For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अपना पेट काटकर छौटे भाई को पढ़ाया।अपनी जवानी का अधिकत्तर हिस्सा मजूरी करके गुज़ारा।मेहनत करने में दिन न देखा न कभी रात।भाई होनहार जो था पढ़ाई में भी पूरा तेज और लोकव्यवहार में बिलकुल सधा हुआ।
पता नहीं क्या हुनर बख्शा था ऊपरवाले ने उसे।लोगों को झट से मना लेता था और उनके मन तक को पढ़ जाता था।
जब उसके कुछ करने का समय आया तो ,"मुझे नहीं रहना आपके साथ और न ही मैं आपके लिए कुछ कर पाऊँगा।मुझे मेरी ज़िन्दगी अपने तरीके से जीनी है।मैं जा रहा हूँ।मुझे ढूँढने की भी कभी कौशिश मत करना।" बस इतना कहकर वह चलता बना।
आज वही भाई सालों बाद घर आ रहा है।और रामचन्द्र इन्हीं ख्यालों में खोया हुआ है।
भाई को आते देख वह हैरान और दुखी हुआ ।उसका वह सुंदर सुडौल भाई,अब सुखकर काँटा हो गया है और उसकी एक टांग भी ठीक नहीं लगती।
उसकी हालत को देख रामचन्द्र का दिमाग पिछली यादों से भटक गया और उसके मन में फिर से भातृ प्रेम उमड़ पड़ा।
"भाई!मैं तुम्हे दुःखी छोड़ गया था और आज फिर आते ही दुःखी कर दिया।"
छौटे भाई ने उसके गले लगते हुए कहा।
"मुन्ना......"
इतना कहते ही रामचन्द्र का गला रुंध गया।
"भाई मैं देश के लिए एक ख़ुफ़िया एजेंसी में काम किया करता था। जिसके कर्मियों को किसी को भी अपनी असलियत नहीं बतानी होती।मैं जानता हूँ तुमने अपनी ज़िन्दगी मेरे लिए जी।पर मैंने अपनी देश के लिए।इसलिए तुम भी अपनी मातृभूमि के लिए ही तो जिए हो।काम के दौरान ही मुझे चोटें भी आयीं और मेरी ये टांग......."
"बस मुन्ना...."
इतना कहते हुए बड़े ने छौटे को कस कर बाँहों में भर लिया।
मौलिक एवम् अप्रकाशित

Views: 659

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 28, 2015 at 7:06am
बहुत बहत आभार आदरणीया pratibha pande जी
Comment by pratibha pande on November 24, 2015 at 12:10pm

 आपके  इस कथानाक में देश के लिए जीवन दे देने वालों के जीवन का कटु यथार्थ छिपा है , हार्दिक बधाई आपको इस रचना पर आदरणीय 

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 24, 2015 at 11:57am
लघुकथा की सराहना के लिए हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडीवाला जी
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 24, 2015 at 11:40am

"तुमने अपनी ज़िन्दगी मेरे लिए जी।पर मैंने अपनी देश के लिए।इसलिए तुम भी अपनी मातृभूमि के लिए ही तो जिए हो।"

ये पंक्तिया इस कहानी को सार्थकता प्रदान कर रही  है और  आदर्श सन्देश भी दे रही  है | बधाई स्वीकारे 

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 20, 2015 at 10:43pm
बहुत बहुत आभार आदरणीय तेजवीर जी।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 20, 2015 at 10:42pm
बहुत बहुत आभार आपका हौंसला अफ़ज़ाई के लिए आदरणीयSheikh Shahzad Usmani जी।
Comment by TEJ VEER SINGH on November 20, 2015 at 6:59pm

बहुत मार्मिक रचना आदरणीय सतविन्दर सर जी! बहुत बधाई आपको ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 20, 2015 at 4:29pm
उम्दा कथानक को बेहतरीन लघु-कथा में बेहतरीन अंदाज़ में प्रस्तुत करते हुए जीवन के और त्याग के कड़वे सच को यूँ बख़ूबी पाठकों से साझा करने के लिए हृदयतल से बहुत बहुत बधाई आदरणीय सतविंदर कुमार जी ।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 20, 2015 at 2:31pm
बहुत बहुत आभार आदरणीय Sunil Verma जी।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 20, 2015 at 2:27pm
बहुत बहुत आभार आपका रचना पर उपस्थित होकर प्रोत्साहित करने के लिए आदरणीया राहिला जी।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Wednesday
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service