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!!! सत्यम शिवम सुन्दरम !!!

!!! सत्यम शिवम सुन्दरम !!!

हे शिव जय शिव, हर शिव कर शिव।

जल शिव नभ शिव, थल शिव नर शिव।।

अनल शमन शिव, भवम शवम शिव।

ज्योतिर्मय शिव, तिमिर जगत शिव।।

अखिल पवन शिव, धवल चन्द्र शिव।

महिमा शिव शिव, गरिमा शिव शिव।।

महा समर शिव, अजर अमर शिव।

कन कन शिव शिव, आत्मा शिव शिव।।

मसान घर शिव, मन्दिर हिम शिव।

हरिजन शिव शिव, हरि भज शिव शिव।।

सकल जगत शिव, समरथ है शिव।

मैं भी शिव शिव, तू भी शिव शिव।।

भजन सुजन शिव, भगत भुतन शिव।

कह जन शिव शिव, सुन…

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Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 15, 2013 at 8:44am — 26 Comments

आधी अधूरी सी ये ज़िन्दगी

तमन्नाओं से भरी हुई  

जिज्ञासाओ को छुती हुई 

पल की खबर नही 

ठूंठ की तरह खड़ी हुई

आज का पता नही

कल का ठिकाना नही

चल रही बेबाक सी 

किसी का खौफ नही

बनती बिगड़ती फिर सवंरती

कैसी खोखली ये ज़िन्दगी 

आगे दौड़ने की होड़ में रह गई पीछे 

ताश के पत्तों सी बिखरी हुई …

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Added by Aarti Sharma on April 15, 2013 at 12:00am — 15 Comments

!!! सत्ता का सार !!!

!!! सत्ता का सार !!!

सत्ता - सुशासन - सरकार

पेट्रोल - डीजल- गैस की मार

दर्द क्यों हम इसका झेलें

जिसके तन में हों पहिये चार

नेताओं की चलती है कार

काला - धन और भ्रस्टाचार

टूट - फूट और मरम्मत का कार्य

बस थोड़ा सा दंगा

और नर -संहार

उनकी कार में खूनी पेट्रोल

व्यभिचारी डीजल का शोर

बलात्कारी से हूटर चीखते

मंहगाई का पूरा काफिला ही संग चलता

ए.सी. ट्रेन - प्लेन का सुख

लेतें हैं चमचा- चापलूस- गद्दार

इनके पूत पालने में…

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Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 14, 2013 at 10:42pm — 20 Comments

कौन मजबूत? कौन कमजोर ?

इम्तिहान

एक दौर

चलता है जीवन भर !

सफलता

पाता है कोई

कभी थम जाये सफ़र !

कमजोर

का साथ

देना सीखा,

ज़रुरत

मदद की

उसे ही रहती .

सदा साथ

नर का

देती रही ,

साया बन

संग उसके

खड़ी है रही ,

परीक्षा की घडी

आये पुरुष की

नारी बन सहायक

सफलता दिलाती…

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Added by shalini kaushik on April 14, 2013 at 8:30pm — 17 Comments

जीवन जीने के लिए है

हमारे प्रथम रुदन से लेकर अंतिम श्वाश तक जीवन अनुभवों का एक सिलसिला है। सम्पूर्ण जीवन काल में हम प्रेम और घृणा, मान और अपमानं, ख़ुशी और गम आदि द्वंदों के बीच में झूलते रहते है। एक रोलर कोस्टर की भांति इसके उतार चढ़ाव हमें आकर्षित करते हैं।

"जीवन साईकिल की सवारी की भांति है। संतुलन बनाये रखने के लिए आगे बढ़ते रहना आवश्यक…

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Added by ASHISH KUMAAR TRIVEDI on April 14, 2013 at 4:00pm — 10 Comments

छांव निगलकर हँसता सूरज

नवगीत

 

छाँव निगलकर हँसता सूरज,

उगल रहा है धूप।

 

शीतलता को रखा कैद में,

गर्मी लाया साथ।

तप्त दुपहरी रानी बनकर,

बाँट रही सौगात।

फ्रूट-चाट, कुल्फी, ठंडाई,

सभी सुहाने रूप।

 

रातें छोटी दिन हैं लंबे,

लू का बढ़ा प्रकोप।

घने पेड़ भी तपे आग से,

शीत हवा का लोप।

चीं चीं, चूँ चूँ, कांव कांव सब,

ढूंढ रहे नल कूप।

 

