For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"अरे जरा पता तो कर, इस एरिआ में स्साला कौन पैदा हो गया जो मेरे घर में चोरी कर गया." नेताजी गरजते हुए बोले । 
"भईया जी, पता चल गया है, इ काम कल्लुआ गिरोह का है, चोरी के माल के साथ बड़का गाँव में छुपा हुआ है, आप कहें तो पुलिस भेज कर उसे चोरी के माल के साथ गिरफ्तार करवा दें ?"
"अबे पगला गया है क्या ? जीते जी मरवायेगा !!! उ कल्लुआ को खबर करवा दे, किसी हाल में वो पुलिस के हाथ नहीं लगना चाहिए ।" 
"आयं !!! वो क्यों भईया जी ?"
"रे बकलोल, उसका जो होगा सो होगा, मगर हमारा ………

(मौलिक व अप्रकाशित)

पिछला पोस्ट => लघुकथा : भुट्टे वाली

Views: 853

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 24, 2014 at 3:06pm

उन्ही के भरोसे तो इनकी नेता गिरी टिकी है , कैसे नही बचायें उनको । एक और बढिया लघु कथा  के लिये आपको बधाइयाँ ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 24, 2014 at 1:10am

गणेश भाई, वाह !
नेताजी के व्यक्तित्व को क्या खूब परिभाषित किया है आपने ! लघुकथा सामाजिक विसंगतियों के मूल कारणों पर करारा प्रहार करती है.
कथानक इतना प्रभावी है कि मुझे हाल में देखी ’स्पेशल २६’ के एक दिलचस्प सीन का स्मरण हो आया.
बहुत-बहुत बधाई इस लघुकथा के लिए..

Comment by विनय कुमार on July 23, 2014 at 7:07pm

बहुत मौजूं और सटीक लघुकथा , बहुत बहुत बधाई..

Comment by Santlal Karun on July 23, 2014 at 4:19pm

आदरणीय गणेश जी बागी जी,

वर्तमान विडम्बना पर आधारित व्यंग्यपरक पठनीय; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 23, 2014 at 12:26pm

आदरणीय बागी जी

प्रथम पंक्ति तो पढ़कर हंसी आयी i एरिया में नेता जी  से बढ़कर नया चोर कौन ? फिर व्यंग्य  उभरता है i उन्होंने  कलुआ को खबर करवा दे -जिस अंदाज में कहा उससे पता चलता है कि वह नेता जी के लिये  अपरिचित नहीं था i अब मॉल के सार्वजनिक होने का भय i हो सकता है वह भी कलुआ के ही हुनर का नतीजा हो i  यदि नहीं भी तो भी नेता जी का सामान संदिग्ध तो  था ही i  एक सुगठित लघु कथा  i आपको बधाई ,आदरणीय i

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 23, 2014 at 12:25pm

बहुत ही बढ़िया लघुकथा. एक कहावत..चोर-चोर मौसेरे भाई, यहाँ फिट बैठ रही है. आपको हार्दिक बधाइ आदरणीय बागी जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 23, 2014 at 11:36am

हाहाहा -----नेता जी डर गए कि चोरी के माल में चोरी का माल मिलेगा पुलिस को फिर उसकी साख़ का क्या होगा ....बहुत बढ़िया जबरदस्त कटाक्ष करती लघु कथा|हेतु हार्दिक बधाई आ० गणेश जी | 

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 23, 2014 at 11:17am
Realistic . Congrats .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-109 (सियासत)
"यूॅं छू ले आसमाॅं (लघुकथा): "तुम हर रोज़ रिश्तेदार और रिश्ते-नातों का रोना रोते हो? कितनी बार…"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-109 (सियासत)
"स्वागतम"
Sunday
Vikram Motegi is now a member of Open Books Online
Sunday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .पुष्प - अलि

दोहा पंचक. . . . पुष्प -अलिगंध चुराने आ गए, कलियों के चितचोर । कली -कली से प्रेम की, अलिकुल बाँधे…See More
Sunday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई दयाराम जी, सादर आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई संजय जी हार्दिक आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. रिचा जी, हार्दिक धन्यवाद"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई दिनेश जी, सादर आभार।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आदरणीय रिचा यादव जी, पोस्ट पर कमेंट के लिए हार्दिक आभार।"
Saturday
Shyam Narain Verma commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: ग़मज़दा आँखों का पानी
"नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Saturday

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service