For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Hariom Shrivastava
Share
 

Hariom Shrivastava's Page

Latest Activity

vijay nikore commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हरि ओम जी, छ्न्द अच्छे लगे। बधाई।"
Jun 18
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"हार्दिक आभार आदरणीय श्लेष चंद्राकर जी।"
Jun 15
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"वाह,वाहह,बहुत सुंदर रचना आदरणीय डॉ.टी.आर.शुकुल जी। प्रदूषण की भभक से चेतना थर्रा गई.. बहुत खूब।"
Jun 15
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"वाह,पर्यावरण पर बहुत सुंदर कुण्डलिया छंद आदरणीय श्लेष चंद्राकर जी।"
Jun 15
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"वाह,बहुत सुंदर आदरणीय दयाराम मेठानी जी। कुदरत से बैर न बढ़ाने की बढ़िया सलाह।"
Jun 15
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"हार्दिक आभार आदरणीय श्लेष चंद्राकर जी।"
Jun 15
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"कुण्डलिया छंद-   (विषय-पर्यावरण) ========================= आबादी    बढ़ती  गई,  कटे  निरंतर  पेड़। क्रुद्ध प्रकृति हंटर लिए, चमड़ी  रही उधेड़।। चमड़ी   रही  उधेड़, उच्चतम पहुँचा…"
Jun 15
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छे कुण्डलिया छन्द लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 11
Hariom Shrivastava posted a blog post

कुण्डलिया छंद-

1- तुलसी बाबा कह गए, परहित सरिस न धर्म। परपीड़ा सम है नहीं, अधमाई का कर्म।। अधमाई का कर्म, मर्म यह जिसने जाना।उसको ही नरश्रेष्ठ, जगत ने भी है माना।।जहाँ प्रेम सौहार्द, वहीं है काशी-काबा।परहित सरिस न धर्म, कह गए तुलसी बाबा।।2-सबको ही यह ज्ञात है, परहित सरिस न धर्म।किंतु आज वह चैन में, जिसके कुत्सित कर्म।।जिसके कुत्सित कर्म, उसी के वारे न्यारे।झूठ कपट छल छिद्र, स्वार्थ ने पैर पसारे।।मिथ्या पाले दम्भ, आदमी भूला रब को।रब को प्यारा धर्म, ज्ञान इसका भी सबको।।(मौलिक व अप्रकाशित)**हरिओम श्रीवास्तव**See More
Jun 7
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-(विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में)
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,पर्यावरण दिवस पर अच्छे छन्द लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 7
Hariom Shrivastava posted a blog post

कुण्डलिया छंद-(विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में)

1-हरियाली  कम  हो  गई, हुई  प्रदूषित  वायु।शनै-शनै कम हो रही,अब मनुष्य की आयु।। अब मनुष्य की आयु, धरा पर  संकट भारी।पर्यावरण   सुधार, विश्व  में  हैं  अब  जारी।।दिवस मनाकर एक,मुक्ति क्या मिलने वाली।इसका सिर्फ निदान, बढ़े फिर से हरियाली।।2-जीवन  को  संकट  हुआ, करते  सभी  प्रलाप।पर्यावरण  बिगड़  गया, बढ़ा  धरा  का  ताप।।बढ़ा   धरा  का   ताप, गर्क  होता  अब  बेड़ा।पहले  बिना  विचार, प्रकृति को  हमने  छेड़ा।।अब भी एक उपाय, करें हम विकसित वन को।इस   धरती   पर   पेड़, बचा  लेंगें  जीवन  को।।(मौलिक व…See More
Jun 6
Hariom Shrivastava commented on मोहन बेगोवाल's blog post इक कदम (लघुकथा)
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी,मझे ज्ञात नहीं कि आप कब से लघु कथाएँ लिख रहें हैं और कैसी लिखते हैं? लेकिन यह कथा बहुत कमजोर जान पड़ी। भाषा में सुधार की महती आवश्यकता है।"
Jun 3
Hariom Shrivastava commented on Sushil Sarna's blog post ज़िंदगी ... तीन क्षणिकाएँ
"वाहह,वाहहहह,बहुत सुंदर क्षणिकाएँ"
Jun 3
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब। "
Jun 3
Hariom Shrivastava commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी।। "
Jun 3

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, M.P.
Native Place
Datia, M.P.
Profession
Former Commercial Tax Officer

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:28pm on May 12, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी बहुत शुक्रिया हौसला बढाने का आपने ठीक फ़रमाया ' लुटे ' मेरी ग़लती है
At 12:29pm on April 16, 2018, Dr.Rama Dwivedi said…

ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु  समस्त पदाधिकारियों का हार्दिक आभार एवं सादर नमन !

