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बुझते नहीं अलाव. . . . (दोहा गज़ल )

बुझते नहीं अलाव .....(दोहा गज़ल )

मौन  प्रीत  के  हो गए, अंकित मन में  भाव ।
इन  भावों  के उम्र भर, बुझते नहीं  अलाव ।।

साँसों को मिलती नहीं, जब तक प्रीत की साँस,
रिसते   रहते  ह्रदय  में, मौन  प्रीत   के   घाव ।

आँखों   को   देती  रहीं , आँखें  ये  संदेश ,
दूर किनारा है बहुत , कागज की है नाव ।

अजब अगन है प्रीत की, अजब प्रीत की रीत ,
नैन  कोर  से  याद   के , होते   रहते   स्राव ।

ठहर गया है वक्त भी , मौसम  भी हैं मौन ,
पत्थर लगते मील के, गुजरे सभी पड़ाव ।

सुशील सरना / 11-5-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by Sushil Sarna on June 4, 2022 at 8:15pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 31, 2022 at 11:58am

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।

Comment by Sushil Sarna on May 26, 2022 at 12:04pm
आदरणीया रचना जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।
Comment by Rachna Bhatia on May 24, 2022 at 8:40pm

आदरणीय सुशील सरना जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई है।बधाई स्वीकार करें।

Comment by Sushil Sarna on May 14, 2022 at 9:54pm
आदरणीय जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । इंगित टंकण त्रुटि संशोधित । इस हेतु हार्दिक आभार आदरणीय जी
Comment by Samar kabeer on May 14, 2022 at 4:38pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, दोहा ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I 

'आँखें   को   देती  रहीं , आँखें  ये  संदेश '-- इस पंक्ति को यूँ कहें:-

आँखों   को   देती  रहीं , आँखें  ये  संदेश '

Comment by Sushil Sarna on May 14, 2022 at 10:52am
आदरणीय गुमनाम जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय
Comment by gumnaam pithoragarhi on May 13, 2022 at 6:19pm
वाह सुशील जी वाह अच्छी गजल हुई है । बधाई
Comment by Sushil Sarna on May 12, 2022 at 3:19pm
आदरणीय चेतन प्रकाश जी सादर प्रणाम सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय ।
Comment by Chetan Prakash on May 11, 2022 at 4:19pm

कोमल भावों को कवि की बहु-श्रुत संवेदना  से सहेजते  मार्मिक  दोहा--गज़ल  हुई  है, बधाई आपको  आ. सुशील सरना जी  !

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