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लघुकथा-संजीदा

एक समय था जब आनंदी लाल जी घंटों अख़बार पढ़ा करते थे । उम्र बढ़ने के साथ-साथ नेत्र ज्योति ने साथ छोड़ दिया । उन्हें अब अक्षर दिखाई नहीं देते । पोता चिण्टू सुबह की ताज़ा ख़बरें और अनमोल विचार रोज़ पढ़कर सुनाता है । वह दादा जी का सच्चा समाचार वाचक है । आज सुबह के सारे समाचार सुन लेने के बाद दादा जी बोले-" बेटा चिण्टू कोई अच्छा-सा अनमोल वचन सुनाओ ।" कुछ देर अख़बार के पन्ने पलटने के बाद चिण्टू बोला -" दादा जी ,व्हिक्टर ह्यूगो का बहुत बढ़िया विचार आया है वो सुनाता हूँ । सुनो ,"बुद्धिमान व्यक्ति बूढ़ा नहीं होता वह तो उम्र बढ़ने के साथ संजीदा होता जाता है ।"
" बहुत बढ़िया अनमोल वचन है ।"
" मगर मेरी समझ में कुछ नहीं आया दादा जी ।"
" कुछ नहीं चिण्टू बेटा , मेरी उम्र में आते-आते तू सब समझ जाएगा जब तुझे सुबह सात बजे की चाय दस बजे मिलेगी और तू चुपचाप बैठा-बैठा इंतज़ार करेगा जैसे मैं कर रहा हूँ ।"
दादा जी ने गहरी साँस छोड़ते हुए कहा ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment by Mohammed Arif on March 21, 2018 at 9:08am

बहुत-बहुत आभार आदरणीय सोमेश जी ।

Comment by somesh kumar on March 20, 2018 at 11:15pm

समझदारी bhri snjida rchna.

Comment by Mohammed Arif on March 20, 2018 at 10:03pm

रचना के अनुमोदन और हौसला अफज़ाई का हार्दिक आभार आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी ।

Comment by नाथ सोनांचली on March 20, 2018 at 7:44pm

आद0 मोहम्मद आरिफ जी  सादर अभिवादन। बढिया कटाक्ष लिए उम्दा लघुकथा। अंत बहुत बेहतरीन। बहुत बहुत बधाई आपको इस प्रस्तुति पर सादर

Comment by Mohammed Arif on March 19, 2018 at 10:18pm

बहुत-बहुत आभार आदरणीय नीलेश जी ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on March 19, 2018 at 9:11pm

बहुत अच्छे..वाह वाह 

Comment by Mohammed Arif on March 19, 2018 at 9:00pm

दिली आभार आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी । लेखन सार्थक हो गया ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 19, 2018 at 7:35pm

मुहतरम जनाब आरिफ़ साहिब ,बहुत ही उम्दा लघुकथा हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।

Comment by Mohammed Arif on March 19, 2018 at 12:25pm

रचना के अनुमोदन और उत्साहवर्धन का बहुत-बहुत आभार आदरणीय विजय निकोर जी । लेखन सार्थक हो गया ।

Comment by vijay nikore on March 19, 2018 at 12:02pm

आपकी अच्छी लघु कथा से जो उमीद होती है, वह हमेशा ही पूरी होती है, आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी

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