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धूप से ओस की बूंदों ने गुज़ारिश नहीं की (-रूपम कुमार 'मीत')

2122 / 1122 / 1122 / 112

धूप से ओस की बूंदों ने गुज़ारिश नहीं की
मरना मंजूर था जीने की सिफ़ारिश नहीं की [1]

एक ही शहर में हम दोनों का है घर फिर भी
हमने इक दूसरे से मिलने की ख़्वाहिश नहीं की [2]

ख़ुदा के सामने हर शख़्स बराबर है तभी
काफ़िरों के घरों पे संग की बारिश नहीं की [3]

इतने खुद्दार थे हम अपने ही मालिक की तरफ
हाथ फैलाए मगर होंटों ने जुम्बिश नहीं की [4]

इक सफ़ीना हुआ यूँ ग़र्क़ के सब डूब गए
भागने के लिए मछली ने भी कोशिश नहीं की [5]

काग़ज़ी रोटियों से भूख मिटाई है मगर
अपनी ग़ुरबत की कभी हमने नुमाइश नहीं की [6]

ये मुलाक़ात न बन जाए क़यामत का सबब
आसमाँ ने ज़मीं पे आने की कोशिश नहीं की [7]

-रूपम कुमार 'मीत'

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' yesterday

जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, ये ग़ज़ल आप "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-125 में पेश कर चुके हैं, दोबारा ब्लॉग पोस्ट में कैसे पेश कर सकते हैं। आप नियमानुसार मुख्य संपादक महोदय से उस 'तरही मुशायरा' वाली ग़ज़ल में संशोधन का अनुरोध कर सकते हैं। सादर। 

Comment by Rupam kumar -'मीत' on Friday
आ, लक्ष्मण धामी साहिब, प्रणाम।

आपकी बात सहीह है, मत्ला ठीक नहीं काफ़िया आरिश की क़ैद हो रही है।
मत्ला यूँ कर देता हूँ।

धूप से ओस की बूंदों ने गुज़ारिश नहीं की
मरना मंजूर था लड़ने की भी कोशिश नहीं की

और 2122 1122 1122 112 (22)
को हम 1122 1122 1122 112(22) भी ले सकते हैं यह छूट है।

ज़मीं 11 किया क्योंकि यहाँ 'नहीं' भी 11 हुआ है, मैंने ऐसे सोचा। बाक़ी बड़ों की राय और मशवरा आने का मैं इंतिज़ार करता हूँ।

आपका बहुत शुक्रिया साहिब आपने यह दोष देखा। दिल से शुक्रिया आपका
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on Thursday

आ. भाई रूपम जी , सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा है । थोड़ा और प्रयास करने पर और बेहतर हो सकती है ।

आपका कफिया आरिश की कैद में है देखिएगा।इस हिसाब से गजल खारिज हो रही है।
धूप से ओस की बूंदों ने गुज़ारिश नहीं की
मरना मंजूर था जीने की सिफ़ारिश नहीं की [1]

इसकी मात्रा गणना समझ नहीं आयी..
//ख़ुदा के सामने हर शख़्स बराबर है तभी//

**
इन दोनों में लय बाधित हो रही है "रोटियों" व "जमीं" की मात्राएँ गिराने से । शेष गुणीजनो की प्रतीक्षा कीजिए।
//काग़ज़ी रोटियों से भूख मिटाई है मगर
//आसमाँ ने ज़मीं पे आने की कोशिश नहीं की
**
फिलहाल हार्दिक बधाई ।
//

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