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Awanish Dhar Dvivedi
  • Male
  • GHAZIABAD U.P
  • India
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Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल कुछ यूँ है कि कट जाए हो जैसा भीकहीं गर हो बुरा तो भी ये अनुभव ही कराता है।। बड़ा बलवान होता है समय इसकी बड़ी बातेंकोई कितना भी सँभले पर निवाला हो ही जाता है।। समय को जिन्दगी में जो समझ ले है समय उसकाअजब हैं खेल इसके ये कहाँ कुछ भी बताता है।। अगर आमाल हो तेरे समय के साथ उम्दा तोसिला देकर समय भी हौसला तेरा बढ़ाता है।। फकीरी में मजा है जिंदगी का जान ले यारानहीं छोटा बड़ा कोई समय ये भी सिखाता है।। मैं…See More
Saturday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ यह विषय अलौकिक है परब्रह्म जीव के जैसा ही। माँ इस सृष्टि की अनुपम है कारक ईश्वर है ऐसा ही।२।माता बच्चों की होती है पालक सर्जक शुभ सुखराशी। माँ की गोदी में पलते हैं अज विष्णु ईश प्रभु अघनाशी ।३।हैं शास्त्र सदा से ही कहते माँ की पद्वी सर्वोत्तम है। माँ का स्नेहामृत पाने को जग में आते पुरुषोत्तम हैं।४।हैं कभी राम बलराम रूपधर कृष्ण कन्हाई बन जाते। माता की दिव्य अलौकिकता पाकर परमेश्वर हर्षाते ।५।माँ के…See More
May 19
आशीष यादव commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post कविता
"इस पटल पर प्रकाशित होने के 6 साल बाद इस कविता को पढ़ रहा हूं। भावों को गीत बना देना, कविता बना देना एक कारीगरी है। आपने इसके साथ न्याय किया है।  मेरी तरफ से बधाई स्वीकार करें।"
May 11
आशीष यादव commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post ग़ज़ल
"जो भी बोलना चाहा आपने अच्छा बोला। बाकी कमी बेसी आदरणीय उस्ताद जन बोलना चाहेंगे।"
May 11
Awanish Dhar Dvivedi commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post ग़ज़ल
"सर नमस्कार मुझे ग़जल का ज्ञान नहीं है  अरकान आदि को नहींं जानता हूँ। बस भव में कुछ लिख देता हूँ।"
May 9
Samar kabeer commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post ग़ज़ल
"जनाब अवनीश जी आदाब, आपने इस ग़ज़ल के क्या अरकान लिए हैं ? बताने का कष्ट करें ताकि इस पर टिप्पणी करने में आसानी हो I "
Sep 15, 2022
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

गज़ल

आज हूं लाचार धीरज मैं दिखाऊँगामेहनत से राज करके मैं दिखाऊंगा।।वक़्त का है काम चलना खुद के ढर्रे परज़िन्दगी को भी मुक़द्दस मैं बनाऊँगा।।जो भी दुःखियारे हैं उनके दर्द को हूँ जानतादर्द में हमदर्द बनकर मैं हँसाऊँगा।।वक्त कब रुकता जहाँ में हो भला या हो बुराअनवरत चलता ही रहता मैं बताऊँगा।हौसलों से ही तो होती हैं उड़ानें आसमां मेंबन परिन्दा जोश के पर मैं लगाऊँगा।।आज के इस दौर में छाया घना कुहरा तो क्या?धैर्य रख अवनीश अच्छे दिन मैं लाऊँगा।।   मौलिक एवं अप्रकाशित        अवनीश      ३१/५/२०२२See More
Aug 30, 2022
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

