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हमको जाँ से ज़ियादा है प्यारा वतन

हमको जाँ से ज़्यादा है प्यारा वतन
सारी दुनिया से बहतर हमारा वतन
आपसी भाइचारे का हो खात्मा
कैसे करले भला ये गवारा वतन
यौमे आज़ादगी का है मंज़र हसीं
ढंक गया है तिरंगों से सारा वतन
सिर्फ़ हिन्दू मुसलमान सिख ही नहीं
सबकी जाँ सबकी आंखों का तारा वतन
दौर - ए - मुश्किल है इसकी हिफाज़त करो
दे रहा है सभी को सहारा वतन
रखिए फिरका परस्तों पे पैनी नज़र
कर नहीं दें ये फिर पारा पारा वतन
इसकी मिट्टी में शामिल है मेरा भी खूं
ये है सबका, नहीं है तुम्हारा वतन
आबरू इसकी तस्दीक ख़तरे में है
कर रहा है हमें ये इशारा वतन

(मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on September 15, 2022 at 4:43pm

जनाब तसदीक़ अहमद साहिब आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें I 

कुछ उर्दू अलफ़ाज़ के नीचे नुक़्ते लें I 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 9, 2022 at 10:22pm

देशभक्ति से परिपूर्ण बढ़िया ग़ज़ल कही जनाब तस्दीक़ जी...बधाई

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 24, 2022 at 12:16pm

जनाब सुशील सरना साहिब, ग़ज़ल पसंद करने और आपकी इस हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 24, 2022 at 12:15pm

जनाब अमीरुददीन साहिब, ग़ज़ल पसंद करने और आपकी इस हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 24, 2022 at 12:14pm

जनाब भाई लक्ष्मण धामी साहिब, ग़ज़ल पसंद करने और आपकी इस हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 23, 2022 at 8:27pm

आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सादर अभिवादन। सुन्दर देशभक्ति रचना हुई है। हार्दिक बधाई।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 23, 2022 at 6:54pm

आदरणीय तस्दीक़ अहमद ख़ान साहिब आदाब, यौम-ए-आज़ादी का ख़ूबसूरत तराना पेश करने के लिए दिली मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएं।

Comment by Sushil Sarna on August 23, 2022 at 5:26pm
वाह आदरणीय तस्दीक अहमद साहब देश भक्ति से सरोबार इस सृजन के लिए हार्दिक बधाई सर

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