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सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता (-रूपम कुमार 'मीत')

बह्र- 1222×4

ज़मीं भाती नहीं और आसमाँ अच्छा नहीं लगता
कहाँ ले जाएँ दिल को ये जहाँ अच्छा नहीं लगता[1]

मेरा दम शहर में घुटता है  कुछ दुख गाँव में भी हैं
यहाँ अच्छा नहीं लगता वहाँ अच्छा नहीं लगता [2]

वो अपने हाथ से जुगनू  नहीं ऊपर उड़ाता तो
सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता [3]

हमारे घर में भी ख़ुशियाँ सभी मौजूद हैं लेकिन
हमें बरसात में अपना मकाँ अच्छा नहीं लगता [4]

नहीं हो हम-सफ़र जब साथ उस तन्हा मुसाफ़िर को
सड़क से हर गुज़रता कारवाँ अच्छा नहीं लगता [5]

किसी की चाह में जब से हुए बर्बाद हमको 'मीत'
यकीं अच्छा नहीं लगता गुमाँ अच्छा नहीं लगता [6]

-रूपम कुमार 'मीत'

"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 28, 2021 at 6:04pm

बहुत उम्दा वाह

Comment by Rupam kumar -'मीत' on August 12, 2020 at 9:12am

आदरणीय सालिक सर्, आपके स्नेह और मार्गदर्शन से हृदय प्रसन्न होकर नृत्य करता है, आपका बहुत शुक्रिया सर्, आपका दिन शुभ हो।।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on August 12, 2020 at 9:11am

आदरणीय बृजेश कुमार जी, हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया, आपकी इस्लाह पर गौर करूँगा, बहुत अच्छी इस्लाह की है आपने, आपका स्नेह बना रहे।।☺️

Comment by Rupam kumar -'मीत' on August 12, 2020 at 9:09am

आदरणीया डिम्पल दीदी जी, हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया, हृदय तल से आपका शुक्रिया। आपका स्नेह बना यूँ ही बना रहे दीदी मुझपर, आपका दिन शुभ हो☺️

Comment by Rupam kumar -'मीत' on August 12, 2020 at 9:06am
  1. आदरणीय सुरेन्द्र नाथ जी, साहिब, हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया, हृदय तल से आपका शुक्रिया। आपका स्नेह बना रहे मुझपर☺️
Comment by सालिक गणवीर on August 10, 2020 at 8:56am

प्रिय रूपम कुमार

बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है आपने, शैर दर शैर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ. फीचर ब्लॉग ग़ज़ल चस्पा हुई है, इसके लिए अलग से असीमित बधाईयाँ.

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 8, 2020 at 2:52pm

बहुत ही भावपूर्ण ग़ज़ल कही है मित्र...बधाई
मेरा दम शहर में घुटता है कुछ दुख गाँव में भी हैं
यहाँ अच्छा नहीं लगता वहाँ अच्छा नहीं लगता [2]...बेहतरीन शे'र है लेकिन "यहाँ अच्छा नहीं वहाँ अच्छा नहीं"में पहले अच्छा नहीं की जगह कुछ और बेहतर हो...जैसे "यहाँ भी बेकरारी है वहाँ अच्छा नहीं लगता"

Comment by Dimple Sharma on August 8, 2020 at 12:15pm

आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' जी इस खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें। वाह बहुत उम्दा।

Comment by नाथ सोनांचली on August 7, 2020 at 4:51pm

आद0 रूपम कुमार मीत जी सादर अभिवादन

बेहतरीन ग़ज़ल पर शैर दर शैर दिली मुबारकबादक़ुबूल कीजिये

Comment by Rupam kumar -'मीत' on August 7, 2020 at 11:49am

आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया। आपने ग़ज़ल किस ज़मीन पर है यह बता कर मेरी नॉलेज में इज़ाफ़ा किया, हृदय तल से आपका शुक्रिया। आपका स्नेह बना रहे सरकार☺️

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