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ग़ज़ल - (अय्यूब खान "बिस्मिल")

वज़न २२१२ २२१२ २२१२ १२

उसने दिया इनकार का पैग़ाम उम्र भर

हाँसिल नहीं कुछ बस हुआ बदनाम उम्र भर

ये मुद्दतों की प्यास है मिटती अबस तभी

अपनी नज़र से जब पिलाती जाम उम्र भर

आग़ाज़ मोहब्बत का था जब दर्द से भरा

लाज़िम मुझे सहना ही था अंजाम उम्र भर

बस एक तिरी ख्वाहिश में खोया वजूद तक

ये ज़िन्दगी भी रह गई बे-नाम उम्र भर

दिल की तिजारत दर्द से बिस्मिल किया किये

उल्फत में बस ये ही रहा एक ख़ाम उम्र भर

   **( अय्यूब खान "बिस्मिल")** 

अप्रकाशित एवं मौलिक 

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 13, 2014 at 11:31pm

आग़ाज़ मोहब्बत का था जब दर्द से भरा

लाज़िम मुझे सहना ही था अंजाम उम्र भर...........

वाह ! बहुत खूब !!

Comment by MAHIMA SHREE on January 7, 2014 at 7:49pm

आग़ाज़ मोहब्बत का था जब दर्द से भरा

लाज़िम मुझे सहना ही था अंजाम उम्र भर

बस एक तिरी ख्वाहिश में खोया वजूद तक

ये ज़िन्दगी भी रह गई बे-नाम उम्र भर..........वाह वाह क्या बात ... हार्दिक बधाईयाँ..

Comment by Ayub Khan "BismiL" on January 7, 2014 at 7:41pm

bahut bahut shukria Janaab Yograj sahab Arun Sahab Shijju Shakooor sahab Coontee sahiba Sarifa sahiba Giriraaj Sahab Ajay sahab Baidya sahab 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on January 7, 2014 at 12:07pm

//आग़ाज़ मोहब्बत का था जब दर्द से भरा
लाज़िम मुझे सहना ही था अंजाम उम्र भर//

क्या कहने हैं भाई बिस्मिल जी, यह शेअर खास हुआ है. इस सुन्दर ग़ज़ल के लिए ढेरों दाद हाज़िर है.

Comment by Abhinav Arun on January 6, 2014 at 7:58pm
आग़ाज़ मोहब्बत का था जब दर्द से भरा

लाज़िम मुझे सहना ही था अंजाम उम्र भर


बस एक तिरी ख्वाहिश में खोया वजूद तक

ये ज़िन्दगी भी रह गई बे-नाम उम्र भर
..........बहुत खूब श्री बिस्मिल जी हार्दिक मुबारकबाद !! शानदार ग़ज़ल केलिए .

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 6, 2014 at 7:54pm

बहुत सुदर गज़ल भाई बिस्मिल जी बधाई आपको

Comment by coontee mukerji on January 6, 2014 at 5:36pm

बहुत सुदर गज़ल...बधाई आपको.

Comment by Sarita Bhatia on January 6, 2014 at 9:48am

उम्दा गजल के लिए बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 6, 2014 at 7:39am

आदरणीय बिस्मिल भाई , खूबसूरत ग़ज़ल कही है , आपको बहुत बधाइयाँ ॥

Comment by Saarthi Baidyanath on January 5, 2014 at 11:17pm

आग़ाज़ मोहब्बत का था जब दर्द से भरा

लाज़िम मुझे सहना ही था अंजाम उम्र भर

दिल की तिजारत दर्द से बिस्मिल किया किये

उल्फत में बस ये ही रहा एक ख़ाम उम्र भर......जिंदाबाद अशआर ...उम्दा ग़ज़ल ! कुछ टंकण की त्रुटी रह गई है ..सुधार लें ! सादर 

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