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Hari Prakash Dubey
  • Male
  • Haridwar,Uttarakhand
  • India
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सुनील प्रसाद(शाहाबादी) commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :कहानी
"सुन्दर सार्थक संदेश देती कथा।"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :कहानी
"बहुत ही शानदार ढंग से गहरे भाबो का चित्रण किया है ..सादर बधाई"
yesterday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :कहानी
"आ०  दीदी  श्री ने जो कहा , उसे धान में रखिये , नाटक में सबसे छोटा एकांकी होता है उस एक अंक में कुछ दृश्य होते है   लघु कथा भी बस एक दृश्य ही है . सादर ."
Friday
Hari Prakash Dubey posted a blog post

कागज़ की नाव :कहानी

“यार अच्छी-खासी नौकरी है तुम्हारी ये दिन रात इंटरनेट और मोबाइल पर क्या खेल खेलते रहते हो, थोड़ा हम लोगों के पास भी बैठा करो, पिता ने बड़ी ही मित्रतापूर्वक भाव से ‘आनंद’ से पूछा !आनंद ने अपना लैपटॉप बंद करते हुए बड़े ही सहज भाव से कहा “कुछ नहीं पिताजी आपकी समझ से बाहर है यह सब, जब मैं बड़ा आदमी बन जाऊँगा तब आपको अपने आप पता चल जाएगा !”पिता अपना सा मुहँ लेकर खामोश हो गए तभी आनंद की माँ आ गईं और उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, बेटा सबकुछ तो ठीक चल रहा है, अच्छी खासी तन्खाव्ह है तुम्हारी, हम भी तुम से कुछ…See More
Jun 19

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :लघुकथा
"एक सच्चा सार्थक सन्देश दे रही है ये कहानी बहुत अच्छी है किन्तु ये लघु कथा की श्रेणी में नहीं आएगी इसमें बहुत से काल खंड हैं इसे कहानी की श्रेणी में रख सकते हैं .बहुत बहुत  बधाई आपको ."
Jun 18
Ravi Prabhakar commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :लघुकथा
"आदरणीय हरि दुबे भई जी, मुझे यह रचना किसी भी प्रकार से लघुकथा नहीं लगी। सादर"
Jun 18
Hari Prakash Dubey posted a blog post

कागज़ की नाव :कहानी

“यार अच्छी-खासी नौकरी है तुम्हारी ये दिन रात इंटरनेट और मोबाइल पर क्या खेल खेलते रहते हो, थोड़ा हम लोगों के पास भी बैठा करो, पिता ने बड़ी ही मित्रतापूर्वक भाव से ‘आनंद’ से पूछा !आनंद ने अपना लैपटॉप बंद करते हुए बड़े ही सहज भाव से कहा “कुछ नहीं पिताजी आपकी समझ से बाहर है यह सब, जब मैं बड़ा आदमी बन जाऊँगा तब आपको अपने आप पता चल जाएगा !”पिता अपना सा मुहँ लेकर खामोश हो गए तभी आनंद की माँ आ गईं और उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, बेटा सबकुछ तो ठीक चल रहा है, अच्छी खासी तन्खाव्ह है तुम्हारी, हम भी तुम से कुछ…See More
Jun 16
SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR commented on Hari Prakash Dubey's blog post धारा-387 :लघुकथा: हरि प्रकाश दुबे
"अच्छा सन्देश देती हुई सुन्दर लघु कथा..बढ़िया सीख भ्रमर ५ "
Mar 5, 2016
pratibha pande commented on Hari Prakash Dubey's blog post धारा-387 :लघुकथा: हरि प्रकाश दुबे
"  फोन के  साथ  जुड़े खतरों से आगाह करती अच्छी  रचना  ,हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय हरी प्रकाश जी "
Mar 3, 2016
TEJ VEER SINGH commented on Hari Prakash Dubey's blog post धारा-387 :लघुकथा: हरि प्रकाश दुबे
"हार्दिक बधाई आदरणीय हरि प्रकाश जी!अच्छी एवम  शिक्षाप्रद प्रस्तुति!"
Mar 3, 2016
UMASHANKER MISHRA commented on Hari Prakash Dubey's blog post धारा-387 :लघुकथा: हरि प्रकाश दुबे
"बढ़े धोके हैं विश्वास में .....सोच समझ के ...यहाँ जीना दुश्वार हो गया... बहुत अच्छी लघु कथा बढ़िया सीख  हार्दिक बधाई हरी प्रसाद जी "
Mar 1, 2016
Sushil Sarna commented on Hari Prakash Dubey's blog post धारा-387 :लघुकथा: हरि प्रकाश दुबे
"बिलकुल सही बात कही है आदरणीय।  आजकल यही सब हो रहा है। शातिरों के शिकार अक्सर शरीफ ही हुआ करते हैं। इस संदेशप्रद लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई सर। "
Mar 1, 2016
JAWAHAR LAL SINGH commented on Hari Prakash Dubey's blog post धारा-387 :लघुकथा: हरि प्रकाश दुबे
"वाह बेहतरीन लघुकथा हुई है ...आजकल ऐसा होने भी लगा है ...अपना फोन बचाकर रखना चाहिए अच्छी सीख. आदरणीय हरिप्रकाश दुबे जी!"
Mar 1, 2016
Hari Prakash Dubey posted blog posts
Mar 1, 2016
Manan Kumar singh commented on Hari Prakash Dubey's blog post धारा-387 :लघुकथा: हरि प्रकाश दुबे
"भरोसा कत्ल कह लें। अच्छी कथा हुई है आदरणीय।"
Feb 29, 2016
Hari Prakash Dubey posted a blog post

