For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Hariom Shrivastava
Share
 

Hariom Shrivastava's Page

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Hariom Shrivastava's blog post सरसी छंद -
"सादर धन्यवाद् आदरणीय मेरे प्रश्न का  समाधान देने हेतु | बेहद प्रभावशाली सरसी छंद लिखे हैं आपने जिसके लिए पुनः बधाई |"
yesterday
Hariom Shrivastava replied to मिथिलेश वामनकर's discussion मासिक साहित्यिक संगोष्ठी ओबीओ चेप्टर भोपाल : सितम्बर 2017 :: एक रपट
"अत्यंत सफल आयोजन हेतु सभी सम्मलित रचनाकारों को एवं शानदार रिपोर्टिंग हेतु आदरणीय मिथिलेश जी को हार्दिक बधाई।"
yesterday
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post सरसी छंद -
"हार्दिक आभार आदरणीया कल्पना जी। पारावार यानी असीमित। खुशियों का पारावार न रहा।"
yesterday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Hariom Shrivastava's blog post सरसी छंद -
"आदरणीय पारावार के माने ? बहुत ही सुंदर सरसी छंद रचे हैं आपने | हार्दिक बधाई आपको |"
Saturday
Hariom Shrivastava posted a blog post

सरसी छंद -

1-जब से जीवन में आया है, साथी तेरा प्यार।तब से शीतल और सुगंधित,चलने लगी बयार।।उठने लगा ज्वार नस-नस में, आभासित मधुमास।प्रिय मैं तो धनवान हो गया, तुम हो मेरे पास।।2-आँखों ही आँखों में अलिखित, जब हो गया करार।ख्वाब हकीकत होते देखा, मैंने पहली बार।।पंख लगे मेरी खुशियों को, रहा न पारावार।आसमान में उड़ा ले गया, साथी तेरा प्यार।।3-जीवन की अनजान डगर पर, कदम बढ़ाए साथ।हम दोंनों ने थाम लिथा था, इक दूजे का हाथ।।कभी-कभी संघर्षों में जब, सफर लगा दुष्वार।तब-तब मेरा बना हौसला, साथी तेरा प्यार।।4-पथरीली राहों पर…See More
Saturday
Hariom Shrivastava commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s page OBO Logo
"सभी शानदार। जिस क्रम में लोगो हैं,उसी क्रम से पसंद हैं।"
Friday
Hariom Shrivastava posted a blog post

कुण्डलिया छंद - (जी एस टी पर)

1-आया है जी एस टी, ऐसा एक विधान।सुगम रहेगा टैक्स यह, मिटे सभी व्यवधान।।मिटे सभी व्यवधान, प्रणाली सरल रहेगी।फैलेगा व्यापार, चैन की गंग बहेगी।।कर की दरें समान, हटा जाँचों का साया।भारत भर में आज, एक ऐसा कर आया।।2-सारी जनता खुश हुई, जागी आधी रात।लगता है जी एस टी, बदलेगा हालात।।बदलेगा हालात, यही कहकर भरमाया।ऐसे खुश हैं लोग, लगा जैसे कुछ पाया।।बना दिया माहौल, प्रचारित करके भारी।देना होगा टैक्स, मगर खुश जनता सारी।।(मौलिक व अप्रकाशित)**हरिओम श्रीवास्तव**See More
Aug 8
vijay nikore commented on Hariom Shrivastava's blog post दोहे - (गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष में)
"दोहे अच्छे लगे। बधाई।"
Jul 13
Nilesh Shevgaonkar commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद - (जी एस टी पर)
"मौलिक और अप्रकाशित लिखना आवश्यक है नियमों के तहत. सादर "
Jul 11
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Hariom Shrivastava's blog post दोहे - (गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष में)
"आ० गए  के स्थान पर गये  तथा क्षमताए  के स्थान पर क्षमताये  उपयक्त होगा . सादर ."
Jul 10
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Hariom Shrivastava's blog post दुमदार दोहे --
"आ० अनुज भंडारी जी हिन्दी में  यदि अनुस्वार चन्द्र  के साथ है तो वह  एक मात्रिक ही होता है आतः यहाँ  सँग की मात्रा 11  ही है जो सही है ------------ पर  ----ताजो तख्त  के प्रयोग से बचना चाहिए था . …"
Jul 10
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post दुमदार दोहे --
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत ख़ूब वाह, अच्छा सन्देश दे रहे हैं आपके दुमदार दोहे,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 10

