For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दोहा मुक्तक .....

दोहा मुक्तक.....

अपने कृत्यों  से  कभी, देना  मत  संताप ।
माँ के चरणों में कटें, जन्म- जन्म के पाप ।
फर्ज निभाना दूध का , हरना हर तकलीफ -
बेटे को  आशीष  से, माँ  के  मिले  प्रताप ।
                     * * * *
भूले से करना नहीं, माता का  अपमान ।
देना उसके  त्याग  को, सेवा से सम्मान ।
मूरत है ये ईश की, ये  करुणा  की  धार -
माँ के चरणों में सदा, सुखी रहे सन्तान ।

सुशील सरना / 10-5-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 157

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 31, 2022 at 9:00am

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। बहुत अच्छे मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।

Comment by Sushil Sarna on May 26, 2022 at 12:05pm
आदरणीय नाथ जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय
Comment by नाथ सोनांचली on May 25, 2022 at 12:51pm

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बढ़िया दोहा मुक्तक हुआ है। बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by Sushil Sarna on May 12, 2022 at 3:20pm
आदरणीय समर कबीर जी आदाब, सर सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार आदरणीय
Comment by Samar kabeer on May 11, 2022 at 3:56pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छे दोहा मुक्तक लिखे आपने, बधाई स्वीकार करेI 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"आदरणीय चेतनप्रकाशजी, आपका रचना पर स्वागत है.  आपके बिंदु विचारणीय हैं.  आप भी तनिक और…"
5 hours ago
नाथ सोनांचली commented on नाथ सोनांचली's blog post मदिरा सवैया आधारित दो छन्द
"आद0 सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम रचना पर आपकी उपस्थिति किसी पुरस्कार से कम नहीं। हृदयतल से आभार…"
7 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
". पुनश्च ः आदरणीय सौरभ साहब नमन बहुतअच्छी गज़ल हुई है। हाँ मुझे आपके मतले के ऊला चाहता रहा उसे मगर…"
9 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"आदरणीय सौरभ साहब नमन बहुतअच्छी गज़ल हुई है। हाँ मुझे आपके मतले के ऊला चाहता रहा उसे मगर न बोल पा…"
10 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"//भाइयो, जुट जाओ/ भाइयो, जुट जा..  तकनीकी रूप से उपर्युक्त दोनों वाक्य समूहवाचक संज्ञा के…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"भाइयो, जुट जाओ/ भाइयो, जुट जा..  तकनीकी रूप से उपर्युक्त दोनों वाक्य समूहवाचक संज्ञा के एकवचन…"
15 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"आदरणीय, चूंकि ओ बी ओ एक सीखने-सिखाने का मंच है, केवल इसलिये मैंने आपका ध्यान इस ओर इंगित किया जाना…"
16 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-87 (विषय: मार्गदर्शन)
"अंतर्व्यथा मैं पानी की एक बूंद हूं। समंदर के अंदर के उथल - पुथल,कोलाहल और ताप से उत्तप्त हो उठते…"
17 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी, प्रस्तुति को आपसे मिले अनुमोदन से अभिभूत हूँ.  हार्दिक धन्यवाद."
19 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"आदरणीय, आपकी चिंता जायज है. लेकिन 'रुको जरा..' भी तो उस लिहाज से एकवचन को संबोधित क्रिया…"
19 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। लम्बे अंतराल पर आपकी मनभावन रचना पढ़कर मन हर्षित हुआ। हार्दिक बधाई।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Saurabh Pandey's blog post खत तुम्हारे नाम का.. लिफाफा बेपता रहा // सौरभ
"आदरणीय मेरा इशारा वाक्य विन्यास की ओर था, बादलो, इधर न आ.... या बादलो रुको ज़रा... दोनों में ही…"
yesterday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service