सड़क किनारे ठेले वाले,

राहत लिए…

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Added by कल्पना रामानी on April 14, 2013 at 1:30pm — 16 Comments

हमने हर मौसम को आते जाते देखा है

हमने हर मौसम को आते जाते देखा है

हमको लेकिन सबने बस मुस्काते देखा है



झूठी बातें झूठे किस्से बतलाते हैं लोग

पत्थर को कब दर्पण से शरमाते देखा है



पर्दा रखना ठीक लगा हमको दुनिया में अब

फूलों पर जब भँवरों को मंडराते देखा है



कछुआ और खरगोश पुरानी बातें हैं यारो

अब गदहों को हमने मंजिल पाते देखा है



मंदिर मंदिर मिन्नत करके जिसको पाया था

उसको ही कल हमने आँख दिखाते देखा है



गाली देते फिरता था जो गुंडा राहों में

उसको ही अब… Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on April 14, 2013 at 12:37pm — 25 Comments

कुंडलिया छंद

कुंडलिया छंद 

 



नारी तू अबला नहीं, अपनी ताकत जान 

दोषी से कर सामना, पूरे कर अरमान। 
पूरे कर अरमान, तुझमे है शक्ति  ऐसी,…
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Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 14, 2013 at 11:30am — 22 Comments

बेटी के शव पर.....तोटक छंद

बिटिया कछु बोलत नाहि कहौ

चुपचाप पडी कहती न सुनौ

यह तात पुकारत है तुम्ह को

अब धाय उठो उठ धाय चलौ



-----------



रखिया न भुला कहता बिरना

बतिया यह मोरि सुनो बहना

'छुटकी' नहि तोर सहाय भयो

अब धाय उठो उठ धाय चलो

---------

सखियाँ सब खेलन चाह रही

खटिया पर मात कराह रही

यह बात सुनौ नहि देर करौ

अब धाय उठो उठ धाय चलौ

------

बस एक सवाल बसै मन मे

क्यस भूल भयी यह जीवन मे

भगवान कहाँ हम चूक गये

नहि धाय उठे नहि धाय… Continue

Added by manoj shukla on April 14, 2013 at 8:30am — 14 Comments

ज़रूरत

आज ज़रूरत है

अपने अंदर झाँकने की

आपसी द्वेष और क्लेश से

ऊपर उठने की

 

सामने पड़ी वस्तु पर तो

शायद हम पैर न रखतें हैं  

पर दूसरों की भावनाओं को

पैरों तले कुचलने में न झिझकते हैं

  

जात -पात वर्ण भेद के मानकों पर

इंसानों को बाँटने में लग गए हैं

एक दूसरे को नीचा दिखाने की हर

प्रतिस्पर्धा में बुरी तरह जुट गए हैं

 

पेड पत्थर कागज़ में तो

भगवान् का प्रतिरूप देख रहे हैं

 भगवान् द्वारा…

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Added by vijayashree on April 13, 2013 at 11:28pm — 13 Comments

पाक को चेतावनी....छंद कामरूप

यह देख दुनियाँ, खोल अंखियाँ, पाक की करतूत
गोली चलाता, बम गिराता, तानता बन्दूक
ये मान ले तू, जान ले तू, ना रहेंगे मूक
अब तू संभल जा, या बदल जा, कह रहे दो टूक


मौलिक व अप्रकाशित

Added by manoj shukla on April 13, 2013 at 11:08pm — 15 Comments

रफ्तार (चार मुक्तक)

उजाला चाहते हैं वज्म में खुद जलना होगा,

सफर तय करना है तो गिर कर सम्भलना होगा।

इतनी आसानी से मंजिल नहीं मिलती यारों,

जिन्दगी की रफ्तार को कुछ बदलना होगा॥



मंहगाई की रफ्तार यूँ बढ़ती जा रही है,

इसी के इर्द- गिर्द दुनिया सिमटती जा रही है।

तिस पर ये बेरोजगारी घोटाले और लूट,

ये जिन्दगी इक दलदल में बदलती जा रही है॥



सुना है उसने एक नई कार खरीद ली,

समझता है जिन्दगी में रफ्तार खरीद ली।

पर क्या पता उस नादान अहमक को,

अपने पाले में मुसीबत… Continue

Added by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on April 13, 2013 at 9:03pm — 9 Comments

