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वेदना का गीत:-मोहित मिश्रा

चिर अखण्डित वेदना को कर समर्पित प्राण अपने-

ध्वंस के अवशेष पर नित नेह का दीपक जलाना,

अब भी है प्रिय कर्म मेरा, याद कर आंसू बहाना।

मौन अधरों पर तरंगित

है व्यथा का पूर्ण सागर,

शून्य पथ पर हेरती है

दृष्टि तुमको छल-छलाकर,

है असम्भव आगमन इस तज्य मंदिर से हृदय में-

पर प्रणय की पूजिता की याद में ख़ुद को भुलाना,

अब भी है प्रिय कर्म मेरा, याद कर आंसू बहाना।

श्वास में क्रंदन छुपाए

चढ़ रहे  संताप-रथ पर,

मोम के दुकूल पहने

बढ़ रहे अंगार-पथ पर,

ज्ञात है दुष्चक्र नियति का नहीं है मेरे बस में-

मेरे बस में बस सिसकना और तड़पकर दिल जलाना,

अब भी है प्रिय कर्म मेरा, याद कर आंसू बहाना।

प्रेम के किसलय सुहाने 

गिर गए उन्माद खोकर,

संग के मृदु स्वप्न सारे

शेष केवल क्षार होकर ,

मर्म के छालों से उठती टीस की दारूण लहर को-

उम्र भर आधार देकर है विरह का ऋण चुकाना,

अब भी है प्रिय कर्म मेरा, याद कर आंसू बहाना।

अश्रु-सिंचित उर व्यथा यह

तिक्त मधुरिम सी कहानी, 

ज्वाल की उर्मि समेटे

आँख का दो बूँद पानी,

गा रहा इतिहास मेरा श्वास का उच्छ्वास पल पल-

था परम सौभाग्य, तेरा कुछ दिनों का संग पाना,

अब भी है प्रिय कर्म मेरा, याद कर आंसू बहाना।

मौलिक और अप्रकाशित 

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on February 6, 2019 at 10:55pm

बहुत ही सुन्दर गीत बना है, आदरणीय मोहित मिश्र जी.

मेरी पसंद की पंक्तियाँ 

उम्र भर आधार देकर है विरह का ऋण चुकाना,

अब भी है प्रिय कर्म मेरा, याद कर आंसू बहाना।

Comment by Mohit mishra (mukt) on February 5, 2019 at 8:57am

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by Mohit mishra (mukt) on February 5, 2019 at 8:56am

आदरणीय समर sir तारीफ़ का हृदय से आभार 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 5, 2019 at 5:51am

आ. भाई मोहित जी, सुंदर गीत हुआ है हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on February 4, 2019 at 4:37pm

जनाब मोहित जी आदाब,अच्छा गीत लिखा आपने,बधाई स्वीकार करें ।

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