For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

धूमिल सपने हुए हमारे

धूमिल सपने हुए हमारे
रंगहीन सी
प्रत्याशाएँ
सोये-जागे सन्दर्भों की
फैली हैं
मन पर शाखाएँ

 

शंकायें तो रक्तबीज सी
समाधान पर भी
संशय है
अपने पैरों की आहट में
छिपा हुआ अन्जाना
भय है

 

किस-किसका अभिनन्दन कर लें
किस-किसका हम
शोक मनाएँ

 

सांस-सांस में दर्प निहित है
कुछ होने कुछ
अनहोने का
कुछ पाने की उग्र लालसा
लेकिन भय
सब कुछ खोने का
 
अनगिन संवत्सर बीते हैं
चुकी न कल्पित
जिज्ञासाएँ।

 
----जगदीश पंकज

मौलिक ,तथा अप्रकाशित

Views: 554

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by JAGDISH PRASAD JEND PANKAJ on February 15, 2015 at 10:49pm

,रचना पसन्द करने तथा अभिमत प्रकट करने पर हृदयतल से आभार गिरिराज भंडारी जी ,  Saurabh Pandey जी  -जगदीश पंकज


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 15, 2015 at 10:26pm

समाज का सुख या दुख वैयक्तिक नहीं होता. इसकी अनुभूति सामुहिक होती है. परन्तु, समाज का वर्ग विभाजन जिस ढंग से हुआ है वह वर्गों को परस्पर असंपृक्त हो जाने का कारण बन कर व्याप गया है. ऐसे में हेय मान लिये गयों तथा वंचितों के दर्द और उनकी सुप्त होती उम्मीदों को जिस तरह से आपने शब्द दिये हैं आदरणीय जगदीश प्रसादजी यह श्लाघनीय है. विशेषकर पहला बन्द विन्दुवत है.
आपके इस नवगीत के लिए हार्दिक बधाइयाँ.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 15, 2015 at 9:06pm

बहुत खूब सूरत रचना हुई है , आदरणीय जगदीश भाई , सभी की मानसिक स्थितियों को बयान करती लगी । हार्दिक बधाई

Comment by JAGDISH PRASAD JEND PANKAJ on February 14, 2015 at 5:47pm

मिथिलेश वामनकर जी, Dr. Vijai Shanker जी, Shyam Narain Verma जी, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी , ajay sharma जी  Hari Prakash Dubey जी ,रचना पसन्द करने तथा अभिमत प्रकट करने पर हृदयतल से आभार -जगदीश पंकज

Comment by Hari Prakash Dubey on February 14, 2015 at 9:11am

आदरणीय जगदीश पंकज जी , //शंकायें तो रक्तबीज सी 
समाधान पर भी 
संशय है
अपने पैरों की आहट में 
छिपा हुआ अन्जाना 
भय है// सुन्दर रचना , हार्दिक बधाई सादर !

Comment by ajay sharma on February 13, 2015 at 10:29pm

kal kal bahti ,,,,jagmagate bimbo se saji is rachna ke liye .......adarniya .....bahut bahut shukriya 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 13, 2015 at 2:44pm

AADARNEEY

ATI  SUNDAR   I

Comment by Shyam Narain Verma on February 13, 2015 at 11:09am
अच्छी प्रस्तुति आदरणीय ,बधाई 
Comment by Dr. Vijai Shanker on February 13, 2015 at 6:30am
कुछ होने कुछ
अनहोने का
कुछ पाने की उग्र लालसा
लेकिन भय
सब कुछ खोने का॥
बहुत दिन बाद, पर बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति , यथार्थ है, इच्छाओं का अंत नहीं , पर वही जीवन है, आदरणीय जगदीश प्रसाद जेंद पंकज जी , बहुत बहुत बधाई इस रचना पर, सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 12, 2015 at 9:36pm
बहुत सुन्दर प्रस्तुति। इच्छाओं की कोई सीमा नहीं। हार्दिक बधाई स्वीकारें।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Monday
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service