ग़ज़ल

दिल में जो छुपाया है बोलना चाहेंगेउसे दिल से मिटाया है बोलना चाहेंगे।करेंगे जतन मिटादें उसकी यादों कोउसे हमने भुलाया है बोलना चाहेंगे।वो हरगिज़ न रहेगा यादों में मिरीयाद बनके सताया है बोलना चाहेंगे।बड़ा गुरुर था उसे मुझे अपने प्यार परहालात ने मिटाया है बोलना चाहेंगे।फलक के चाँद से बातें किया रातें जगी मैंनेमाहताब भी शर्माया है बोलना चाहेंगे।अच्छा सिला दिया है मेरे यार ने मुझे जो भी खोया पाया है बोलना चाहेंगे।दुनियादारी भी होती है क्या खूब अवनीशअपनों ने सितम ढाया है बोलना चाहेंगे।जहाँ में कुछ यहाँ…See More
Aug 27, 2022
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post गज़ल
"आदरणीय अवनीश धर द्विवेदी जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें, आपकी इस ग़ज़ल के अरकान, रदीफ़ और क़वाफ़ी क्या हैं?  अरकान, रदीफ़, क़वाफ़ी और ग़ज़ल के बुनियादी उसूल जानने के लिए इसी मंच पर उपलब्ध 'ग़ज़ल की कक्षा' ग्रुप…"
Aug 23, 2022
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

गज़ल

आज हूं लाचार धीरज मैं दिखाऊँगामेहनत से राज करके मैं दिखाऊंगा।।वक़्त का है काम चलना खुद के ढर्रे परज़िन्दगी को भी मुक़द्दस मैं बनाऊँगा।।जो भी दुःखियारे हैं उनके दर्द को हूँ जानतादर्द में हमदर्द बनकर मैं हँसाऊँगा।।वक्त कब रुकता जहाँ में हो भला या हो बुराअनवरत चलता ही रहता मैं बताऊँगा।हौसलों से ही तो होती हैं उड़ानें आसमां मेंबन परिन्दा जोश के पर मैं लगाऊँगा।।आज के इस दौर में छाया घना कुहरा तो क्या?धैर्य रख अवनीश अच्छे दिन मैं लाऊँगा।।   मौलिक एवं अप्रकाशित        अवनीश      ३१/५/२०२२See More
Aug 23, 2022
Sushil Sarna commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post फूल
"वाह आदरणीय बहुत सुंदर प्रस्तुति"
Aug 22, 2022
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post गज़ल
"आ. भाई अवनीश जी, सादर अभिवादन। सुन्दर रचना हुई है। हार्दिक बधाई."
Aug 19, 2022
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

फूल

फूलों को दिल से उगाता कोईफूल खिलते ही फोटो खिंचाता कोई।१।है बनावट की दुनियाँ जहाँ देख लोकाम बनते ही हक़ को जताता कोई।२।फूल खिलते हैं गुलशन में हरदम मगरउनके जैसी खुशी काश लाता कोई।३।रङ्ग फूलों के होते बहुत से मगरफूलों सी ताजगी क्या दिलाता कोई।४।फूल खुद टूट के भी हैं देते खुशीउनसे कुर्बां होना सीख पाता कोई।५।फूल होते हैं नाजुक बहुत ही मगरफूल सा सब्र खुद में ले आता कोई।६।खुद की कीमत पे औरों को देना खुशीकाश फूलों से ये सीख पाता कोई।७। आदमी आदमी से करे बस वफा बेवफाई को दिल से भगाता कोई।८।फूल हरदम…See More
Aug 17, 2022
Awanish Dhar Dvivedi commented on Usha Awasthi's blog post क्या दबदबा हमारा है!
"बहुत सुन्दर रचना।"
Aug 16, 2022
Awanish Dhar Dvivedi posted blog posts
Aug 14, 2022
Chetan Prakash commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post गज़ल
"कृपया, मतले के सानी  मिसरे  को कुछ  यूँ  पढ़ें :  " बहतर ख़ुदा क़सम वही तो चारागर  मिले ", धन्यवाद  !"
Aug 10, 2022

Profile Information

Gender
Male
City State
Ghaziabad
Native Place
Gorakhpur
Profession
Teaching
About me
I am a Sanskrit language teacher.in Delhi govt.

