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ग़ज़ल इस्लाह के लिए :मनोज अहसास

2122  2122  2122  212

मेरे जीने का भी कोई फलसफा लिख जाइये
आप मेरी चाहतों को हादसा लिख जाइये

आपका जाना ज़रूरी है मुझे मालूम है
हो सके तो मेरी खातिर रास्ता लिख जाइये

नींद मेरी धड़कनों के शोर से बेचैन है
मेरे जीवन मे विरह का रतजगा लिख जाइये

आप अपना नाम लिख लीजै मसीहाओं के बीच
बस हमारे नाम के आगे वफ़ा लिख जाइये

गर जुदा होकर ही खुश हैं आप तो अच्छा ही है
पर हमारी चाहतों को ही खरा लिख जाइये

जुड़ गया जिनसे मुकद्दर अब तेरे 'अहसास' का
उन सभी के वास्ते कोई दुआ लिख जाइये

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by मनोज अहसास on January 3, 2018 at 9:49pm

ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया देने के लिए सभी आदरणीय मित्रों ,गुणीजनों का आभार

सुझावों पर विचार करूँगा

हृदय से आभार प्रकट करता हूँ

नमन करता हूँ आप सबका

सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 3, 2018 at 3:13pm

भाई मनोज जी , अच्छी गजल हुई है। बधाई।

Comment by Afroz 'sahr' on January 2, 2018 at 12:32pm
जनाब मनोज अहसास साहिब इस रचना पर बधाई स्वीकार करें। गुणी जनों की बातों पर गौ़र फ़रमाएं,,,
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 1, 2018 at 7:56pm

जनाब मनोज अहसास साहिब ,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं । 

  • मतले का ऑप्शन यह भी हो सकता है।(मेरी उल्फ़त का कोई तो फलसफा लिख जाइये---कुछ न लिख पाएं अगर तो हादसा लिख जाइये )
  • शेर4--(काम यह कर जाइये मेरा मसीहा हैं अगर --सिर्फ मेरे नाम के आगे वफ़ा लिख जाइये ) 
  • शेर5--(पास रह कर भी अगर  तुम खुश नहीं हो जानेमन --जाते जाते मेरी चाहत को दगा लिख जाइये ) 
  • शेर6--(किस्मते अहसास से जिनका मुक़द्दर मिल गया --उनके नामों के मुक़ाबिल आशना लिख जाइये ।)
Comment by Ajay Tiwari on January 1, 2018 at 3:44pm

आदरणीय मनोज जी, खूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई.

मतले के लिए एक तात्कालिक विकल्प : 

'आप मेरी चाहतों को हादसा लिख जाइये

पर मेरे जीने का भी इक फलसफा लिख जाइये'  या   'पर जिऊँ मैं किस तरह वो फलसफा लिख जाइये'

नव वर्ष मंगलमय हो !

सादर 

Comment by ram shiromani pathak on January 1, 2018 at 8:25am

वाह वाह बहुत खूब।।सुंदर अशआर।।बधाई आपको

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 1, 2018 at 1:08am

बढ़िया दिलचस्प, लेकिन अहम निवेदन करती ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब मनोज कुमार अहसास जी।

Comment by मनोज अहसास on December 31, 2017 at 8:04pm

हार्दिक आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी

सादर

Comment by TEJ VEER SINGH on December 31, 2017 at 6:24pm

हार्दिक बधाई आदरणीय मनोज कुमार अहसास जी।बेहतरीन गज़ल।

आप अपना नाम लिख लीजै मसीहाओं के बीच
बस हमारे नाम के आगे वफ़ा लिख जाइये

Comment by मनोज अहसास on December 31, 2017 at 6:22pm

बहुत बहुत शुक्रिया राम अवध विश्वकर्मा जी

सादर

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