं के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ । 85"
May 2
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -- (अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष)
"आदरणीय समर कबीर जी, आपकी उपस्थिति व सराहनीय प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ। इस हौसलाअफजाई हेतु हार्दिक आभार।"
May 1
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -- (अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष)
"आदरणीय सुशील सारना जी आपकी उपस्थिति व सराहनीय प्रतिक्रिया से हौसलाअफजाई हुई। तहेदिल से आपका शुक्रिया।"
May 1
Sushil Sarna commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -- (अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष)
"आदरणीय हरिओम जी मज़दूर दिवस पर बहुत ही सुंदर और सार्थक कुण्डलिया का सृजन हुआ है।  हार्दिक बधाई स्वीकार करें सर। "
May 1
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -- (अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष)
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,मज़दूर दिवस पर बढ़िया कुण्डलिया छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
May 1
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -- (अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष)
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,मज़दूर दिवस पर बढ़िया कुण्डलिया छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
May 1
Hariom Shrivastava posted a blog post

कुण्डलिया छंद -- (अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष)

1-उत्पादन को चाहिए, पाँच प्रमुख जो तत्व।उनमें श्रम का मानिए, सबसे अधिक महत्व।।सबसे अधिक महत्व, भूमि श्रम साहस पूँजी।और संगठन खास, बात मैं खरी कहूँ जी।।श्रमिक दिवस पर आज, करें उनका अभिनंदन।करता देश विकास, तभी जब हो उत्पादन।।2-रोटी की खातिर खटे, श्रम साधक मजदूर।सुख सुविधाओं से परे, रहता जो मजबूर।।रहता जो मजबूर, और भूखा सो जाता।उसके श्रम का मोल,नहीं उसको मिल पाता।।श्रम के भी कानून, मगर नीयत है खोटी।इस कारण भरपेट, न उसको मिलती रोटी।।(मौलिक व अप्रकाशित)***हरिओम श्रीवास्तव***See More
May 1

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, M.P.
Native Place
Datia, M.P.
Profession
Former Commercial Tax Officer

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At 4:56pm on April 20, 2017, Hariom Shrivastava said…
सादर आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी।
At 9:53pm on April 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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दोहे -

सैनिक हुए शहीद फिर, और हुआ उपहास।
अपनी ही सरकार से, रही न कोई आस।।1।।

इसमें कोई शक नहीं, हम हैं निंदा वीर।
अगली निंदा के लिए, दिल्ली का प्राचीर।।2।।

कोई पत्थर मारता, कोई काटे शीश।
विजयी भव का क्यों नहीं, दे देते आशीष।।3।।

समय वार्ता का नहीं, होने दें यलगार।
बिना मार करता नहीं, गलती वह स्वीकार।।4।।
(मौलिक व अप्रकाशित)
**हरिओम श्रीवास्तव**

Posted on May 2, 2017 at 4:30pm — 6 Comments

कुण्डलिया छंद -- (अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष)

1-

उत्पादन को चाहिए, पाँच प्रमुख जो तत्व।

उनमें श्रम का मानिए, सबसे अधिक महत्व।।

सबसे अधिक महत्व, भूमि श्रम साहस पूँजी।

और संगठन खास, बात मैं खरी कहूँ जी।।

श्रमिक दिवस पर आज, करें उनका अभिनंदन।

करता देश विकास, तभी जब हो उत्पादन।।

2-

रोटी की खातिर खटे, श्रम साधक मजदूर।

सुख सुविधाओं से परे, रहता जो मजबूर।।

रहता जो मजबूर, और भूखा सो जाता।

उसके श्रम का मोल,नहीं उसको मिल पाता।।

श्रम के भी कानून, मगर नीयत है खोटी।

इस कारण भरपेट, न उसको… Continue

Posted on May 1, 2017 at 1:28pm — 8 Comments

कुण्डलिया छंद

1-

पीने में आनंद है, मिथ्या है संसार।

पीने से बढ़ता सदा, आपस में है प्यार।।

आपस में है प्यार,भेद सारे मिट जाते।

टकराते जब जाम,स्वर्ग का सुख तब पाते।।

मदिरा के बिन यार,मजा क्या है जीने में।

जीवन है दिन चार, हर्ज फिर क्या पीने में।।

2-

किसने पाई आजतक, मद्यपान से शांति।

पीने वाला पालता, मन में फिर क्यों भ्रांति।।

मन में फिर क्यों भ्रांति'शांति देगी ये हाला।

खोकर अपना होश,बने फिर क्यों मतवाला।।

हुआ नशे से मुक्त, विचारा मन में जिसने।…

Continue

Posted on April 18, 2017 at 6:00pm — 8 Comments

 
 
 

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