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गजल(फिर गजल होगी....)

2122 2122 2122 222

फिर गजल होगी भली रुत को जरा आने तो दो
बंद छितराये पड़े हैं,और जुड़ जाने तो दो।1

राख में चिनगारियाँ भी चिलचिलाती रहती हैं,
बस हवा का एक झोंका अब गुजर जाने तो दो।2

भागता जाता बखत भी बेकली के रस्ते से
गुनगुनायेंगी दिशाएँ मीत अब गाने तो दो।3

ज़ोर है तनहाइयों का , मानता, डरना भी क्या?
दूरियाँ क्या साहिलों की?यार अकुलाने तो दो।4

चाहतों का सिलसिला कब माँगने से मिलता है?
तिश्नगी बढ़ती गयी अब और रिरियाने तो दो।5

वक्त ने कितना कहा पर मैं भटकता हूँ निशि-दिन,
भाव कुछ अपना बढ़ेगा अब पिघल जाने तो दो।6
मौलिक व अप्रकाशित
@

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Comment by Manan Kumar singh on September 1, 2017 at 9:35am
आभार आ. लक्ष्मण जी।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 1, 2017 at 6:37am
बहुत सुंदर । आ. भाई मनन जी हार्दिक बधाई ।
Comment by Manan Kumar singh on August 30, 2017 at 8:47pm
आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय गिरिराज भाई।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 30, 2017 at 8:35pm

आदरणीय मनन भाई , एक बीरली बहर पर खूबसूरत ग़ज़ल कही है , हार्दिक बधाइयाँ । आ. नीरज भाई जी का भी आभार , इस बहर के विषय मे जानकारी देने के लिये ।

Comment by Manan Kumar singh on August 29, 2017 at 6:07pm
आदरणीय नीरज जी,बहुत बहुत शुक्रिया आपका।अब किताब से देखकर मैं कहता,लेकिन आपने मेरा काम हल्का कर दिया।मुझे इस बहर का नाम याद नहीं था,लेकिन होती है,कहीं देखा था।आपका पुनः आभार।
Comment by Samar kabeer on August 29, 2017 at 5:51pm
जनाब नीरज जी आदाब,जी मुझे मालूम है,ये बात मैंने जनाब मनन जी से जानना चाही थी जिसका कोई कारण था ।
Comment by Niraj Kumar on August 29, 2017 at 5:35pm

जनाब समर कबीर साहब, आदाब,
मफऊलुन (222) इस बह्र में एक जायज़ अरकान है जिसे तशिश जिहाफ़ के अमल से हासिल किया गया है.(वैसे इसे खब्न और तस्कीन के अमल से भी हासिल किया जाता है.)
सादर

Comment by Niraj Kumar on August 29, 2017 at 4:36pm

आदरणीय मनन जी,
एक कम इस्तेमाल की गयी बह्र(रमल मुसम्मन मुश्शश अल आखिर - फाइलातुन फाइलातुन फाइलातुन मफऊलुन) में यह एक अच्छी कोशिश है. मुबारकबाद.

Comment by Samar kabeer on August 28, 2017 at 9:45pm
जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।
ग़ज़ल के अरकान जो आपने लिखे हैं,2122 2122 2122 222आख़िर में 222 समझ नहीं आ रहा है 212 होता है ?जैसा कि जनाब राम अवध जी ने लिखा है ।
Comment by Ram Awadh VIshwakarma on August 28, 2017 at 7:51pm
प्रयास अच्छा है। मात्रा गणना सही नहीं है।
बह्र है-
फाइलातुन फाइलातुन फाइलातुन फाइलुन
2122 2122 2122 212
इस प्रकार कुछ शेर में सुधार की आवश्यकता है।
अच्छे प्रयास के लिये बधाई

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