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आभास हो  तुम  ........

आभास हो  तुम  विश्वास  नहीं हो
तुम रूठी  तृप्ति  की प्यास नहीं हो
जिन मधु पलों को मौन भी तरसे
तुम उस पूर्णता का प्रयास नहीं हो

आभास हो  तुम  विश्वास  नहीं हो 
तुम रूठी  तृप्ति  की प्यास नहीं हो .........

अतृप्त कामनाओं के स्वप्न नीड़ हो
अभिलाष कलश  के  विरह नीर हो
जिस प्रकाश  को  तिमिर भी तरसे
तुम उस  जुगनू  का प्रकाश नहीं हो

आभास हो  तुम  विश्वास  नहीं हो 
तुम रूठी  तृप्ति  की प्यास नहीं हो ......

पथिक हो  तुम  निर्जीव  राह  के
शूलों  से  आहत   पुष्प  आह के
प्रतिपल  घटती तुम देह छवि हो
तुम जीवन  का मधुमास नहीं हो

आभास हो  तुम  विश्वास  नहीं हो 
तुम रूठी  तृप्ति  की प्यास नहीं हो .....

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 695

Comment

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Comment by Sushil Sarna on December 12, 2014 at 6:49pm

आदरणीय योगराज प्रभाकर जी रचना पर आपकी नज़र ने जो उसमें छुपे भावों को अपनी प्रशंसा से सम्मानित किया है उसके लिए मैं दिल की गहराईयों से आपका आभारी हूँ। प्रत्युत्तर में विलम्ब के लिए क्षमा।  


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 10, 2014 at 10:47am

पथिक हो  तुम  निर्जीव  राह  के
शूलों  से  आहत   पुष्प  आह के
प्रतिपल  घटती तुम देह छवि हो
तुम जीवन  का मधुमास नहीं हो

बहुत खूब आ० सुशील सरना जी, बहुत सुन्दर और भावपूर्ण गीत रचा है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।

Comment by Sushil Sarna on December 9, 2014 at 4:00pm

आदरणीय    गिरिराज भंडारी      जी गीत पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 6, 2014 at 1:36pm

वाह ! आदरणीय सुशील भाई , लाजवाब गीत रचना हुई है , बधाई !

Comment by Sushil Sarna on December 5, 2014 at 12:55pm

आदरणीय    narendrasinh chauhan      जी गीत पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on December 5, 2014 at 12:54pm

आदरणीया  rajesh kumari   जी गीत पर आपकी ऊर्जावान प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on December 5, 2014 at 12:51pm

आदरणीय  vijay nikore   जी गीत पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on December 5, 2014 at 12:51pm

आदरणीय   Hari Prakash Dubey     जी गीत पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 4, 2014 at 9:09pm

बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति ..हार्दिक बधाई आपको आ० सुशील सरना जी 

Comment by vijay nikore on December 4, 2014 at 5:01pm

अति सुन्दर। बधाई।

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