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May 2021 Blog Posts

नग़मा: माँ की ममता

22 22 22 22 22 22 22

माँ की ममता सारी खुशियों से प्यारी होती है

माँ तो माँ है माँ सारे जग से न्यारी होती है

मैंने शीश झुकाया जब चरणों में माँ के जाना

माँ के ही चरणों में तो जन्नत सारी होती है

दुनिया भर की धन दौलत भी काम नहीं आती जब

माँ की एक दुआ तब हर दुख पे भारी होती है

माँ से ही हर चीज के माने माँ से ही जग सारा

माँ ख़ुद इक हस्ती ख़ुद इक ज़िम्मेदारी होती है

और बताऊँ क्या मैं तुमको आज़ी माँ की…

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Added by Aazi Tamaam on May 9, 2021 at 3:29pm — 6 Comments

अनजाना उन्माद

अनजाना  उन्माद

 

मिलते ही तुमसे हर बार

नीलाकाश सारा

मुझको अपना-सा लगे

बढ़ जाए फैलाव चेतना के द्वार

कण-कण मेरा पल्लवित हो उठे

कि जैसे नए वसन्त की नई बारिश

दूर उन खेतों के उस पार से ले आती

भीगी मिट्टी की नई सुगन्ध

कि जैसे कह रही झकझोर कर मुझसे ....

मानो मेरी बात, तुम जागो फिर एक बार    

सुनो, आज प्यार यह इस बार कुछ और है

 

और तुम ...…

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Added by vijay nikore on May 9, 2021 at 2:30pm — 2 Comments

मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२



नौ माह जिसने कोख में पाला सँभाल कर

आये जो गोद  में  तो  उछाला सँभाल कर।१।

*

कोई  बुरी  निगाह  न  पलभर  असर  करे

काजल हमारी आँखों में डाला सँभाल कर।२।

*

बरतन घरों के  माज  के पाया जहाँ कहीं

लायी बचा के आधा निवाला सँभाल कर।३।

*

सोये अगर  तो  हाल  भी  चुप के से जानने

हाथों का रक्खा रोज ही आला सँभाल कर।४।

*

माँ ही थी जिसने प्यार से सँस्कार दे के यूँ

घर को बनाया  एक  शिवाला सँभाल कर।५।

*

सुख दुख में राह देता…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 9, 2021 at 6:59am — 10 Comments

जग में नाम कमाना है....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

22 22 22 2

जग में नाम कमाना है

इक दिन तो मर जाना है. (1)

अपना दर्द छुपा कर रख

दिल में जो तहख़ाना है. (2)

ग़ैर समझता है मुझको

जिसको अपना माना है. (3)

मार नहीं सकती है भूख

गर क़िस्मत में दाना है. (4)

नई सुराही ले आए

पानी मगर पुराना है. (5)

चिड़िया उड़ जाए न कहीँ

इक पिंजरा बनवाना है. (6)

शक्ल ज़रा सी है बदली

पर जाना-पहचाना है. (7)

*मौलिक…

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Added by सालिक गणवीर on May 8, 2021 at 9:00am — 6 Comments

दोहे

देना दाता वर यही, ऐसी हो पहचान | 
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख सब, बोलें यह इंसान ||
. 
कभी धूप कुहरा घना, कभी दुखी मुस्कान | 
खेल खेलती जिंदगी, कभी मान अपमान ||…
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Added by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" on May 6, 2021 at 4:00pm — 4 Comments

दस वर्षीय का सवाल

सपूत को स्कूल वापिसी पर उदास देखा

चेहरा लटका हुआ आँखों में घोर क्रोध रेखा

कलेजा मुंह को आने लगा

कुछ पूछने से पहले जी घबराने लगा

 

आखिर पूछना तो था ही

जवाब से जूझना तो था ही

जवाब मिला

ग्लोबल वार्मिंग !!

 

ग्लोबल वार्मिंग ??

माथा ठनका !

बेचारी उषमिता ने ऐसा क्या कर दिया

कि लाल को इतना लाल कर दिया

 

जवाब जारी था कि

आपकी पीढी का सब किया कराया है

पारे को इतना ऊपर पहुँचाया…

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Added by amita tiwari on May 4, 2021 at 9:30pm — 3 Comments

मुहब्बतनामा (उपन्यास अंश)

दूसरी मुहब्बत के नाम

मेरे दूसरे इश्क़,

तुम मेरे जिंदगी में न आते तो मैं इसके अँधेरे में खो जाता, मिट जाता। तुम मेरी जिन्दगी में तब आये जब मैं अपना पहला प्यार खो जाने के ग़म में पूरी तरह डूब चुका था। पढ़ाई से मेरा मन बिल्कुल उखड़ चुका था। स्कूल बंक करके आवारा बच्चों के साथ इधर-उधर घूमने लगा था। घर वालों से छुपकर सिगरेट और शराब पीने लगा था। आशिकी, पुकार और भी न जाने कौन-कौन से गुटखे खाने लगा था। मेरे घर के पीछे बने ईंटभट्ठे के मजदूरों के साथ जुआ खेलने लगा था। दोस्तों के साथ मिलकर…

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Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on May 3, 2021 at 10:30pm — No Comments

कुछ उक्तियाँ

पृथ्वी सम्हलती नहीं

मंगल सम्हालेंगे

यहाँ ऑक्सीजन नष्ट की

वहाँ डेरा डालेंगे

बहुत मनाईं देवियाँ

बहुत मनाए देव

कर्म-लेख मिटता कहाँ ?

भाग्य लिखा सो होय

बुज़ुर्ग बेमिसाल होते हैं

समस्त जीवन के अनुभवों की

अलिखित किताब होते हैं

बुज़ुर्ग बेमिसाल होते हैं

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Usha Awasthi on May 3, 2021 at 8:04pm — No Comments

जो पेड़ शूल वाले थे-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२



किस्मत कहें न कैसे सँवारी गयी बहुत

हर दिन नजर हमारी उतारी गयी बहुत।१।

*

जो पेड़ शूल  वाले  थे  मट्ठे से सींचकर

पत्थर को चोट फूल से मारी गयी बहुत।२।

*

भूले से अपनी ओर  न  आँखें उठाए वो

जो शय बहुत बुरी थी दुलारी गयी बहुत।३।

*

धनवान मौका  मार  के  ऊँचा चढ़ा मगर

निर्धन के हाथ आ के भी बारी गयी बहुत।४।

*

बेटी का ब्याह शान से करने को बिक गये

ऐसे भी  बाजी  मान  की …

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 1, 2021 at 9:25pm — No Comments

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