धारा-387 :लघुकथा: हरि प्रकाश दुबे

“अंकल, जरा अपना मोबाइल फ़ोन दे दीजिये I"“पर क्यों बेटा, तुम्हारे फ़ोन को क्या हुआ?”“घर पर पिताजी बीमार हैं, माँ से बात कर रहा था, तभी फ़ोन की बैटरी डिस्चार्ज हो गयी, और देखिये ना यहाँ पर कोई चार्जिंग की जगह भी नहीं है, प्लीज अंकल, ज्यादा बात नहीं करूंगा, चाहे तो पैसे .. I"“अरे नहीं, पैसे की कोई बात नहीं है बेटा, ये लो आराम से बात करो I"इतना कहते हुए शर्मा जी ने अपना फ़ोन उस नौजवान को दे दिया, और कुछ ही देर बाद वह लड़का वापस आया और बोला, “आपका बहुत-बहुत धन्यवाद अंकल, अब जाकर मन को तसल्ली हुई है,…See More
Feb 29, 2016

Profile Information

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Haridwar Uttarakhand
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Haridwar
Profession
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कागज़ की नाव :कहानी

“यार अच्छी-खासी नौकरी है तुम्हारी ये दिन रात इंटरनेट और मोबाइल पर क्या खेल खेलते रहते हो, थोड़ा हम लोगों के पास भी बैठा करो, पिता ने बड़ी ही मित्रतापूर्वक भाव से ‘आनंद’ से पूछा !

आनंद ने अपना लैपटॉप बंद करते हुए बड़े ही सहज भाव से कहा “कुछ नहीं पिताजी आपकी समझ से बाहर है यह सब, जब मैं बड़ा आदमी बन जाऊँगा तब आपको अपने आप पता चल जाएगा !”

पिता अपना सा मुहँ लेकर खामोश हो गए तभी आनंद की माँ आ गईं और उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, बेटा सबकुछ तो ठीक चल रहा है, अच्छी खासी तन्खाव्ह है…

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Posted on June 16, 2017 at 3:30pm — 5 Comments

धारा-387 :लघुकथा: हरि प्रकाश दुबे

“अंकल, जरा अपना मोबाइल फ़ोन दे दीजिये I"

“पर क्यों बेटा, तुम्हारे फ़ोन को क्या हुआ?”

