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जीवन हमको बुद्ध का , देता है सन्देश |
रक्षा करना जीव की , दूर रहेगा क्लेश ||1||

भोग विलास व नारियां, बदल न पाई चाल |
योग बना था संत का, छोड़ दिया जंजाल ||2||

मन वीणा के तार को, कसना तनिक सहेज |
ढीले से हो बेसुरा , अधिक कसे निस्तेज ||3||

बंधन माया मोह का , जकड़े रहता पाँव |
जिस जिसने छोड़ा इसे , बसे ईश के गाँव ||4||

धन्य भूमि है देश की, जन्मे संत महान |
ज्ञान दीप से जगत का,हरे सकल अज्ञान ||5||

.
(मौलिक अप्रकाशित) 

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Comment

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Comment by Chhaya Shukla on May 15, 2017 at 7:59pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी दोहों की सराहना कर उत्साह वर्धन के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद ! सादर नमन स्वीकारें !

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 15, 2017 at 9:39am

आदरणीया छाया जी अच्छे दोहे रचे हैं आपने , बधाइयाँ स्वीकार करें

Comment by Chhaya Shukla on May 12, 2017 at 2:52pm

आदरणीय anurag vashishth ji आदरणीय समर साहब आप दोनों का मूल्यवान जानकारी के लिए हार्दिक आभार !
सराहना के लिए धन्यवाद सादर |
कृपया इसी प्रकार मार्ग दर्शन करते रहें |
सादर 

Comment by Chhaya Shukla on May 11, 2017 at 8:41pm
आदरणीय समर कबीर सर दोहों की सराहना कर उत्साह वर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार ।
जीव शब्द पुल्लिंग है इसलिए जीव का ही होगा सर। सादर
Comment by Samar kabeer on May 11, 2017 at 6:10pm
मोहतरम छाया शुक्ला जी आदाब,बहुत अच्छे लगे आपके दोहे,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
'रक्षा करना जीव का' या
'रक्षा करना जीव की' ?
Comment by Chhaya Shukla on May 11, 2017 at 11:21am

आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी आपके स्नेह और दोहों की प्रशंसा के लिए आपका हार्दिक आभार |
नमन स्वीकारें ! 

Comment by Chhaya Shukla on May 11, 2017 at 11:19am

आदरणीय mohammed arif ji दोहों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार |
सादर नमन ! 

Comment by Mohammed Arif on May 11, 2017 at 8:07am
आदरणीया छाया शुक्ला जी आदाब, संदेशप्रद दोहे । ढेरों बधाईयाँ स्वीकार करें ।
Comment by बसंत कुमार शर्मा on May 10, 2017 at 9:02pm

सुंदर सन्देशपरक  दोहे, बहुत बहुत बधाई आदरणीय छाया शुक्ला जी , 

मन वीणा के तार को कसना तनिक सहेज, वाह अनुपम 

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