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Hariom Shrivastava's blog post दुमदार दोहे --
"आदरनीय हरि ओम भाई , जीवन से जुड़े दुम दार होहों के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ । आदरणीय - संग = 21 लिया जना चाहिये ,,, सँग में प्रभु का ध्यान   ... की मात्रा 12 हो रहीं हैं"
Jul 10
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post दोहे - (गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष में)
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,गुरु पूर्णिमा पर गुरु को समर्पित बहुत उम्दा दोहे रचे आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें । हर दोहे की दूसरी पंक्ति में 'जान सके तो जान'लेने का कोई विशेष कारण है क्या ?"
Jul 10
Mohammed Arif commented on Hariom Shrivastava's blog post दुमदार दोहे --
"आदरणीय हरिओम जी आदाब,बेहतरीन दुमदार दोहों की प्रस्तुति । बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 10
Mohammed Arif commented on Hariom Shrivastava's blog post दोहे - (गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष में)
"आदरणीय हरिओम जी आदाब, गुरु की गरिमा-गौरव को रेखांंकित करते बेहतरीन दोहे ।बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 10

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, M.P.
Native Place
Datia, M.P.
Profession
Former Commercial Tax Officer

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 4:56pm on April 20, 2017, Hariom Shrivastava said…
सादर आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी।
At 9:53pm on April 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

Hariom Shrivastava's Blog

सरसी छंद -

1-

जब से जीवन में आया है, साथी तेरा प्यार।

तब से शीतल और सुगंधित,चलने लगी बयार।।

उठने लगा ज्वार नस-नस में, आभासित मधुमास।

प्रिय मैं तो धनवान हो गया, तुम हो मेरे पास।।

2-

आँखों ही आँखों में अलिखित, जब हो गया करार।

ख्वाब हकीकत होते देखा, मैंने पहली बार।।

पंख लगे मेरी खुशियों को, रहा न पारावार।

आसमान में उड़ा ले गया, साथी तेरा प्यार।।

3-

जीवन की अनजान डगर पर, कदम बढ़ाए साथ।

हम दोंनों ने थाम लिथा था, इक दूजे का हाथ।।

कभी-कभी संघर्षों… Continue

Posted on September 22, 2017 at 7:05pm — 3 Comments

दोहे - (गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष में)