               कविता
जब हो हृदय अतिशय व्यथित
मन में उठें लहरें अमिट।
तब काव्य सरिता का निकलना
शब्द के जल से द्रवित हो
अश्रु से बन धार बहना
है यही कविता का कहना।।काव्य सरिता का...

या परम सुख की घड़ी में
याद करके जिस कड़ी को।
अपने मन मन्दिर से सुंदर
शब्द गुच्छों का निकलना
काव्य सरिता का है बहना।काव्य सरिता का....

या विरह की वेदना का
जब स्वयं वर्णन हो करना।
बिन कहे सब कुछ हो कहना
शब्द की नौका पे चढ़कर
दर्द की दरिया में बहना
है यही कविता का करना।काव्य सरिता का.....

या हृदय की वेदना में
शब्दभावों की तथा सं-
कल्पना से प्राण भरना।
और समुचित छन्दमात्रा रस
गणों से प्रिय का हो श्रृंगार करना।
काव्य सरिता का.....

है यही कविता नदी का
कलकलाते बह निकलना।
और कविता की कली का
फूल सा खिलकर महकना।
काव्य सरिता का है बहना।

मौलिक एवं अप्रकाशित।

अवनीश धर द्विवेदी।।

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समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है

 

समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।।

 

समय का खेल कुछ यूँ है कि कट जाए हो जैसा भी

कहीं गर हो बुरा तो भी ये अनुभव ही कराता है।।

 

बड़ा बलवान होता है समय इसकी बड़ी बातें

कोई कितना भी सँभले पर निवाला हो ही जाता है।।

 

समय को जिन्दगी में जो समझ ले है समय उसका

अजब हैं…

Continue

Posted on May 19, 2026 at 4:45pm

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवल

इस जग की माँ से काया है।

हम सबकी खातिर अतिपावन

माँ के आँचल की छाया है।१।

माँ यह विषय अलौकिक है

परब्रह्म जीव के जैसा ही।

माँ इस सृष्टि की अनुपम है

कारक ईश्वर है ऐसा ही।२।

माता बच्चों की होती है

पालक सर्जक शुभ सुखराशी।

माँ की गोदी में पलते हैं

अज विष्णु ईश प्रभु अघनाशी ।३।

हैं शास्त्र सदा से ही कहते

माँ की पद्वी सर्वोत्तम है।

माँ का स्नेहामृत पाने को

जग में…

Continue

Posted on May 19, 2026 at 4:42pm

ग़ज़ल

दिल में जो छुपाया है बोलना चाहेंगे

उसे दिल से मिटाया है बोलना चाहेंगे।

करेंगे जतन मिटादें उसकी यादों को

उसे हमने भुलाया है बोलना चाहेंगे।

वो हरगिज़ न रहेगा यादों में मिरी

याद बनके सताया है बोलना चाहेंगे।

बड़ा गुरुर था उसे मुझे अपने प्यार पर

हालात ने मिटाया है बोलना चाहेंगे।

फलक के चाँद से बातें किया रातें जगी मैंने

माहताब भी शर्माया है बोलना चाहेंगे।

अच्छा सिला दिया है मेरे यार ने…

Continue

Posted on August 26, 2022 at 11:09pm — 3 Comments

गज़ल

आज हूं लाचार धीरज मैं दिखाऊँगा

मेहनत से राज करके मैं दिखाऊंगा।।

वक़्त का है काम चलना खुद के ढर्रे पर

ज़िन्दगी को भी मुक़द्दस मैं बनाऊँगा।।

जो भी दुःखियारे हैं उनके दर्द को हूँ जानता

दर्द में हमदर्द बनकर मैं हँसाऊँगा।।

वक्त कब रुकता जहाँ में हो भला या हो बुरा

अनवरत चलता ही रहता मैं बताऊँगा।

हौसलों से ही तो होती हैं उड़ानें आसमां में

बन परिन्दा जोश के पर मैं लगाऊँगा।।

आज के इस दौर में…

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Posted on August 22, 2022 at 9:30pm — 1 Comment

 
 
 

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