“घर पर पिताजी बीमार हैं, माँ से बात कर रहा था, तभी फ़ोन की बैटरी डिस्चार्ज हो गयी, और देखिये ना यहाँ पर कोई चार्जिंग की जगह भी नहीं है, प्लीज अंकल, ज्यादा बात नहीं करूंगा, चाहे तो पैसे .. I"

“अरे नहीं, पैसे की कोई बात नहीं है बेटा, ये लो आराम से बात करो I"इतना कहते हुए शर्मा जी ने अपना फ़ोन उस नौजवान को दे दिया, और कुछ ही देर बाद वह लड़का वापस आया और बोला, “आपका…

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Posted on March 1, 2016 at 4:30pm — 7 Comments

स्टाफ :लघुकथा: हरि प्रकाश दुबे

“आज तो गज़ब की टाई पहनी है अमित, बहुत जम रहे हो यार, कहाँ से ली?”                  

“नेहरू प्लेस से लाया हूँ साले, 90 रूपये की है, चाहिये तो उतार दूं, बता?”

“अबे भड़क क्यों रहा है?, और सुबह-सुबह सिगरेट पर सिगरेट सूते चले जा रहा है, कोई टेंशन है क्या?”

“सॉरी यार, अभी बॉस ने मेरी तबियत से क्लास ले ली, दिमाग खराब कर दिया साले नेI” 

“भाई इतनी गाली क्यों दे रहा है, क्या हो गया?"

“अरे यार, कह रहा है, आज अगर धंधा नहीं आया तो कल से आने की जरूरत नहीं है I”, ”पता नहीं किस…

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Posted on February 25, 2016 at 11:00am — 6 Comments

लाल कलम :लघुकथा: हरि प्रकाश दुबे

आख़िरकार आज पिछले सत्रह सालों की साधना रंग ला ही गई, कसम से क्या–क्या पापड़ बेलने पड़े इस सचिवालय तक पहुँचने के लिए... नए सचिव साहब, मन ही मन सोचते हुए, कभी अपने खूबसूरत दफ्तर और कभी अपने स्वागत में प्रस्तुत फूलों के अम्बार को देख–देख कर मुस्करा रहे थे कि तभी, दरवाजे की घंटी बज उठी, एक आवाज आयी “क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ ? “जी, फ़रमाइए।”

“जय हिन्द सर, मै आपका ‘वैयक्तिक सहायक’ हूँ, आपका इस नए कार्य क्षेत्र में स्वागत है, मेरी तरफ से ये तुच्छ भेंट स्वीकार कीजिये साहब।”

“ओह ! धन्यवाद आपका,…

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Posted on February 22, 2016 at 10:06am — 6 Comments

Comment Wall (11 comments)

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At 7:01pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 10:39am on January 23, 2015, Dr. Vijai Shanker said…
स्वागत है आपका आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी. आपकी मित्रता एक सम्मान है मेरे लिए।
सादर।
At 4:56pm on January 9, 2015, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय हरिप्रकाश जी ..आपका मित्र होना मेरे लिए सुखद है ..आपकी रचना को माह की श्रेष्ठ  रचना का सम्मान मिला इस सफलता के लिए आपको ढेर सारी बधाई सादर 

At 7:52pm on January 7, 2015, harivallabh sharma said…

आदरणीय Hari Prakash Dubey साहब स्वागत आपका, एवं माह की श्रेष्ठ आपकी रचना हेतु चयनित होने पर हार्दिक बधाई स्वीकारें..सादर.

At 5:11pm on January 3, 2015, vikram singh saini said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय हरि प्रकाश जी

At 9:55pm on December 29, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय  हरी प्रकाश दुबे  जी .... नमस्कार .... क्षमा चाहता हूँ लाइव चैट पर आपका मेसेज देख नहीं पाया तब मैं राहुल दांगी जी की ग़ज़ल पढ़ कर उस पर टीप लिख रहा था ... सादर 

At 11:51pm on December 15, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय  हरी प्रकाश दुबे  जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना " कविता : तुम्हारा घोंसला" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:34pm on November 20, 2014, Rita Gupta said…

धन्यवाद ,आभार आपका। 

At 5:57pm on November 10, 2014, vijay nikore said…

मित्रता का हाथ बढ़ाने के लिए आभार।

सादर,

विजय निकोर

At 10:16am on November 7, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय हरिप्रकाश जी

 
 
 

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