आई है गुरु पूर्णिमा, इसका लें संज्ञान।

गुरु हैं सागर ज्ञान के, जान सके तो जान।।1।।



कोई कितना भी रहे, अद्भुत प्रतिभावान।

गुरु ही उसे निखारते, जान सके तो जान।।2।।



मठाधीश जो बन गए, बाँट रहे हैं ज्ञान।

उनके असली रूप को, जान सके तो जान।।3।।



गुरु की महिमा जानिए, गुरु बिन मिले न ज्ञान।

गुरु में प्रभु का रूप है, जान सके तो जान।।4।।



गुरु चाहें तो डाल दें, मुर्दे में भी जान।

क्षमताएं उनकीं अनत, जान सके तो जान।।5।।

(मौलिक व… Continue

Posted on July 9, 2017 at 6:34pm — 5 Comments

दुमदार दोहे --

1-

कौन सुखी संसार में, जिसे न हो व्यवधान।

होती बुद्धि विवेक से, हर मुश्किल आसान।।

निरापद किसको देखा।।

2-

विपदा हो जब सामने, मुश्किल में हो जान।

ऐसे में हिम्मत रखें, सँग में प्रभु का ध्यान।।

आपदा टल जाएगी।।

3-

मुश्किल का मिलता नहीं, जब कोई भी तोड़।

अंदर ही अंदर वही, लेती रक्त निचोड़।।

आदमी घुटता रहता।।

4-

होती मुश्किल वक्त में, रिश्तों की पहचान।

सब दिन होते हैं नहीं, हरदम एक समान।।

परख सबकी हो जाती।।

5-

चुप रहकर… Continue

Posted on July 8, 2017 at 11:46pm — 7 Comments

कुण्डलिया छंद - (जी एस टी पर)

1-

आया है जी एस टी, ऐसा एक विधान।

सुगम रहेगा टैक्स यह, मिटे सभी व्यवधान।।

मिटे सभी व्यवधान, प्रणाली सरल रहेगी।

फैलेगा व्यापार, चैन की गंग बहेगी।।

कर की दरें समान, हटा जाँचों का साया।

भारत भर में आज, एक ऐसा कर आया।।

2-

सारी जनता खुश हुई, जागी आधी रात।

लगता है जी एस टी, बदलेगा हालात।।

बदलेगा हालात, यही कहकर भरमाया।

ऐसे खुश हैं लोग, लगा जैसे कुछ पाया।।

बना दिया माहौल, प्रचारित करके भारी।

देना होगा टैक्स, मगर खुश जनता… Continue

Posted on July 2, 2017 at 12:30am — 5 Comments

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"आद० महेंद्र कुमार जी, ग़ज़ल पर शिरकत और सुखन नवाजी का तहे दिल से शुक्रिया | "
10 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"आद० दिनेश कुमार जी, ग़ज़ल पर शिरकत और सुखन नवाजी का तहे दिल से शुक्रिया  "
10 minutes ago
Mohammed Arif commented on Rohit dobriyal"मल्हार"'s blog post ये कैसे हो गया
"प्रिय रोहित जी आदाब, अच्छी रचना । यह रचना आपने किस छांदसिक विधान में लिखी है, बताने का कष्ट करें?…"
11 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"आद० राजनवादवी जी,  ग़ज़ल पर शिरकत और सुखन नवाजी का तहे दिल से शुक्रिया. इस्स्लाह के लिए…"
11 minutes ago
Mohammed Arif commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वक़्त कुछ ऐसा मेरे साथ गुज़ारा उसने
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी आदाब, बहुत ही मारक क्षमता वाली ग़ज़ल का तोहफ़ा दिया आपने । हर शे'र माक़ूल…"
14 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"जनाब अफरोज़ साहब ,ग़ज़ल  पर शिरकत और सुखन नवाजी का तहे दिल से शुक्रिया "
16 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"आद० सुशील सरना  जी ग़ज़ल पर शिरकत और सुखन नवाजी का तहे दिल से शुक्रिया मेरा लेखन सार्थक हुआ "
17 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on rajesh kumari's blog post आईने में सिंगार कौन करे (फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')
"आद० मोहम्मद आरिफ जी ग़ज़ल पर शिरकत और सुखन नवाजी का तहे दिल से शुक्रिया |"
18 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Samar kabeer's blog post ग़ज़ल बतौर-ए-ख़ास ओबीओ की नज़्र
"फिर ख़ुशी में रुला गया हमको एक सफ़्हा किताब का तेरी   आद० समर भाई जी आपकी ये ग़ज़ल पुनः अभिभूत कर…"
20 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )
"जनाब दिनेश कुमार साहिब ,सुन्दर गज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
26 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"जनाब दिनेश कुमार साहिब ,आपकी गज़ल में शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
30 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल -तरही -2(उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ )
"जनाब महेन्द्र कुमार साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया"
31 minutes ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service