At 12:25pm on April 16, 2018, Dr.Rama Dwivedi said…

ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु बहुत -बहुत आभार आदरणीय Hariom Shrivastava ji 

At 4:56pm on April 20, 2017, Hariom Shrivastava said…
सादर आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी।
At 9:53pm on April 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

Hariom Shrivastava's Blog

कुण्डलिया छंद-

1-

तुलसी बाबा कह गए, परहित सरिस न धर्म।

परपीड़ा सम है नहीं, अधमाई का कर्म।।

अधमाई का कर्म, मर्म यह जिसने जाना।

उसको ही नरश्रेष्ठ, जगत ने भी है माना।।

जहाँ प्रेम सौहार्द, वहीं है काशी-काबा।

परहित सरिस न धर्म, कह गए तुलसी बाबा।।

2-

सबको ही यह ज्ञात है, परहित सरिस न धर्म।

किंतु आज वह चैन में, जिसके कुत्सित कर्म।।

जिसके कुत्सित कर्म, उसी के वारे न्यारे।

झूठ कपट छल छिद्र, स्वार्थ ने पैर पसारे।।

मिथ्या पाले दम्भ, आदमी भूला रब को।

रब…

Continue

Posted on June 7, 2019 at 7:11pm — 2 Comments

कुण्डलिया छंद-(विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में)

1-

हरियाली  कम  हो  गई, हुई  प्रदूषित  वायु।

शनै-शनै कम हो रही,अब मनुष्य की आयु।।

अब मनुष्य की आयु, धरा पर  संकट भारी।

पर्यावरण   सुधार, विश्व  में  हैं  अब  जारी।।

दिवस मनाकर एक,मुक्ति क्या मिलने वाली।

इसका सिर्फ निदान, बढ़े फिर से हरियाली।।

2-

जीवन  को  संकट  हुआ, करते  सभी  प्रलाप।

पर्यावरण  बिगड़  गया, बढ़ा  धरा  का  ताप।।

बढ़ा   धरा  का   ताप, गर्क  होता  अब  बेड़ा।

पहले  बिना  विचार, प्रकृति को  हमने  छेड़ा।।

अब भी एक उपाय, करें हम विकसित वन…

Continue

Posted on June 5, 2019 at 8:12pm — 1 Comment

कुण्डलिया छंद-

1-

भाई भाई के लिए, हो जाता कुर्बान।

रिश्ता है यह खून का, ईश्वर का वरदान।।

ईश्वर का वरदान, नहीं है जिसका सानी।

पाण्डव हों या राम, सभी की यही कहानी।।

सुलझाकर मतभेद, न मन में रखें खटाई।

बुरे वक्त में काम, सिर्फ आता है भाई।।

2-

भाई का रिश्ता अमर, जैसे लक्ष्मण राम।

मगर विभीषण ने किया, इसे बहुत बदनाम।।

इसे बहुत बदनाम, और भेदी कहलाया।

देकर सारे भेद, नाश कुल का करवाया।।

तुलसी ने रच ग्रंथ, इन्हीं की महिमा गाई।

दशरथ नंदन राम, भरत लक्ष्मण…

Continue

Posted on May 17, 2019 at 9:40am — 4 Comments

चतुष्पदी -

धरती  से  तो   आसमान   का,  हो   जाता   अनुमान।
किंतु न खुद की छत से दिखता,खुद का कभी मकान।।
जो   जमीन   पर   पैर  जमाकर, करे   लक्ष्य   संधान।
वही   बनाता   है   इस   जग  में, नये-नये    प्रतिमान।।

(मौलिक व अप्रकाशित)
-हरिओम श्रीवास्तव-

Posted on May 14, 2019 at 2:00pm — 4 Comments

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer left a comment for Samar kabeer
"अब एडिट नहीं होगा,संकलन से पहले,वहाँ लिख दें टंकण त्रुटि है ।"
23 minutes ago
dandpani nahak left a comment for Samar kabeer
"परम आदरणीय जनाब समर कबीर साहब आदाब, बहुत शुक्रिया आपका बस आपकी कृपा यूँ ही बनी रहे ! आपने ठीक कहा…"
38 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"बहना राजेश कुमारी जी आदाब,तरही  मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ…"
42 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'आँख मौसम ने फिराई, रौ…"
48 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब दण्डपाणि "नाहक़" जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें…"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"सच के पैकर में निहाँ झूठ सरासर निकला हमने गौहर जिसे समझा था वो पत्थर निकला कद से औक़ात समझने की…"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब आसिफ़ ज़ैदी साहिब आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल अभी कुछ और समय चाहती है…"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,बहुत समय बाद ओबीओ के तरही मुशायरे में आपको देख कर ख़ुशी हुई । तरही…"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय दण्डपाणी भाई , बढिया कही है ग़ज़ल , बधाई"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आदरणीय आसिफ भाई , बधाई अच्छी ग़ज़ल कही ! मुख फाड़ेगा जो कलयुग तो ये सतयुग ने कहा…"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आ. सुरेंदर भाई ग़ज़ल अच्छी कही , बधाई आपको"
2 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"आँख मौसम ने फिराई, रौ फिरा कर निकला। फिर घटाओं की जफ़ा से जला इक घर निकला।1 सुर्ख़ियों में हो गईं आज…"
4 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service