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देहात में, सिवान से (नवगीत) // --सौरभ

क्या हासिल हर किये-धरे का ?
गुमसी रातें
बोझिल भोर !
 
हर मुट्ठी जब कसी हुई है
कोई कितना करे प्रयास
आँसू चाहे उमड़-घुमड़ लें
मत छलकें पर
बनके आस
 
सूख निवाला
फँसा हलक में
’पानी ! पानी !’ कर दो शोर..

 

इच्छाओं के धुआँ-धुआँ में
किर्ची-मिर्ची होती आँख
किश्तें अब भी बची हुई हैं
रीते कैसे रोती आँख
 
पड़ा खेत इस कदर डराता
माँगे काया
रस्सी-डोर !
 
नये ढंग के शासक आये
अजब-ग़ज़ब इनका अंदाज़
रगड़-रगड़ कर, छुरी उलट कर
गरदन रेतें
बिन आवाज़

मगर सदा हम बकरे की माँ
कभी कलपते
कभी विभोर !
********************************
--सौरभ पाण्डेय
(मौलिक और अप्रकाशित)

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Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 4, 2016 at 4:49pm

वाह | नवगीत पढ़कर आनंद आया | नवगीत के बारे में बिलकुल ही अनजान हूँ | पर यह विधा भी सुंदर है | धन्यवाद आदरणीय |

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on January 2, 2016 at 12:01pm

शानदार नवगीत हुआ है आदरणीय सौरभ जी, दाद कुबूल करें।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 31, 2015 at 11:45am

इच्छाओं के धुआँ-धुआँ में 
किर्ची-मिर्ची होती आँख 
किश्तें अब भी बची हुई हैं 
रीते कैसे रोती आँख 
 वाह  वाह  बहुत शानदार नव गीत रचा है आदरणीय सौरभ जी,  वातावरण,चलन ,परिस्थितियों वश कर्म को कोई सार्थक परिणाम न मिले तो   हताशा शब्दों में फूटती है चाहे वो किसी के दमन से उपजे भाव  हों या किसी तंगदिल की असंवेदनशीलता से उपजे भाव हों फलस्वरूप आँखें ही रीतती हैं आज मुट्ठियाँ क्या दिल की गलियाँ भी संकुचित हो रही हैं जिसमे किसी संवेदना की हवा भी मुश्किल से पँहुचती हैं |आपके गीत से उपजे भावों को उकेरा है बस ...सराहनीय प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 30, 2015 at 4:21pm

देशज मुहावरों  से सजी आपकी  तत्सम प्रवृत्ति से वैपरीत्य दर्शाती इस अद्भुत रचना का  भी क्या निराला अंदाज है -  क्या हासिल हर किये-धरे का ? गुमसी रातें  बोझिल भोर !  इस सुन्दर नवगीत हेतु आपको बधायी  आदरणीय . 

Comment by Shyam Narain Verma on December 30, 2015 at 12:46pm
बेहद उम्दा ...बहुत बहुत बधाई आप को आदरणीय | सादर 
Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 30, 2015 at 10:14am

आदरणीय सौरभ सर ..बहुत दिनों बाद ..आपका नवगीत पढने को मिला ..बर्तमान जीवन की हकीकत का सजीव चित्रण करती इस शानदार रचना के लिए तहे दिल बधाई स्वीकार करें ..सादर प्रणाम और नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ सादर 

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