For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुछ क्षणिकाएं :

कुछ क्षणिकाएं :

पिघलती नहीं
अब
अंतर्मन की व्याकुलता
आँखों से
स्वार्थ का चश्मा
सोख लेता है
सारा दर्द

................

सीख लिया है
आँखों ने
खारा पानी पीना
संवेदनहीन

हो गया है
वर्तमान

.........................

झीलें नहीं होती
भावों की
आँखों में
मैच कर लेता है
हर अंतरंग का रंग
कांटेक्ट लेंस

.....................

मुद्दत हो गई
खुद से मुलाकात हुए
शायद
उनसे बिछुड़ने का
अंजाम है ये
पलक से गिरा
लकीरों पे
किसी याद का
मुकाम है ये

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 825

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on September 27, 2018 at 6:39pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी , सृजन आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on September 27, 2018 at 6:39pm

आदरणीय शेख उस्मानी साहिब , आदाब .... सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का आभारी है।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on September 26, 2018 at 11:51am
आदरणीय सुशील सरना जी जीवंत क्षणिकाएं पढ़कर बहुत आनन्द की अनुभूति हुई दिली मुबारकबाद
Comment by नाथ सोनांचली on September 25, 2018 at 8:27pm

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन क्षणिकाएँ लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।

Comment by Samar kabeer on September 24, 2018 at 11:53am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्दा क्षणिकाएँ हुई हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

झीलें नहीं होती---"झीलें नहीं होतीं"

Comment by narendrasinh chauhan on September 22, 2018 at 2:01pm

वाह... बहोत खूब सुंदर रचनाए। .. 

 सुशील सरना जी हार्दिक बधाई आपको 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 22, 2018 at 12:04pm

वाह्ह्ह बहुत सुंदर बेहतरीन सृजन आद० सुशील सरना जी हार्दिक बधाई आपको 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 21, 2018 at 7:37pm

आ. भाई सुशील जी, बेहतरीन रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on September 21, 2018 at 5:13pm

वाह। ग़ज़ब का सृजन! व्याकुलता/ संवेदनहीनता/भावरंगहीनता/आत्मावलोकन उपेक्षा पर स्वार्थलोलुपता का हावी होना बाख़ूबी उभारा गया है। सादर हार्दिक बधाई और आभार आदरणीय सुशील सरना  साहिब।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Feb 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service