बेशक उसका जन्म हुआ है

बेशक उसका जन्म हुआ है

मंदिर में स्थापित देवताओं को

दूर से प्रणाम करने…

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Added by anwar suhail on April 13, 2013 at 8:40pm — 12 Comments


मुख्य प्रबंधक
अंतर्द्वंद्व // गणेश जी "बागी"

ठगती है,

बार बार,

अंतरात्मा,

आश्वासनों से,

ठीक हो जाएगा,

सब ठीक हो जाएगा,

एक अंतर्द्वंद्व,

सत्य असत्य,

दिल दिमाग़ के मध्य,

नही डिगेगा,

कभी नही डिगेगा,

चलते जाना है,

सत्य के मार्ग पर,

जो घटित होना है,

हो जाय,

कौन अमर यहाँ,

कोई नही,

कोई भी तो नही,

फिर डर कैसा,

उस अहंकार से,

जो क्षण भंगुर है,

चल हट !

चलने दे,

कार्य पथ पर बढ़ने दे,

वो सामने देख…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 13, 2013 at 8:00pm — 38 Comments

वह सड़क बंद है

हर तरफ खौफनाक सन्नाटा

कहीं कोई आवाज नहीं

हालांकि दर्द हदों को छू गया।

 

जिंदगी

दरकने लगी है

तप रही है जमीन,

पानी की बूंद

गायब हो जाती…

Continue

Added by बृजेश नीरज on April 13, 2013 at 6:00pm — 26 Comments

नारी तू नहीं है अबला

नारी तू नहीं है अबला

--------------------

नारी तू नहीं है अबला 

है शक्ति  स्वयं पहचान 

खुद  को शोषित  मान  ले 

फिर  कौन  करे  सम्मान 

दूषित  जग  से लड़ना होगा

खुद  ही आगे बढ़ना…

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Added by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 13, 2013 at 6:00pm — 25 Comments

कुण्डलियां

कुण्डलियां

सुधार के बाद पुनः प्रस्तुत

हॅसी हुदहुद खंजन से, पिकहु कूक रहि जाय।

बुलबुल मैना खग गुने, सुगा भी टेटियाय।।

सुगा भी टेटियाय, काग कांव कांव करता।

चातक बया तिलेर, टिटेहरी टेर कसता।।

बगुला रखता मौन, हंस गौरैया सरसीं।

मयूर बुलाय कौन, खिलखिल सब चिडि़यां हॅसीं।।

के0पी0सत्यम/मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 13, 2013 at 2:30pm — 15 Comments

जान हथेली पर ले चलते , भारत माँ के वीर जवान |

जागे रहते वीर जवान | 
जान हथेली पर ले चलते , भारत माँ के वीर जवान |
देश दुनिया शांती चाहते , मेरा देश कितना  महान |
छुप छुप कर बैरी वार करें , मुश्किल में दे देते जान |
सात समुंदर…
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Added by Shyam Narain Verma on April 13, 2013 at 11:43am — 9 Comments

तुमको पाया मानो मैंने नया जन्म पाया

शादी की प्रथम सालगिरह की पूर्व संध्या में अपनी जीवन संगिनी को समर्पित एक रचना



शाम सुहानी रात दीवानी दिवस एक लाया

तुमको पाया मानो मैंने नया जन्म पाया



मन में अंतर्द्वंद बहुत था कैसा होगा वो

सपने देखे जैसे मैंने वैसा होगा वो

या नाज़ुक सुंदर फूलों के जैसा होगा वो

छुईमुई सा शरमाएगा क्या ऐसा होगा वो



तभी सामने इक सुंदर सा चाँद निकल आया

तुमको पाया मानो मैंने नया जन्म पाया



हाथ में सुन्दर वरमाला औ तुम थी सकुचाई

धीरे धीरे पग रख रख… Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on April 12, 2013 at 6:50pm — 29 Comments

माँ , याद तुम्हारी

याद तुम्हारी , कितनी प्यारी ,

धीरे-धीरे मन के आँगन में ,

चुपके से आ जाती हे |



याद तुम्हारी , बड़ी दुलारी ,

आँखों  से  , अंतर मन को ,…

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Added by अशोक कत्याल "अश्क" on April 12, 2013 at 6:00pm — 15 Comments

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