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मनोरम छंद में मुक्तक ....

मुक्तक
आधार छंद - मनोरम

प्यार का इजहार लेकर ।
   आस का  अंबार लेकर ।
       दे  रहा  आवाज  कोई -
          श्वास का  शृंगार  लेकर ।
           ***
प्रीत  का  संसार  देकर ।
   मौन का  आधार  देकर ।  
       छल गया  विश्वास कोई -
           स्पर्श का अंगार देकर ।
           ***
ख्वाब जो साकार  होते ।
    दर्द  क्यों  गुलज़ार होते ।
        तिश्नगी  को  जीत  लेते -
            आप का हम प्यार होते ।

सुशील सरना / 6-5-23

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 455

Comment

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Comment by Samar kabeer on May 11, 2022 at 3:50pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, मनोरम छंद पर मुक्तक का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I 

ये सीखने सिखाने का मंच है इसलिये रचना के साथ उसका विधान भी लिख देना उचित होता है, इससे नये सीखने वालों को आसानी होती है I 

Comment by amita tiwari on May 10, 2022 at 10:26pm

    प्रीत  का  संसार  देकर ।
   मौन का  आधार  देकर ।  
       छल गया  विश्वास कोई -
           स्पर्श का अंगार देकर 

बहुत  सुन्दर 

Comment by Sushil Sarna on May 10, 2022 at 8:16pm
आदरणीय दया राम जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी
Comment by Dayaram Methani on May 9, 2022 at 12:26pm

आदरणीय सुशील सरना जी, मनोरम छंद में अति सुंदर मुक्तकों का सृजन किया है। बधाई स्वीकार करें।

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