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नवरात्र पर दोहे

घर- घर हो घट स्थापना, लगे नए पंडाल
हर मन उल्लासित दिखे, ले पूजा की थाल।।

चैत्र मास नवरात्र में, हो माँ का गुण गान
दुर्गुण सारा जल उठे, हो इसका भी ध्यान।।

यह सारा संसार ही, माँ का है दरबार
माँ ही बस इक सत्य है, बाकी सब बेकार।।

बालक बृंद अबोध मैं, माँ ममता की खान
जैसा भी हूँ मैं अभी, रखना माँ तू ध्यान।।

माँ के ही सब लाल हम, माँ ही खेवनहार
दया दृष्टि जब माँ करे, हों भवसागर पार।।

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by vijay nikore on April 16, 2019 at 11:06am

दोहे अच्छे लगे। बधाई , आदरणीय विवेक जी

Comment by Vivek Pandey Dwij on April 14, 2019 at 5:10pm

आदरणीय समर कबीर जी आप के इस स्नेह पूर्ण बधाई के लिए कोटिशः धन्यवाद।

Comment by Samar kabeer on April 14, 2019 at 4:46pm

जनाब विवेक पाण्डेय जी आदाब,अच्छे दोहे रचे,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Vivek Pandey Dwij on April 13, 2019 at 9:39pm
आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी दोहे पर उत्साह वर्धन हेतु आप को धन्यवाद।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 13, 2019 at 6:25pm

वाह उत्तम दोहे..जय माँ दी..

Comment by नाथ सोनांचली on April 11, 2019 at 6:43pm
आद0 विवेक पांडेय द्विज जी सादर अभिवादन। ओ बी ओ पर पहली बार आपकी रचना से रूबरू हो रहा हूँ। बढ़िया दोहे सृजित किये हैं आपने। बधाई स्वीकार कीजिये

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