For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मुहब्बत की दावत: ग़ज़ल: हरि प्रकाश दुबे

122--122 / 122--122

मुहब्बत मुहब्बत मुहब्बत लिखेंगे,

अलावा नहीं कुछ हिमाकत लिखेंगे !

 

नहीं कल्पना ही लिखेंगे यहाँ अब,

लिखेंगे तो बस हम हकीकत लिखेंगे!

 

लिखेंगे नहीं हम कभी झूठ बातें,

सलामत अगर हैं सलामत लिखेंगे!

 

मुहब्बत ही करते रहें हैं यहाँ जो ,

ग़ज़ल दर ग़ज़ल हम मुहब्बत लिखेंगे!

 

ग़ज़ल जब लिखेंगे तुम्हारे लिए तो,

कसम से तुम्हें खूबसूरत लिखेंगे!

 

इशारा हमें जो किया आपने है ,

इसे हम मुहब्बत की दावत लिखेंगे!

 

गये छोड़कर के मिरे पास में दिल,

मुहब्बत की उसको वसीयत लिखेंगे!

 

नहीं लिख सका गर मुहब्बत की बातें ,

खुदा की अजी हम इबादत लिखेंगे!  

 

 

"मौलिक व अप्रकाशित"

© हरि प्रकाश दुबे

Views: 850

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on July 21, 2017 at 11:20am

गज़ल अच्छी लगी, आनन्द आ गया। हार्दिक बधाई।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 20, 2017 at 8:51pm
बहुत खूब..

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 20, 2017 at 8:26pm

आदरनीय हरि प्रकाश भाई , बढिया गज़ल कही है .. दिल से बधाइयाँ स्वीकार करें । बाक़ी बात आ. रवि भाई कह हे चुके हैं , खयाल कीजियेगा ।

Comment by Gurpreet Singh jammu on July 19, 2017 at 9:42pm
आदरणीय हरी प्रसाद जी..अच्छी ग़ज़ल कही है आपने...आदरणीय रवी सर ने जिन अशआर पर सलाह दी है ,उसे केन्द्र में रख कर आप और अशआर में भी सुधार कर सकते हैं..
ग़ज़ल जब लिखेंगे तुम्हारे लिए तो,
कसम से तुम्हें खूबसूरत लिखेंगे!

इशारा हमें जो किया आपने है ,
इसे हम मुहब्बत की दावत लिखेंगे!
ये दोनों शेर मुझे बहुत पसंद आए..
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 19, 2017 at 12:36pm

अच्छा भाई जी धन्यवाद् |

Comment by Samar kabeer on July 19, 2017 at 12:26pm
मात्रा गिराई जायेगी बहना ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 19, 2017 at 12:23pm

आदरणीय समर भाई जी आदाब , यहाँ गर झूठी बाते करते है तो मात्राओं की गणना किस तरह से होगी यह तो बदल जाएगी न | कृपया मार्गदर्शन दे | सादर|

Comment by Samar kabeer on July 19, 2017 at 12:09pm
जनाब हरि प्रकाश दुबे जी आदाब,बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
बाक़ी बातें जनाब रवि शुक्ला साहिब विस्तार से बता ही चुके हैं,उस पर ग़ौर कीजियेगा ।
Comment by Ravi Shukla on July 19, 2017 at 10:43am

आदरणीय हरि प्रकाश जी गजल का बेहतर प्रयास हुआ है मुहब्‍बत को केंद्र बना कर बढि़या अशआर कहे है आपने मुबारक बाद पेश करते है ।

इशारा हमें जो किया आपने है , इसके अल्‍फाज के क्रम को वाक्‍य विन्‍यासके अनुसार देखें तो  इशारा हमें आपने जो किया है करें तो कैसा रहेगा ।

गये छोड़कर के मिरे पास में दिल, इस मिसरे में छोड़ कर  के यहां कर के बाद के असहज सा लग रहा है इसे भी बदल सकते है आप  

मेरे पास दिल वो गये छोड़कर जो  जैसे विकल्‍प पर विचार कर सकते है

लिखेंगे नहीं हम कभी झूठ बातें, इसमिसरे में आदरणीया कल्‍पना जी सही कह रही है आप झूठी बाते कह सकते है

इसी तरह आखिरी शेर में भी कुछ बेहतर की गुंजाइश है । सादर

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 19, 2017 at 10:25am
खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय दुबे जी..सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
3 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
17 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service