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Hariom Shrivastava
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Hariom Shrivastava commented on rajesh kumari's blog post “किन्नर” (लघु कथा 'राज')
"बहुत सुंदर व यथार्थता पर आधारित कहानी आदरणीया राजेश कुमारी जी। आज यह एक ज्वलंत समस्या है कि लोग अपराध घटित होते हुए देखते रहते हैं और विरोध की हिम्मत नहीं जुटा पाते। ऐसे लोंगों पर करारा प्रहार किया है।"
Monday
Hariom Shrivastava commented on Seema Mishra's blog post जंगल के फूल -सीमा पांडे मिश्रा "सुशी"
"बहुत सुंदर कहानी आदरणीया सीमा मिश्रा जी।..."उसका स्वाभिमान गरीबी का प्रदर्शन करने को तैयार नहीं था।"..बहुत खूब।"
Monday
Hariom Shrivastava shared Seema Mishra's blog post on Google +1
Monday
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी,उत्हासवर्धन हेतु हार्दिक आभार।"
Saturday
Hariom Shrivastava left a comment for raksha dubey chaubey
"आदरणीया रक्षा जी, आपका व आपकी प्रथम प्रस्तुति का स्वागत है। प्रदत्त चित्र पर बहुत अच्छा छंद लिखा है। 'छलका जाए, यहाँ यदि 'जाय'प्रयुक्त किया जाता, तो बेहतर होता। सादर।"
Saturday
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"कुण्डलिया छंद ----------------- बूचड़खाने बंद हैं, माँस नहीं अब तात। कुत्ते से कुत्ता कहे, चुपके से यह बात।। चुपके से यह बात, गुजारा होगा कैसे। मोदी जी ने पास, नहीं छोड़े हैं पैसे।। बाबाओं का राज, पडे़ंगे चने चबाने। लेंगें शाकाहार, बंद अब…"
Saturday
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"वाहह,वाहहहह,प्रदत्त चित्र पर बहुत सुंदर कुण्डलिया छंद। प्रेम विरोधी कृत्य करे,आखिर क्यों दुनिया।..बहुत खूब।"
Friday
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"वाहह,वाहहहहह,प्रदत्त चित्र पर अतिसुंदर सार छंद। हार्दिक बधाई आदरणीय अखिलेश जी।"
Friday
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चित्र से काव्य तक

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Friday
Hariom Shrivastava posted a blog post

कुण्डलिया छंद

1- पीने में आनंद है, मिथ्या है संसार। पीने से बढ़ता सदा, आपस में है प्यार।। आपस में है प्यार,भेद सारे मिट जाते। टकराते जब जाम,स्वर्ग का सुख तब पाते।। मदिरा के बिन यार,मजा क्या है जीने में। जीवन है दिन चार, हर्ज फिर क्या पीने में।। 2- किसने पाई आजतक, मद्यपान से शांति। पीने वाला पालता, मन में फिर क्यों भ्रांति।। मन में फिर क्यों भ्रांति'शांति देगी ये हाला। खोकर अपना होश,बने फिर क्यों मतवाला।। हुआ नशे से मुक्त, विचारा मन में जिसने। करके मदिरा पान, शांति पाई है किसने।।3.रोजाना की ही तरह, लेकर पहुँचा…See More
Apr 20
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद
"आदरणीय नीलेश जी, आपकी उपस्थिति से रचना को मान मिला। बोलीं कुछ भन्नाय में 'कुछ' की जगह 'वो' करने का आपका सुझाव स्वागत योग्य है। धन्यवाद। पहले छंद में आपने कहा कि स्पष्ट नहीं कि "क्या पीने में"। इस संबंध में छंद में आगे…"
Apr 20
Nilesh Shevgaonkar commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद
"आ, हरिओम जी .... अच्छे छन्द हुए हैं ..   बधाई ...बोलीं कुछ भन्नाय, देर क्यों इतनी लागी।...... जब आप को पता है कि क्या बोली तो कुछ का प्रयोग ठीक नहीं है .... कुछ अस्पष्टता के लिये ठीक है ....बोली वो भन्नाय ...पहले छन्द में भी ..पीने में…"
Apr 20
Hariom Shrivastava left a comment for Hariom Shrivastava
"सादर आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी।"
Apr 20
Hariom Shrivastava joined Admin's group
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भारतीय छंद विधान

इस समूह में भारतीय छंद शास्त्रों पर चर्चा की जा सकती है | जो भी सदस्य इस ग्रुप में चर्चा करने के इच्छुक हों वह सबसे पहले इस ग्रुप को कृपया ज्वाइन कर लें !See More
Apr 20
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी,आपकी सराहनीय प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ। हार्दिक आभार।"
Apr 20
Hariom Shrivastava updated their profile
Apr 20

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, M.P.
Native Place
Datia, M.P.
Profession
Former Commercial Tax Officer

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At 4:56pm on April 20, 2017, Hariom Shrivastava said…
सादर आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी।
At 9:53pm on April 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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कुण्डलिया छंद

1-

पीने में आनंद है, मिथ्या है संसार।

पीने से बढ़ता सदा, आपस में है प्यार।।

आपस में है प्यार,भेद सारे मिट जाते।

टकराते जब जाम,स्वर्ग का सुख तब पाते।।

मदिरा के बिन यार,मजा क्या है जीने में।

जीवन है दिन चार, हर्ज फिर क्या पीने में।।

2-

किसने पाई आजतक, मद्यपान से शांति।

पीने वाला पालता, मन में फिर क्यों भ्रांति।।

मन में फिर क्यों भ्रांति'शांति देगी ये हाला।

खोकर अपना होश,बने फिर क्यों मतवाला।।

हुआ नशे से मुक्त, विचारा मन में जिसने।…

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Posted on April 18, 2017 at 6:00pm — 8 Comments

 
 
 

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